हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान की अभिनव उपलब्धियां

नवनीत कुमार गुप्ता : वैज्ञानिक संस्थानों को आधुनिक भारत के मंदिर कहा जाता है। इन संस्थानों में विकसित ज्ञान और तकनीक के द्वारा समाज और देश विकास के पथ पर अग्रसर होता है। भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों में से एक प्रसिद्ध संस्थान है
हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में स्थित हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान जो वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् यानी सीएसआइआर के अंतर्गत कार्यरत है। हिमाचल प्रदेश में स्थित वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् की यह एकमात्र प्रयोगशाला आइएचबीटी के नाम से प्रसिद्ध है।
सीएसआइआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना 2 जुलाई, 1983 को की गयी थी। हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान जैवार्थिकी के उत्रयन हेतु प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र में कार्यरत है। इस लक्ष्य हिमालयी जैवसंपदा के संपोषणीय उपयोग के साथ ऐसे उत्पादों और प्रक्रियाओं का विकास करना है जिसका सामाजिक और आर्थिक लाभ हो।
सीएसआइआर—आइएचबीटी पादप जीवविज्ञान, नैनोजीवविज्ञान, जैवसूचनाविज्ञान, सूक्ष्मजीव विज्ञान, खाद्य प्रसंसकरण, जैवविविधता, रसायनविज्ञान आदि विविध विषयों में उल्लेखनिय शोध कार्य कर रहा है।
सीएसआइआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान रेडी टू ईट फूड यानी डिब्बाबंद आहार पर भी महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। यह तो हम जानते ही हैं भारत में विभिन्न भौगोलिक पारितंत्र उपस्थित है।

यहां हर वर्ष कोई न कोई प्राकृतिक आपदा आती रहती है जैसे कभी बाढ़, कभी चक्रवात, कभी सूखा आदि। ऐसी प्राकृतिक आपदा के दौरान लाखों लोगों के लिए आहार की व्यवस्था करने की आवश्यकता होती है। इसके अलावा विभिन्न महामारियों में भी ऐसी स्थिति आती है। जब काफी लोगों को पोष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में काफी प्रवासी लोगों, बेघर हुए लोगों को समुचित आहार उपलब्ध कराए जाना महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए ऐसे रेडी टू ईट फूड की आवश्यकता होती है जो पोष्टिक भी हो और लोगों का पेट भी भर सके।

सीएसआइआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान का इस दिशा में किया जा रहा कार्य सराहनयी है। सीएसआईआर की अनेक प्रयोगशालाओं द्वारा निर्मित रेडी टू ईट आहार को विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जैसे फानी चक्रवात, अम्फन चक्रवात के दौरान जरूरतमंद लोगों को वितरित किया गया है। इसके अलावा कोरोना महामारी से जुड़ रहे मरीजों को भी
सीएसआईआर के कई उत्पाद दिए गए हैं। इन उत्पादों में ऐसे औषधीय गुणों के समावेश का प्रयास किया गया जिनसे रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि हो सके।”
हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा विकसित रेडी-टू-ईट खिचड़ी के व्यावसायिक उत्पादन के लिए एक स्वदेशी तकनीक का विकास किया है। इसमें चावल, हरे चने, सब्जियां, प्याज पाउडर, पुदीना पाउडर, अदरक पाउडर, मेथी पाउडर, नारियल पाउडर, धनिया पाउडर, मिल्क फैट, हींग, आंवला पाउडर और अन्य मसाले मिलाए गए हैं।
इसका उपयोग प्राकृतिक आपदाओं के दौरान महत्वपूर्ण साबित हुआ है। कुछ वषों से यह संस्थान हिमाचल प्रदेश में ऐसी फसलों को उगाने संबंधी शोध कार्य कर रहा है। जो पहले यहां नहीं
उगती थी। इनमें हींग और केसर का नाम उल्लेखनिय है। इस प्रकार के सैंकड़ों शोध कार्य इस संस्थान में चल रहे हैं जो समाज के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।
आधुनिक उपकरणों और अत्याधुनिक शोध सुविधाओं से युक्त इस संस्थान ने बहुत कम समय में अपनी पहचान बनायी है। ऐसे संस्थानों के समाजोपयोगी कार्य ही आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में सहायक साबित होंगे।

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