जेएनसीएएसआर के वैज्ञानिक गोविंदराजू को अभूतपूर्व खोजों के लिए मिला शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (विज्ञान एवम प्रौद्योगिकी मंत्रालय): जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र के प्रोफेसर टी गोविंदराजू को उनकी व्यापक परिवर्तनकारी अवधारणाओं और खोजों, जिसमें अल्जाइमर्स, फेफड़ों के कैंसर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के पहचान और उपचार के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रतिष्ठित शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, 2021 के लिए चयन किया गया है।

प्रोफेसर गोविंदराजू के पिछले 10 वर्षों से निरंतर जारी अनुसंधान प्रयासों ने इस वर्ष की शुरुआत में परिणाम दिया। उन्होंने एक नोवल ड्रग कैंडिडेट मॉलिक्यूल (टीजीआर 63) की खोज की है, जो अल्जाइमर्स रोग से प्रभावित मस्तिष्क में एमलॉइड नामक विषाक्त प्रोटीन को एकत्र करने वाली प्रजाति को प्रभावी तरीके से कम करता है और पशु मॉडल में संज्ञान संबंधी गिरावट को वापस पाने में मदद करता है।

एक दवा कंपनी ने इस मॉलिक्यूल को क्लिनिकल ट्रायल के लिए चुना है, जो मनुष्यों में अल्जाइमर्स रोग के इलाज का मजबूत विश्वास जगाता है। मॉलिक्यूलर टूल्स पर उनका अग्रणी कार्य अल्जाइमर्स रोग का पहचान कर उसका पता लगाता है और इसे अन्य न्यूरो डीजेनरेटिव रोगों से अलग करता है।

प्रोफेसर गोविंदराजू ने अल्जाइमर्स की शुरुआती पहचान के लिए एनआईआर, पीईटी और रेटिना-आधारित प्लेटफॉर्म विकसित करने के लिए एक कंपनी-वीएनआईआर बायोटेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड की भी स्थापना की है। चार साल पुरानी इस फर्म को भारत की बढ़ती हुई बायोटेक कंपनियों में से एक ने मान्यता दी है और इसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह मिली है।

प्रोफेसर गोविंदराजू कहते है, “मैं मानव स्वास्थ्य से संबंधित क्षेत्र के अविजित पथ पर चलने के लिए उत्सुक था। यह तथ्य कि अल्जाइमर्स जैसी न्यूरो संबंधी बीमारियों में शुरुआती पहचान या इलाज के प्रभावी तरीके नहीं थे, ने मुझे इस क्षेत्र को चुनने के लिए प्रेरित किया। मुझे उम्मीद है कि मेरे योगदान और शोध से रोग की शीघ्र पहचान के साथ-साथ उपचार का मार्ग प्रशस्त होगा।”

बता दें अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और जापान के प्रमुख विश्वविद्यालयों में विजिटिंग फैकल्टी के अलावा, प्रो गोविंदराजू ग्रामीण स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को लेकर काफी सक्रिय हैं और आउटरीच पहल में शामिल रहे हैं। फिलहाल वह कर्नाटक और अन्य राज्यों के स्कूली बच्चों के बीच मानसिक बीमारी को लेकर जागरूकता पैदा कर रहे हैं। 

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