कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का निधन, सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए बंद की गई इंटरनेट सेवाएं

ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी का बुधवार देर रात निधन हो गया। उन्होंने 91 साल की उम्र में श्रीनगर में अपने आवास पर रात करीब 10:30 पर आखिरी सांस ली। उन्हें सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ थी। मूलत: सोपोर के बोम्मई के रहने वाले गिलानी कई वर्षो से श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र हैदरपोरा में रह रहे थे। वह हृदय, किडनी, शुगर समेत कई बीमारियों से पीड़ित थे। बता दें कि गिलानी लंबे समय से बीमार थे और 2008 से अपने हैदरपोरा स्थित आवास पर नजरबंद थे।

प्रशासन ने एहतियातन घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को सख्त करते हुए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट करते हुए शोक जताया और परिवार और शुभचिंतकों के प्रति संवेदना जताई है। महबूबा मुफ्ती ने कहा, “गिलानी साहब के निधन की खबर से दुखी हूं। हम ज्यादातर बातों पर सहमत नहीं रह सके लेकिन मैं दृढ़ता और विश्वासों के साथ खड़े होने के लिए उनका सम्मान करती हूं। अल्लाह उन्हें जन्नत दें और उनके परिवार और शुभचिंतकों के प्रति संवेदना।”

गौरतलब हो की गिलानी कश्मीर में सक्रिय अलगाववादी नेता थे। गिलानी कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानते थे और उसे अलग करने की मांग करते थे। वह 1972, 1977 और 1987 में जम्मू-कश्मीर के सोपोर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रहे। उन्होंने 1990 के दशक में आतंकी हिंसा और अलगाववाद की सियासत करने वाले धड़ों को मिलाकर ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गठन किया था। इसमें 1987 के चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की खिलाफत करने वाले तमाम गुट शामिल हो गए थे। उन्होंने जून 2020 में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रमुख के रूप में पद छोड़ दिया था।

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