भारतीयों वैज्ञानिकों ने टमाटर के विषाणु रोधी गुणसूत्रों की पहचान की

नई दिल्ली, 17 अगस्त (विज्ञान एवम प्रोद्योगिकी मंत्रालय): टमाटर के टीओएलसीएनडीवी (टोमैटो लीफ कर्व न्यू दिल्ली विषाणु) के संक्रमण से दुनिया भर में टमाटर की उपज में भारी नुकसान होता है। टीओएलसीएनडीवी के खिलाफ विषाणु रोधी गुणसूत्रों (एंटीवायरल जीन) की पहचान करने के लिए कई प्रयास किए गए हैं।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के स्वायत्त संस्थान, राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट जीनोमिक्स रिसर्च-एनआईपीजीआर) के वैज्ञानिकों ने टीओएलसीएनडीवी के खिलाफ प्रतिरोधी टमाटर की खेती द्वारा अपनाई गई एक प्रभावी रक्षा रणनीति के बारे में जानकारी दी है। 

यह उस एसडब्ल्यू 5ए (R जीन) का उपयोग करता है जो इस वायरस के प्रसार को प्रतिबंधित करने के लिए टीओएलसीएनडीवी के एसी4 प्रोटीन (विषाणु प्रभावकर्ता-वायरल इफ़ेक्टर) को पहचानता है। लिप्यान्तरण (ट्रांसक्रिप्शनल) स्तर पर एसएलवाई-एमआईआर-159-एसआईएमवाईबी33 मॉड्यूल को एसडब्ल्यू5ए की नियंत्रक गुणसूत्र (जीन) अभिव्यक्ति के रूप में पहचाना गया है।

इस प्रकार जांचकर्ताओं ने टीओएलसीएनडीवी के खिलाफ टमाटर में एसएलवाई- एमआईआर-159-एसआईएमवाईबी33-नियंत्रित एसडब्ल्यू5ए–मध्यस्थता वाली रक्षा प्रतिक्रिया में एक यंत्रवत अंतर्दृष्टि प्रदान की है। 
इन निष्कर्षों का आधुनिक प्रजनन या आणविक परिकल्पना के माध्यम से टमाटर की अतिसंवेदनशील प्रजातियों में प्रतिरोध के गुणों के विकास में अनुप्रयोग किया जा सकता है। यह शोध कार्य प्रोसीडिंग ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित है।

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