छोड़ दें किसी के घर बिन बुलाए मेहमान बनकर जाने की आदत, जानिए इस बारे में गरूड़ पुराण में क्या कहा गया है

हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण का एक विशेष महत्व है। गरुड़ पुराण का पाठ उस समय विशेष तौर पर कराया जाता है जब किसी घर में किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है। किसी व्यक्ति के मृत्यु के बाद क्रिया कर्म के 13 दिन के दौरान गरुड़ पुराण का पाठ कराया जाता है। मान्यता है कि व्यक्ति की मृत्यु हो जाने के बाद गरुड़ पुराण का पाठ कराने से आत्मा को सत्कर्म और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

गरुड़ पुराण में कई ऐसी बातें भी बताई गई हैं जिन्हें हर व्यक्ति को जानना चाहिए। गरुड़ पुराण में बिन बुलाए मेहमानों के बारे में भी बताया गया है। इस लेख में हम आपको इसी विषय पर जानकारी देने जा रहे हैं।
तो आइए इस बारे में जाने।
गरुड़ पुराण के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी के घर पर बिना बुलाए पहुंच जाए या फिर बिना बुलाए शादी-ब्याह या फिर किसी भोज में पहुंच जाए तो ऐसे व्यक्ति अगले जन्म में कौवा बनते हैं। कहने का अर्थ है कि ऐसे व्यक्तियों का जन्म अगले जन्म में कौवे के रूप में होता है। इसीलिए बिना बुलाए किसी के घर जबरदस्ती अतिथि बनकर नहीं जाना चाहिए।
गरुड़ पुराण में इस बात का भी जिक्र है कि ऐसे व्यक्ति ना सिर्फ कौवा बनते हैं बल्कि उन्हें यह सजा मिलती है कि वह कौवा बन कर लोगों को यह बताएं कि उसके घर पर कोई अतिथि आने वाला है जिससे घर का मालिक आने वाले मेहमान की खातिरदारी में तैयारी शुरू कर सके। इसीलिए अगर घर के छत या मुंडेर पर जब कोई कौवा कांव-कांव करता है तो कहा जाता है कि कोई मेहमान आ रहा है।

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