लखीमपुर खीरी हिंसा मामले पर जेपी नड्डा का बड़ा बयान, कहा – हम हिंसा का समर्थन नहीं करते और कोई भी कानून से ऊपर नहीं

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले का मुख्य आरोपी अभी तक फरार है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र पर को शुक्रवार को क्राइम ब्रांच के दफ्तर में पेश होना था, लेकिन वह कल भी नहीं पहुंच पाए। हांलाकि अजय मिश्रा द्वारा शनिवार को अजय के पेश होने की बात कही गई है। इस बीच भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने लखीमपुर कांड को लेकर बड़ा बयान दिया है।

भाजपा अध्यक्ष नड्डा ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शुक्रवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी हिंसा की ‘पेशेवर और वैज्ञानिक’ जांच की जाएगी और इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी क्योंकि ‘कोई भी कानून ऊपर नहीं है।

एक मीडिया हाउस के कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हिंसा की घटना को चुनाव के नजरिये से नहीं बल्कि मानवता के नजरिये से देखा जाना चाहिए। उन्होंने लखीमपुर खीरी की घटना पर कहा कि कानून अपना काम करेगा। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2021 में नड्डा लखीमपुर खीरी की घटना को दुखद बताया है। उन्‍होंने आश्‍वासन दिया है कि इसकी समुचित जांच होगी।

दोषियों को सजा मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘कानून अपना काम करेगा। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। एक एसआईटी का गठन किया गया है।सर्वश्रेष्ठ पेशेवर और वैज्ञानिक स्तर की जांच की जाएगी। इसमें (घटना में) शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी।’ नड्डा ने आगे कहा भाजपा ऐसी किसी भी गतिविधि का समर्थन करती, जहां कानून हाथ में लिया जाए।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि विरोध का एक नया चलन सामने आ रहा है, जो चिंता का विषय है। हमें इस पर विचार करने की आवश्यकता है। कई घटनाएं हो रही हैं। मैं इस घटना के बारे में बात नहीं कर रहा हूं। मैं सामान्य चर्चा कर रहा हूं। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हम सिस्टम पर कितना दबाव बना सकते हैं। इस पर विचार करने की जरूरत है।

तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन पर सवालों के जवाब में, नड्डा ने कहा कि सरकार ने किसान नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत की और आगे की बातचीत के लिए दरवाजे खुले रखे लेकिन कुछ नहीं हुआ। यह आंदोलन किसलिए है। जब कृषि कानूनों का कार्यान्वयन 18 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है और हम बातचीत करने के लिए तैयार हैं तो इस आंदोलन का क्या तुक है।

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