जानिए क्या है पैनिक अटैक, उसके लक्षण और बचाव

पैनिक अटैक (Panic Attack) एक ऐसा मनोरोग है जिससे पीड़ित इंसान डर और खौफ के साये में रहता है। इस बीमारी की चपेट में आया इंसान इतना डर जाता है कि उसे हर गतिविधि से डर लगता है। कोरोना काल में इस तरह के मरीजों में बढ़ोतरी हुई है। पैनिक अटैक (Panic Attack) एक ऐसा दौरा होता है, जो व्यक्ति को कभी भी कहीं भी आ सकता है। पैनिक अटैक 15 सेकंड से लेकर 1 घंटे की अवधि तक भी रहता है। कहा जाता है कि पैनिक अटैक का अनुभव, किसी व्यक्ति की जिंदगी के सबसे भयावह, कष्टप्रद और असहज अनुभवों में से एक होता है। इस रोग से पीड़ित इंसान इतना ज्यादा डर जाता है कि उसे हर वक्त ऐसा महसूस होता है जैसे वो किसी बड़ी बीमारी या किसी बड़ी परेशानी में है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज डर कर घर में ही रहना पसंद करते हैं। उन्हें हर वक्त मौत का डर सताता रहता है। 
पैनिक अटैक एक अचानक डर लगने की भावना होती है जो गंभीर शारीरिक प्रतिक्रियाओं को उत्तेजित करती है जबकि आपके आसपास कोई वास्तविक खतरा या स्पष्ट कारण नहीं होता है। पैनिक अटैक बहुत डराने वाले हो सकते हैं। जब पैनिक अटैक होते हैं, तो आप यह सोच सकते हैं कि आप नियंत्रण खो रहे हैं, आपको दिल का दौरा पड़ रहा है या आप मरने वाले हैं।यद्यपि पैनिक अटैक जानलेवा नहीं होते हैं, लेकिन वे आपको भयभीत कर सकते हैं। बहुत से लोगों को उनके जीवनकाल में सिर्फ एक या दो बार पैनिक अटैक होते हैं और तनावपूर्ण स्थिति समाप्त होने पर समस्या दूर हो जाती है। लेकिन अगर आपको बार बार पैनिक अटैक हो रहे हैं और आप ज़्यादातर समय भयभीत रहते हैं, तो आपको पैनिक विकार नामक एक स्थिति हो सकती है इसका उपचार बहुत प्रभावी हो सकता है।

पैनिक अटैक क्या है?

पैनिक अटैक (Panic Attack) एक ऐसा दौरा होता है, जो व्यक्ति को कभी भी कहीं भी आ सकता है। यह अटैक इतना अचानक होता है कि कई बार लोगों को समझ ही नहीं आता है कि वह मरीज के साथ क्या करें। पैनिक अटैक 15 सेकंड से लेकर 1 घंटे की अवधि तक भी रहता है। ऐसे इंसान को हर दूसरे पल की चिंता रहती है। उसे घबराहट, पसीना आना, हाथ पैरों में झनझनाहट होना, सांस लेने में दिक्कत होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस रोग से पीड़ित इंसान इतना ज्यादा डर जाता है कि उसे हर वक्त ऐसा महसूस होता है जैसे वो किसी बड़ी बीमारी या किसी बड़ी परेशानी में है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज डर कर घर में ही रहना पसंद करते हैं। उन्हें हर वक्त मौत का डर सताता रहता है। एक अध्ययन में पता चला है कि शहरों में रहने वाले 30 फीसद लोग जिंदगी में कम से कम एक बार पैनिक अटैक का सामना कर चुके हैं। इस बीमारी से मुक्ति पाना कोई मुश्किल काम नहीं है।

पैनिक अटैक के प्रकार:-

अप्रत्याशित पैनिक अटैक (Unexpected panic attack) – अप्रत्याशित पैनिक अटैक ऐसे पैनिक अटैक होते हैं जो बिना किसी चेतावनी या संकेत के होते हैं। यह पैनिक अटैक किसी परिस्थिति से सम्बंधित नहीं होते हैं।
स्थितिगत पैनिक अटैक (Situational panic attack) – स्थितिगत पैनिक अटैक ऐसे पैनिक अटैक होते हैं जो किसी स्थिति या किसी वजह से होते हैं। जैसे – सार्वजनिक रूप से बोलने या बोलने के विचार से पैनिक अटैक होना। 
स्थितिगत संवेदनशील पैनिक अटैक (Situationally Predisposed Panic Attack) – स्थितिगत संवेदनशील पैनिक अटैक ऐसे पैनिक अटैक होते हैं जो किसी परिस्थिति से सम्बंधित होते हैं, लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं होता कि उस स्थिति के तुरंत बाद आपको पैनिक अटैक हो। इस तरह के पैनिक अटैक किसी स्थिति के संपर्क में आने के आधे घंटे बाद तक शुरू हो सकते हैं।

