इन चीजों को त्याग देने में ही है भलाई, जानिए क्या कहते हैं आचार्य चाणक्य

महान अर्थशास्त्री, कूटनीतिक और विद्वान आचार्य चाणक्य ने अपनी चाणक्य नीति में कई ऐसी बातों का वर्णन किया है जिन्हें अगर लोग अपने जीवन में अपना लें तो उनके कई काल – कष्ट दूर हो सकते हैं। चाणक्य नीति में चाणक्य एक ऐसी चीज का भी वर्णन करते हैं जिसे इंसान को जितनी जल्दी हो सके त्याग देना चाहिए। चाणक्य की माने तो ये चीज इंसान को जीवन में सफल होने से रोकती है और इससे जीवन भर कष्ट भी बना ही रहता है। इस लेख में हम आपको आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गई है। इस चीज के बारे में ही बताने जा रहे हैं कि किस प्रकार यह चीज इंसान के जीवन में बाधा बनती है।
तो आइए इस बारे में जाने।
अब अगर इस चीज की बात करें तो ये चीज है अधिक लगाव आचार्य चाणक्य के अनुसार मोह लगाव सभी प्रकार के दुखों का कारण है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मोह व्यक्ति को अज्ञान की तरफ ले जाता है और जीवन में समस्याएं शुरू होने लगती हैं। आचार्य चाणक्य की मानें तो मोह में फंसकर इंसान अंधा सा हो जाता है और गलत की जानकारी होने के बाद भी इंसान गलत करने को आतुर रहता है। जैसे कि महाभारत में धृतराष्ट्र को अपने पुत्रों से इतना लगाव था कि वे उनका बाप देखने के बाद भी उन्हें अब गलत कर्म करने से रोक नहीं पाए।
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य जीवन में धन, रिश्ते और वासना आदि किसी भी चीज का अधिक लगाव अगर करता है तो यह चीजें उसे अपने लक्ष्य से दूर ले जाती हैं। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि वह व्यक्ति जिसे किसी भी चीज का मोह नहीं रहता है। वह परम आनंद को प्राप्त करता है  साथ ही भगवत गीता में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि काम, क्रोध और लोभ यह तीन चीजें नर्क का द्वार है जो व्यक्ति के पतन का कारण भी बनती हैं।
इसीलिए समय रहते इन्हें त्याग देने में ही भलाई है। गौरतलब है कि आचार्य चाणक के द्वारा बताई गई बातें आज के परिपेक्ष में सही साबित हो रही है। अगर कोई व्यक्ति इन बातों को अपने जीवन में अपनाकर आगे बढ़े तो वह जीवन में सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

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