ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के मौके पर स्वर्ण मंदिर में दिखे खालिस्तानी झंडे

आज ( 6 जून 2021, रविवार ) के दिन 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार (operation blue star) की 37 वीं बरसी के मौके पर भारत के कुछ गद्दार और अलगाववादी नेताओं ने स्वर्ण मंदिर (श्री हरमंदिर साहिब) के अंदर एक कार्यक्रम के दौरान खालिस्तानी झंडे लगाए। जिसके बाद अब पंजाब सरकार ने पूरे राज्य की सुरक्षाएं बढ़ाकर और कड़ी कर दी है। ऐसे में सिख संगठनों ने कई कार्यक्रमों की योजना बनाई है। इसी के तहत अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) के अंदर एक कार्यक्रम के दौरान खालिस्तानी अलगाववादी जरनैल भिंडरावाले के पोस्टर भी लगाए हैं। जिसकी बहुत सी तस्वीरें भी सामने आई है। अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने कहा है कि शहरभर में निगरानी रखने के लिए 6,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। पुलिस ने गुरुवार को हॉल गेट से हेरिटेज स्ट्रीट तक फ्लैग मार्च किया, जो स्वर्ण मंदिर की ओर जाता है

स्वर्ण मंदिर में लगे खालिस्तान समर्थक नारे
ऑपरेशन ब्लू स्टार की 37वीं वर्षगांठ के मौके पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में खालिस्तानी समर्थकों द्वारा नारे लगाए गए। साथ ही जरनैल सिंह भिंडरावाले के समर्थन में पोस्टरों को देखा गया। सिख उपदेशक जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अपने संबोधन में भारतीय सेना पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने सिख समुदाय के साथ अन्याय किया है। स्वर्ण मंदिर में भिंडरावाले को ‘शहीद’ के रूप में सम्मानित किए जाने के साथ, उनके बेटे को भी स्वर्ण मंदिर परिसर में सम्मानित किया गया। इसके साथ ही खालिस्तान समर्थकों को तलवार लिए हुए और मंदिर परिसर के अंदर ‘खालिस्तान’ की मांग करते हुए नारे लगाते हुए सुना गया। 

क्यों हुआ ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’
इंदिरा गांधी ने उस समय पंजाब में कानून और व्यवस्था की स्थिति को काबू में करने के लिए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ (operation blue star) शुरू किया। बता दें की 1984 का ऑपरेशन ब्लू स्टार भारतीय सेना द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा आंतरिक सुरक्षा मिशन था। भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत हरमंदिर साहिब परिसर (स्वर्ण मंदिर) में हथियार जमा कर रहे सिख आतंकवादियों को हटाने के लिए सैन्य अभियान का आदेश दिया, जो 1 जून से 8 जून, 1984 के बीच अमृतसर में किया गया था। ऑपरेशन में कई लोगों की जान चली गई और स्वर्ण मंदिर का कुछ हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या कर दी गई थी। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दंगे भड़क गए थे जिनमें लगभग 3,000 सिख मारे गए थे।

खालिस्तान आंदोलन की शुरुआत

सन 1947 में जब पूरा देश संगठित होकर आजादी की लड़ाई लड़ रहा था तब कुछ सिख नेता अपने लिए अलग देश खालिस्तान बनाने की योजना बना रहे थे। आजादी के बाद इसे लेकर हिंसक आंदोलन भी चला, जिसमें कई लोगों की जान गई थी। पंजाबी भाषी लोगों के लिए खालिस्तान बनाने की मांग सबसे पहले ‘पंजाबी सूबा’ आंदोलन से शुरू हुई। ‘पंजाबी सूबा’ आंदोलन के दौरान यह पहला मौका था जब पंजाब को भाषा के आधार पर अलग दिखाने की कोशिश हुई थी। इसी दौरान अकाली दल का भी जन्म हुआ था और कुछ ही वक्त में इस पार्टी ने बेशुमार लोकप्रियता हासिल कर ली थी। इस आंदोलन में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन भी हुआ और अंत में 1966 में ये मांग मान ली गई। भाषा के आधार पर पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की स्थापना हुई। 

हालांकि पंजाबी भाषी लोगों की इस मांग को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ऐतराज जताते हुए खारिज कर दिया था। इंदिरा गांधी का कहना था कि यह ‘देशद्रोही’ मांगें हैं। इसके बाद, 1980 के दशक में ‘खालिस्तान’ के तौर पर अलग राज्य की मांग ने जोर पकड़ लिया था। धीरे-धीरे ये मांग बढ़ने लगी और हिंसक होता चला गया। ये कोई ऑटोनोमी की मांग नहीं है, बल्कि उसकी आड़ में अलग देश की संरचना बनाने की योजना है। इसके बाद, 1980 के दशक में ‘खालिस्तान’ के तौर पर स्वायत्त राज्य की मांग ने जोर पकड़ लिया था। धीरे-धीरे ये मांग बढ़ने लगी और हिंसक होता चला गया।

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