पैनिक अटैक के लक्षण
पैनिक अटैक एक संवेदनशील तंत्रिका तंत्र (एसएनएस) की प्रतिक्रिया है। सबसे सामान्य लक्षणों में कंपन, सांस लेने में कठिनाई, दिल का तेजी से धड़कना, सीने में जकड़न, हॉट फ्लैश, कोल्ड फ्लैश, जलन का अनुभव, पसीना, मिचली, चक्कर आना, सिर में हल्कापन महसूस होना, सांसें तेज चलना, सांसों में रुकावट या दम घुटने की अनुभूति और मस्तिष्‍क में कमजोरी शामिल हैं। 
पैनिक अटैक के ये लक्षण भी हो सकते हैं –
• पेट में ऐंठन।• सांस फूलना, ठंड लगना।• छाती में दर्द, सिर दर्द।• बेहोशी, चक्कर आना।• गले में खिंचाव होना।• निगलने में परेशानी।• नियंत्रण खोने का मृत्यु का डर।• आने वाली प्रलय या खतरे की भावना।• चेहरे, गर्दन, कान और धड़ में गर्माहट महसूस होना।

पैनिक अटैक की सबसे बुरी बात है कि आप इसी बात से भयभीत रहते हैं कि आपको फिर से पैनिक अटैक होगा।पैनिक अटैक 15 सेकंड से लेकर 1 घंटे की अवधि तक भी रहता है। ऐसे इंसान को हर दूसरे पल की चिंता रहती है।
पैनिक अटैक के कारण
पैनिक अटैक के लक्षण अक्सर किशोरावस्था या शुरुआती वयस्कता में शुरू होते हैं और पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक प्रभावित करते हैं। अभी तक यह स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं हो पाया है कि पैनिक अटैक के क्या कारण होते हैं, लेकिन इसकी वजह हो सकते हैं –

– धूम्रपान या अत्यधिक कैफीन का सेवन।
– मस्तिष्क के कार्य के हिस्सों में कुछ बदलाव।
– पैनिक अटैक का एक पारिवारिक इतिहास।
– बचपन में शारीरिक या यौन शोषण का इतिहास।
– अत्यधिक तनाव, जैसे किसी प्रिय व्यक्ति की मृत्यु या गंभीर बीमारी।
– नकारात्मक भावनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील स्वभाव।
– एक दर्दनाक घटना, जैसे कि यौन उत्पीड़न या गंभीर दुर्घटना।
– जीवन में प्रमुख बदलाव, जैसे कि तलाक या बच्चा होना।
– वैसे तो पैनिक अटैक आने की कोई खास वजह नहीं होती लेकिन कई बार यह एंग्जाइटी से जुड़ा हो सकता है।
– हॉर्मोन डिस्ऑर्डर, अस्थमा, धूल मिट्टी से या किसी चीज से एलर्जी और सांस लेने में किसी तरह की परेशानी भी पैनिक अटैक का कारण बनती है।

पैनिक अटैक से बचाव
पैनिक अटैक से बचाव के लिए आप अपने खानपान में बदलाव कर सकते है। कॉगनिटिव-बिहेवियरल थैरेपी ले सकते हैं। इस थैरेपी में और दवाओं के माध्यम से पैनिक अटैक का इलाज किया जा सकता है। दवाओं के साथ साइकोथैरेपी देने से जल्दी राहत मिलती है। 
संतरा
विटामिन से भरपूर होने के कारण रक्‍तचाप को बनाये रखने के साथ पैनिक अटैक को कम करने में मदद करता है। संतरा पैनिक अटैक के दौरान न्‍यूरॉन्‍स को शांत करने में मदद करता है। इसके अलावा यह सुखदायक प्रभाव प्रदान कर पैनिक अटैक को रोकने में मदद करता है।  सालमन
सालमन जैसे खाद्य पदार्थ मस्तिष्क के कामकाज को बनाए रखने के लिए ऑक्सीजन, ग्लूकोज और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की आवश्यक राशि मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रदान करते हैं। जो पैनिक अटैक के जोखिम को कम करने में सहायता करता है। 
कॉगनिटिव-बिहेवियरल थेरेपी
इस थेरेपी और दवाओं के माध्यम से पैनिक अटैक का इलाज किया जा सकता है। कई दवाइयां इस समस्या के इलाज में कारगर हैं। दवाओं के साथ साइकोथेरेपी देने से जल्दी राहत मिलती है। पैनिक अटैक के मरीजों को शराब और कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए।
बादाम
बादाम में पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों और मिनरल प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं, जो नर्वस सिस्‍टम के कामकाज में सुधार करने के साथ आपके मस्तिष्‍क को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा यह पैनिक अटैक को रोकने में भी मदद करता है।  ग्रीन टी के फायदे 
ग्रीन टी में एंटीऑक्‍सीडेंट और पॉलीफिनॉल मस्तिष्‍क को तनाव कम करने और मोनोमाइन ऑक्सीडेज की गतिविधि को कम कर मस्तिष्क की कोशिकाओं और ऊतकों के स्वास्थ्य में मदद करता है। साथ ही पॉलीफिनॉल पैनिक अटैक से जुड़े तनाव को कम करने में भी मदद करता है। सामाजिक कारकों के कारण होने वाले पैनिक अटैक को कम करने के लिए आपको ग्रीन टी का सेवन करना चाहिए। अधिक लाभ पाने के लिए ग्रीन टी के कम से कम तीन कप पीने चाहिए।  

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