भारतीय वैज्ञानिकों ने एयरक्राफ्ट इंजन की मरम्मत के लिए विकसित किया स्वदेशी पाउडर

नई दिल्ली, 25 अगस्त (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय): भारतीय वैज्ञानिकों ने पहली बार नई एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग या 3डी प्रिंटिंग तकनीक के माध्यम से एयरो-इंजन कंपोनेंट्स की मरम्मत की है। जिससे मरम्मत की लागत और ओवरहाल के समय में काफी कमी आ सकती है। उन्होंने स्वदेशी स्तर पर एडिटिव विनिर्माण प्रक्रिया के लिए उपयुक्त पाउडर बनाए हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के स्वायत्त शोध एवं विकास केंद्र इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मटिरियल्स (एआरसीआई) के वैज्ञानिकों की टीम àने बिना इस्तेमाल हुई स्क्रैप सामग्री को पिघलाकर एआरसीआई में उपलब्ध अक्रिय गैस एटमाइजर के इस्तेमाल से एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के लिए उपयुक्त पाउडर को स्वदेशी स्तर पर विकसित किया है।

इसका इस्तेमाल करते हुए, एआरसीआई द्वारा निकेल आधारित सुपरअलॉय से बने एयरो-इंजन कम्पोनेंट्स की मरम्मत के लिए लेजर-डीईडी प्रक्रिया विकसित की जा रही है। इसके अलावा, एआरसीआई टीम ने पिनियन हाउसिंग असेंबली के नवीनीकरण की एक तकनीक विकसित की है जिसमें क्षतिग्रस्त परत को हटा कर लेजर क्लैडिंग प्रक्रिया के उपयोग से इसका पुनर्निर्माण किया है। लेजर क्लैडिंग और लेजर डीईडी समान हैं।

सामान्य रूप से, दो-आयामी डिपोजिशन (सरफेस कोटिंग) के लिए लेजर क्लैडिंग शब्द का इस्तेमाल किया जाता है और तीन-आयामी भागों के विनिर्माण के लिए लेजर-डीईडी शब्द का उपयोग किया जाता है। इसके लिए एक पेटेंट (201911007994) आवेदन किया गया है। माइक्रोस्ट्रक्चरल इनहोमोजेनिटी न्यूनतम करने और मामूली सब्सट्रेट प्रॉपर्टीज वैरिएशन सुनिश्चित करने के लिए पोस्ट-क्लैड हीट ट्रीटमेंट विधि तैयार की गई है।

लेजर-क्लैड के जरिये मरम्मत किये गये ये प्रोटोटाइप टूट-फूट से मुक्त पाये गये थे और उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। टीम ने ग्रे कास्ट आयरन से डीजल इंजन सिलिंडर हेड्स के नवीनीकरण और रिफाइनरी में उपयोग किए जाने वाले शाफ्ट के नवीनीकरण जैसे अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए मरम्मत और नवीनीकरण तकनीक भी विकसित की हैं। यह कार्य ‘ट्रांजैक्शंस ऑफ द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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