पारंपरिक फसलों की जगह अपनाएं ये फसलें, होगा दुगना मुनाफा, आप भी आजमाइए

केंद्र सरकार लगातार किसानों की हित में योजनाएं बनाने का काम कर रही है। सरकार किसानों को पारंपरिक फसलों से हटकर नई फसलों की खेती को सरकार प्रोत्साहित कर रही है। जहां सरकार की कोशिश रहती है की किसान औषधीय पौधों की तरफ अपना कदम बढ़ाएं। केंद्र और राज्य सरकार की तमाम एजेंसियां किसानों तक पहुंचकर जानकारी दे रही हैं। पारंपरिक फसलों के मुकाबले किसानो को औषधीय पौधों से दुगना मुनाफा मिल रहा है जिसके कारण अब किसान तेजी से इन फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं। अगर आप भी औषधीय पौधों की खेती करना चाहते हैं तो पढ़िए पूरी खबर।

लेमनग्रास

लेमन ग्रास किसानों के लिए काफी फायदे का सौदा है। इसकी खेती कर रहे किसान बताते हैं कि इस पर आपदा का प्रभाव नहीं पड़ता और पशु नहीं खाते तो यह रिस्क फ्री फसल है। साथ ही विटामिन ए की अधिकता और सिंट्राल के कारण भारतीय लेमनग्रास के तेल की मांग हमेशा बनी रहती है। इत्र, सौंदर्य के सामान और साबुन बनाने में भी लेमनग्रास का उपयोग होता है। वहीं इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि लेमनग्रास की रोपाई के बाद सिर्फ एक बार निराई करने की जरूरत पड़ती है और सिंचाई भी साल में 4-5 बार ही करनी पड़ती है।
बता दें कि इसे सामान्यतः आम भाषा में नींबू घास भी कहा जाता है और इसका वैज्ञानिक नाम सिम्बेपोगोन फ्लक्सुओसस है।

अश्वगंधा
यह एक झाड़ीदार पौधा है। इसके फल, बीज और छाल का उपोयग विभिन्न दवाइयों को बनाने में किया जाता है। अश्वगंधा की जड़ से अश्व जैसी गंध आती है. इसी लिए इसे अश्वगंधा कहा जाता है। औषधीय गुणों से भरपूर अश्वगंधा की खेती से किसानों को काफी लाभ मिल रहा है। लागत से कई गुना अधिक कमाई होने के चलते ही इसे कैश कॉर्प भी कहा जाता है।

सतावर/शतावरी 
शतावर भी औषधीय गुणों से भरपूर एक पौधा है। यह किसानों के लिए मुनाफा का जरिया बन चुका है। सतावर की एक एकड़ में खेती कर किसान 5-6 लाख रुपए तक की कमाई कर रहे हैं। हालांकि इसके तैयार होने में एक साल से अधिक का समय लगता है। फसल तैयार हो जाने पर किसानों के लागत से कई गुना ज्यादा का रिटर्न यह देता है।

सहजन
सहजन को अंग्रेजी भाषा में ड्रम स्टिक कहते हैं। इसके पत्ते, छाल और जड़ तक का आयुर्वेद में इस्तेमाल होता है। सहजन सब्जी बनाने में भी इस्तेमाल होता है। एक बार पौधा लगा देने से कई सालों तक आप इससे सहजन प्राप्त कर सकते हैं। 90 तरह के मल्टी विटामिन्स, 45 तरह के एंटी ऑक्सीजडेंट गुण और 17 प्रकार के एमिनो एसिड होने के कारण सहजन की मांग हमेशा बनी रहती है। सबसे खास बात है कि इसकी खेती में लागत न के बराबर आती है।

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