क्या प्याज के काले रंग या फ्रिज के अंदर मौजूद है ब्लैक फंगस? जानें सच

सोशल मीडिया पर ब्लैक फंगस को लेकर तमाम तरह की अफवाहें फैलाई जा रही है। लेकिन इस बीच सोशल मीडिया पर ब्लैक फंगस को लेकर एक पोस्ट वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि घर की वस्तुओं से भी ब्लैक फंगस या कहें म्यूकोर्मिकोसिस का खतरा रहता है। इसके साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि ब्लैक फंगस रेफ्रिजरेटर में रखें प्याज से भी फैलता है। 

वायरल हो रहा पोस्ट

वायरल पोस्ट में यह दावा किया जा रहा है की, “घरेलू ब्लैक फंगस से सावधान रहें। कई बार जब आप प्याज खरीदते हैं, तो आपने उन पर एक काली परत देखी होगी। दरअसल, यह ब्लैक फंगस है। रेफ्रीजिरेटर के अंदर के रबर पर भी ब्लैक फंगस होता है, जो म्यूकोर्मिकोसिस का कारण बनता है। अगर इसे नजरअंदाज किया जाता है, तो यह ब्लैक फंगस आसानी से रेफ्रिजरेटर के अंदर रखे सामानों के जरिए आपके शरीर के अंदर चला जाता है।”

वायरल दावे की सच्चाई

वायरल पोस्ट के सभी दावे पूरी तरह से झूठे साबित हुए हैं, दरअसल, ब्लैक फंगस का ट्रांसमिशन का तरीका केवल वस्तुओं या इस फल या सब्जियों के जरिए नहीं होता है। फ्रिज के अंदर जो ब्लैक मोल्ड बनता है और प्याज के छिलके पर मौजूद फंगस म्यूकोरमाइकोसिस संक्रमण से पूरी तरह से अलग होते हैं। जबकि वे हानिकारक हो सकते है, लेकिन ब्लैक फंगस का कारण नहीं बनते। वहीं प्याज के छिलके पर पाया जाने वाला फंगस मिट्टी में पाए जाने वाले एक सामान्य कवक का नतीजा है। हालांकि यह जरूरी है कि सभी सब्जियों को इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह से धो लें, प्याज पर पाए जाने वाले फंगस शायद ही कभी संक्रामक होते हैं। ऐसे में वायरल पोस्ट में बताए जा रहे दोनों की दावे पूरी तरह से फेक है।

म्यूकोर्मिकोसिस क्या है
म्यूकोर्मिकोसिस को पहले जाइगोमाइकोसिस के नाम से जाना जाता था। यह एक गंभीर लेकिन दुर्लभ फंगल संक्रमण है। यूएस सीडीसी के अनुसार ये म्यूकोर्माइसेट्स नाम के मोल्ड्स ग्रुप के कारण होता है। ये ग्रुप पूरे वातावरण में रहते हैं। ये उन लोगों को प्रभावित करता है जिन्हें पहले से ही हेल्थ प्रॉब्लम होती है या जो दवाएं खा रहे होते हैं। जिनमे बीमारी से लड़ने की क्षमता कम होती है।
जानिए एक्सपर्ट्स की राय

• अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार, प्याज पर काला स्ट्रक्चर एस्परगिलस नाइजर के कारण होता है, जो मिट्टी में पाया जाने वाला एक सामान्य कवक है।
• चंडीगढ़ में मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉक्टर अरुणलोक चक्रवर्ती ने कहा, म्यूकोर्मिकोसिस का कारण बनने वाला कवक रेफ्रिजरेटर में जीवित नहीं रह सकता है।
• जबलपुर में सेंटर फॉर मेडिकल माइकोलॉजी फंगल डिजीज डायग्नोस्टिक एंड रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक डॉक्टर शेष आर नवंगे ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा, इस तरह के कवक दुर्लभ मामलों में संक्रमण का कारण बनते हैं। हालांकि प्याज को खाने से पहले हमेशा अच्छी तरह से धोना चाहिए।
• इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक नसीम गौर ने बताया कि रेफ्रिजरेटर के अंदर और जहां नमी होती है वहां कुछ बैक्टीरिया, यीस्ट और कई मोल्ड बढ़ सकते हैं। मोल्ड कवक का एक समूह है। मोल्ड एडवाइजर नाम की वेबसाइट के अनुसार रेफ्रिजरेटर के अंदर पाया जाने वाला ब्लैक फंगस, स्टैचीबोट्रीस चार्टरम है। अगर फ्रिज में स्टैचीबोट्रीस चार्टरया अन्य मोल्ड पाए जाते हैं, तो उन्हें हटा दिया जाना चाहिए।

ब्लैक फंगस पर डॉक्टर्स की सलाह
एम्स के निदेशक और प्रसिद्ध चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. रणदीप गुलेरिया के अनुसार ज्यादा या अनियंत्रित शुगर से पीड़ित लोग या जो लंबे समय से स्टेरॉयड थेरेपी का उपयोग कर रहे हैं, उनको कोई भी फंगस लग सकता है। वहीं इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की ओर से सोशल मीडिया पर जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, कोई भी शख्स हाल ही में कोरोना वायरस से रिकवर हुआ हैं या नाक के आसपास काली पपड़ी बनना, तेज सिरदर्द, सूजन, लालिमा जैसे लक्षणों का अनुभव करते हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लें।

निष्कर्ष
यह स्पष्ट है कि रेफ्रिजरेटर में ब्लैक लेयर बनाने वाले कवक और प्याज पर काले रंग के दिखने वाले कवकों से म्यूकोर्मिकोसिस नहीं होता है। यानी तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा पूरी तरह से झूठ है।

निष्कर्ष
यह स्पष्ट है कि रेफ्रिजरेटर में ब्लैक लेयर बनाने वाले कवक और प्याज पर काले रंग के दिखने वाले कवकों से म्यूकोर्मिकोसिस नहीं होता है। यानी तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा पूरी तरह से झूठ है।

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