भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया डेयरी उद्योग के वसा युक्त गाद से बायोगैस उत्पादन को बढ़ाने के लिए नया बायोरिएक्टर सिस्टम

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (विज्ञान एवम प्रौद्योगिकी मंत्रालय) ; भारतीय वैज्ञानिकों ने डेयरी उद्योग से निकलने वाले जटिल वसा युक्त गाद के अवायवीय पाचन (ऐनरोबिक डाइजेशन) को सक्षम बनाने के लिए सतत पूर्व-शोधन प्रक्रिया के साथ एक उच्च प्रदर्शन वाले नए बायोरिएक्टर सिस्टम विकसित किया है। डेयरी उद्योग में तरल अपशिष्ट प्रवाह को शून्य बनाने के लिए इसे अपशिष्ट जल-शोधन आधारित मेम्ब्रेन बायो-रिएक्टर के साथ जोड़ा गया है।

इस तकनीक को सीएसआईआर-सीएफटीआरआई मैसूर में डॉ. संदीप एन. मुदलियार ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार के अपशिष्ट प्रबंधन प्रौद्योगिकी कार्यक्रम की सहायता से विकसित किया है। इसमें एक मॉडल डेयरी संयंत्र में प्रायोगिक स्तर के परीक्षण के लिए मेसर्स सन एनविरो टेक्नोलॉजीज प्रा. लिमिटेड का सहयोग भी शामिल है। उन्होंने एक बेंच-स्केल सिस्टम बनाया था, जिसका प्रायोगिक स्तर पर परीक्षण किया गया है और जल्द ही पेटेंट के लिए आवेदन किया जाएगा।

यह वसा और तेल युक्त जटिल ठोस अपशिष्ट के अवायवीय पाचन के लिए भी उपयोग किया जा सकता है और तरल अपशिष्ट प्रवाह को शून्य बनाने के लिए इसे अपशिष्ट जल-शोधन के साथ जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा, इस प्रौद्योगिकी का खाद्य और सहायक उद्योगों में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उपयोग किया जा सकता है। सतत पूर्व-शोधन प्रौद्योगिकी,

अवायवीय पाचन प्रक्रिया को उन्नत बनाने के साथ-साथ बायोगैस उत्पादन बढ़ाने के लिए सभी तरह के जटिल ठोस अपशिष्ट के लिए भी उपयोगी है। डेयरी और खाद्य उद्योग ऐसे संभावित उद्योग हैं, जो इस प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सकते हैं। यह प्रौद्योगिकी किसी भी प्रकार के खाद्य उद्योग और उसके अपशिष्ट जल से निकलने वाले जैविक रूप से नष्ट होने योग्य किसी भी तरह के ठोस अपशिष्ट गाद और खाद्य अपशिष्ट के लिए उपयोगी है।

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