कर्नाटक: येदियुरप्पा के इस्तीफे से नाराज धर्माचार्य बोले- भाजपा को इसका भारी नतीजा भुगतना पड़ेगा

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद से ही कर्नाटक में हलचल और भी ज्यादा तेज हो गई है। कर्नाटक में येदियुरप्पा को हटाए जाने का 5,000 लिंगायत मठों ने भारी विरोध किया है। मठाधीशों ने चेतावनी दी है कि भाजपा को इसका नतीजा भुगतना पड़ेगा।
बता दें येदियुरप्पा पर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते 2013 में भाजपा ने उन्हें हटाया था। नतीजा यह हुआ कि विधानसभा में भाजपा महज 40 सीटों पर सिमट गई थी।
कर्नाटक के मशहूर लिंगेश्वर मंदिर के मठाधीश शरन बासवलिंगा ने कहा, “भाजपा ने बिना सोच-विचार के यह फैसला लिया है। लिंगायत मठाधीशों ने येदियुरप्पा को अपना कार्यकाल पूरा करने देने की मांग की थी, लेकिन लगता है भाजपा एक बार फिर भ्रमित हो गई है।”
उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोगों को नहीं पता है कि कर्नाटक में चुनाव कैसे होते हैं और कैसे जीते जाते हैं? यह सरकार बीएस येदियुरप्पा ने बनाई है। इसलिए उन्हें हटाना भाजपा को बड़े कष्ट में डाल सकता है।
शरन बासवलिंगा ने कहा, “यहां के मठाधीश्वर और करीब 5 करोड़ लोग उम्मीद कर रहे हैं कि भाजपा आलाकमान इन सभी हालात पर विचार करने के बाद ही फैसला लेगा। अगर बिना विचारे फैसला किया, तो राज्य के 5 हजार मठाधीश्वरों का एकजुट विरोध केंद्र को झेलना पड़ेगा।”
शरन बासवलिंगा ने आगे कहा कि हम पूरी जिंदगी के लिए येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनाने के लिए नहीं कह रहे थे, बल्कि यह कार्यकाल पूरा करने के लिए कह रहे थे। हमें इस कार्यकाल में कोई दूसरा मुख्यमंत्री कबूल नहीं है। जो लोग उम्र को आधार बनाकर उन्हें हटाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि येदियुरप्पा की उम्र भले ही ज्यादा हो, लेकिन उनकी शक्ति बिल्कुल युवा जैसी है। यहां बूथ लेवल तक की जैसी जानकारी उन्हें है, वैसी किसी नेता को नहीं है।
शरन बासवलिंगा ने आगे कहा कि येदियुरप्पा के लिंगायत समुदाय से होने की वजह से ही भाजपा को हमारा समर्थन है। उधर, कोट्टूर के वीरशैव शिवयोग मंदिर के लिंगायत समुदाय के मठाधीश्वर संगना बासव स्वामी ने कहा कि येदियुरप्पा को हटाने का षड्यंत्र राष्ट्रीय स्वयं सेवक संगठन का है। वे याद रखें कि कर्नाटक में लिंगायत की चलती है, संघ की नहीं।

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