किसान आंदोलन : किसानो का कैंडल मार्च, रेल रोको अभियान का भी किया ऐलान

कृषि कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन पिछले लगभग 3 महीनों से दिल्ली के तमाम बॉर्डरों पर जारी है. किसान लगातार केंद्र की मोदी सरकार से तीन कृषि कानून को एक सुर में वापस लेने की मांग कर रहे हैं और इसको लेकर सरकार और आंदोलनकारी किसानों के बीच 10 बार से अधिक बैठक हो चुकी है. 

बैठकें तो कई हुई पर कृषि कानून को लेकर अभी तक कोई ठोस हल नहीं निकल पाया है. कृषि कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी है और किसानों का कहना है कि जब तक सरकार तीन कृषि कानून वापस नहीं ले लेती वे अपने घर नहीं लौटेंगे.

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किसानों का आंदोलन दिन – प्रतिदिन तेज होता जा रहा है. चाहे वो दिल्ली का सिंघु बॉर्डर हो या फिर गाजीपुर बॉर्डर किसान लगातार कंधे से कंधा मिलाकर यहां डटे हुए हैं. इसी बीच किसानों ने कल यानि 14 फरवरी को देशभर में कैंडल मार्च निकाला और 16 जनवरी को सर छोटूराम की जयंती पर समारोह मनाने तथा 18 फरवरी को दोपहर 12:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक रेल रोको अभियान का ऐलान किया है.

किसानों का कहना है कि आंदोलन जीविका की लड़ाई है और मोदी सरकार को उनकी बात माननी ही होगी और वे अपने आखरी दम तक इस कानून को वापस कराने के लिए संघर्षर करेंगे. इसके साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली हिंसा और किसानों पर दर्ज किए गए मुकदमे को लेकर सरकार को घेरा और मांग की कि किसानों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं जिन्हें जल्द से जल्द वापस लिया जाना चाहिए.

इसके साथ ही भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है किसान आंदोलन केवल एक राज्य का नहीं है बल्कि पूरे देश का आंदोलन है. गौरतलब है कृषि कानून पर बात अभी तक बन नहीं पाई है

सरकार जहां कृषि कानून को वर्तमान समय की मांग बता रही है तो वहीं किसानों को इस बात पर कतई विश्वास नहीं है कि यह कानून उनके किसी काम आएगा. अब किसान आंदोलन कब तक चलेगा और क्या कृषि कानून पर सरकार आंदोलनकारी किसानों के बीच कोई बात बनेगी ये तो आने वाले समय में ही पता चलेगा.

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