जाने जीरा स्वास्थ के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, आइये जानते है इसके अद्भुत फायदे।

यहां तक कि जीरे के बीजों को मोटापे और डायबिटीज के लक्षणों को कम करने में चिकित्‍सकीय रूप से प्रभावी पाया गया है। ऐसे में जीरा न केवल खाने के स्‍वाद को बढ़ाता है बल्कि सेहत को भी लाभ पहुंचाता है। जीरे के स्वास्थ्य संबंधी अनुपम गुण इसे न केवल भारतीय खाने का अहम हिस्सा बनाते हैं बल्कि पुराने समय में यह रोमन, ग्रीक और मिस्र संस्कृति का भी खास हिस्सा था। इतना खास कि यह करंसी currency) के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। जीरा शरीर के सभी अंगों के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है और इसके उपयोग से विभिन्न प्रकार के लाभ होते हैं।

जीरा के नाम :-

इंग्लिश में जीरे को क्यूमिन सीड (cumin seed) के नाम से जानते हैं। जीरे का वैज्ञानिक नाम क्यूमिनम सायमिनम (cuminum cyminum) है। इसे गुजराती में ‘जीरू’, बंगाली में ‘जीरा या जीरे’, मराठी में ‘जीरे’, ‘जीर्रे’, ‘जीरोगिरे’ के नाम से जानते हैं। वैसे आपको बता दें कि जीरा तीन प्रकार का होता है। लेकिन, मार्केट में इसकी दो ही किस्में मिलती हैं-सफेद जीरा (white cumin) और काला जीरा (black cumin)।

जीरा खाने का सही तरीका :-

  • जीरा का उपयोग सूप, सॉस और अचार को तैयार करने में किया जा सकता है।
    जीरे के बीजों को पानी के साथ उबालकर, इसे चाय के रूप में भी पिया जा सकता है।
    जीरा के बीजों का उपयोग दाल में तड़का लगाने के लिए किया जा सकता है। इसका उपयोग चिकन और विशेष रूप से उत्तर भारत में तंदूरी व्यंजनों में किया जा सकता है।
    जीरा चावल भारत में एक आम पकवान है जो घी में जीरा के बीजों को भूनकर पानी में पकाया जाता है। चिकन या किसी भी सब्जी के साथ मिलाकर यह और भी स्वादिष्ट बन जाता है।

जीरे मे मौजूद पोषक तत्व :-
जीरे में पर्याप्त मात्रा में मौजूद पोषक तत्व और खनिज इसकी गुणवत्ता को बढ़ाने में सहायक है। जीरे में विटामिन-सी, विटामिन-के, विटामिन-बी 1, 2, 3, विटामिन-ई, प्रोटीन, कैल्शियम, मेग्नेशियम, पोटेशियम, जिंक, कॉपर, आयरन, कार्बोहाइड्रेट जैसे तमाम तत्व पाए जाते हैं।

जीरे खाने के स्वास्थ्य लाभ :-
शरीर में लौह की कमी एनीमिया का सबसे बड़ा कारण होता है। जीरा लौह का एक समृद्ध स्रोत होने के कारण एनीमिया को ठीक करने में भी सक्षम है।

यदि आप अनिद्रा के शिकार है तो चिंता मत कीजिये, जीरे की मदद से आप इस विकार से आसानी से लड़ सकते हैं। जीरे में मेलाटोनिन होता है जो अनिद्रा से एवं अन्य सोने से सम्बंधित विकारों से लड़ने के लिए अनिवार्य माना जाता है।

जीरा में आयरन की मात्रा अधिक होती है जिसकी वजह से यह शरीर में रक्त के स्तर को बढ़ाता है और मासिक धर्म चक्र को स्वस्थ बनाने में मदद करता है।

जीरे में मौजूद एंटीवायरल और जीवाणुरोधी गुणों की वजह से यह शरीर में कई तरह के संक्रमण होने से रोकता है।

जीरा में हाइपोलिपिडेमिक (hypolipidemic ) गुण होते हैं, जो वसा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।

जीरा विटामिन सी में समृद्ध है और इसमें एंटी-फंगल गुण होते हैं। सर्दी-जुकाम और अन्य श्वसन समस्याओं को ठीक करने में ये मदद करता है।

जीरा आपके हड्डी के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत फायदेमंद होता है। इसमें कैल्शियम, पोटैशियम एवं मैग्नीशियम जैसे खनिज निहित हैं जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य माने जाते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन बी 12 भी है जो हड्डियों के लिए स्वास्थ्यवर्धक है।

अपनी वायुनाशी गुण के वजह से जीरा उदरशूल में हो रहें दर्द का भी एक सफल उपचार है। बच्चों के उदरशूल में दर्द होना बहुत ही आम है और जीरा बच्चों को उदरशूल से हो रही पीड़ा से राहत दिला सकता है।

जीरा आयुर्वेद में पेट दर्द, अपच, दस्त, पेट फूलना, मतली आदि पाचन सम्बंधित विकारों के उपचार के लिए एक बहुत ही मशहूर औषधि है। यह अग्नाशय एंजाइम जो पाचन क्रिया में समर्थक होते हैं, उन्हें उत्तेजित करता है। यह पेट में हो रही अम्लता का भी एक सफल उपचार है।

जीरा कैल्शियम और आयरन से समृद्ध होता है यह दोनों ही गर्भवती एवं स्तनपान करा रही महिलाओं के लिए उत्तम है। यह स्तन के दूध के उत्पादन को उत्तेजित कर उसकी मात्रा को बढ़ाता है। इसके अलावा यह माँओं को शिशु-जन्म उपरान्त खोई हुई ताकत और फुर्ती को वापिस लाने में भी सहायक है

कोलोन और स्तन कैंसर के इलाज में जीरे का सेवन सहायक हो सकता है। इसमें थाइमोक्विनोन (thymoquinone), डिथिमोक्विनोन (dithymoquinone), थाइमोहाइड्रोक्विनोन (thymohydroquinone) और थाइमोल (thymol ) मौजूद होते है जो एंटी-कैंसरजन्य (anti-carcinogenic) होते हैं।

जीरे में निहित एंटी-ऑक्सीडेंट एवं एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण स्मरण-शक्ति में तो सुधार लाते ही हैं साथ ही यह एकाग्रता के स्तर में भी सुधार लाते हैं। यह अलजाइमर एवं उम्र के साथ आने वाली याददाश्त संबधित विकारों का भी एक सफल उपचार है। इसमें विभिन्न प्रकार के विटामिन बी एवं विटामिन ई भी है जो नसों को उत्तेजित कर दिमाग के कार्यशीलता में तो सुधार लाते हैं।

जीरे के नुकसान निम्न है –

• गर्भवती महिलाओं को जीरे के अधिक सेवन से बचना चाहिए।
• जीरे का अधिक सेवन पाचन संबंधी समस्या, हार्टबर्न का एक कारण हो सकता है।
• ज्‍यादा मात्रा में जीरे के सेवन से गर्भपात या समय से पहले डिलीवरी होने की आंशका बढ़ जाती है।
• जीरे के वातहर प्रभाव के कारण यह अत्‍यधिक डकार का कारण बन सकता है।
• जीरे से गर्भवती महिलाओं पर गर्भान्‍तक प्रभाव पड़ सकता है।

नोट: यह लेख सिर्फ आपकी सामान्य जानकारी प्रदान करती है। ये किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए ध्यान रहे इन पर अमल करने से पहले किसी विशेषज्ञ या अपने डॉक्टर की सलाह एक बार अवश्य लें।

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