विचारों से उपजे विवादों में कई बार घिरे बुद्ध पर भारत ने हमेशा कहा बुद्धं शरणं गच्छामि

“दूसरों से लड़ाई करने से बेहतर है तुम खुद पर जीत हासिल करो इससे तुम्हें कभी कोई दिक्कत नहीं आएगी
और हमेशा जीत तुम्हारी ही होगी। अगर तुमने खुद पर जीत हासिल कर ली तो तुम्हें कोई पराजित नहीं कर
सकता।” गौतम बुद्ध को जब ज्ञान की प्राप्ति हुई तो उन्होंने अपने विचारों को खुद तक सीमित रखने की
बजाए ज्ञान के प्रकाश को दुनियाभर में फैलाया। बुद्ध के अनमोल विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं
जितना सैकड़ों साल पहले थे।
भारतीय संस्कृति की कड़ी में बुद्ध का स्थान
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार गौतम बुद्ध को भगवान श्री विष्णु का 9वां अवतार माना जाता है। अवतारों की
कड़ी में बुद्ध अंतिम हैं। उनके बाद प्रलय काल तक कोई अवतार नहीं होने वाला है। हिंदू और बौद्ध दोनों ही
धर्मों के लिए बुद्ध का होना अर्थात धर्म का होना है। बुद्ध भारत की आत्मा हैं। उन्हें जानने से भारत भी
जाना हुआ माना जाएगा।
महात्मा बुद्ध भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय
गौतम बुद्ध के जन्म को लेकर उनके अनुयायियों में अलग – अलग विचार हैं लेकिन ज्यादातर लोग मानते हैं
कि वैशाख महीने में पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्‍म हुआ था। इसलिए इस पूर्णिमा को बुद्ध
पूर्णिमा कहा जाता है। इस साल बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार 26 मई बुधवार को मनाया जाएगा। महात्मा बुद्ध
का जन्म कहां हुआ था? यह भी कई बार चर्चा का विषय बना।
सोशल मीडिया पर इस विषय में गुटबाजी होती रहती है। सभी विवादों को खारिज करते हुए भारत समेत
सभी देश मानते हैं कि गौतम बुद्ध का जन्म नेपाल के लुंबिनी में हुआ था।
बुद्ध पूर्णिमा पर आधिकारिक अवकाश का निश्चय
20वीं सदी से पहले तक बुद्ध पूर्णिमा को आधिकारिक बौद्ध अवकाश का दर्जा प्राप्त नहीं था। लेकिन
1950 में श्रीलंका में विश्व बौद्ध सभा का आयोजन हुआ। जहां बुद्ध पूर्णिमा को आधिकारिक अवकाश
बनाने का फैसला हुआ। श्रीलंकाई इस दिन को ‘वेसाक’ उत्सव के रूप में मनाते हैं जो ‘वैशाख’ शब्द का
अपभ्रंश है।

पीएम मोदी लाइव प्रसारण में होंगे शामिल
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, बुद्ध जब महज 29 साल के थे, तब उन्होंने संन्यास धारण कर लिया था और फिर
उन्होंने बोधगया में पीपल के पेड़ के नीचे 6 साल तक कठिन तप किया था। वह बोधिवृक्ष बिहार के गया जिले
में आज भी स्थित है। बिहार के गया में स्थित बोधगया महाबोधि मंदिर में 26 मई को बुद्ध पूर्णिमा के पर्व पर
लाइव प्रसारण का आयोजन होगा जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जुड़ेंगे। देश में कोरोना के प्रकोप को
देखते हुए बुद्ध पूर्णिमा का ये कार्यक्रम आनलाइन रखा गया है। पीएम मोदी इस खास मौके पर बौद्ध
अनुयायियों को संबोधित भी कर सकते हैं। लाइव प्रसारण में भारत, नेपाल, वियतनाम, भूटान, श्रीलंका,
मंगोलिया से लाइव प्रार्थना की जाएगी।
इस बार शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- 03:35 ए एम, मई 27 से 04:17 ए एम, मई 27 तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग- 04:59 ए एम से 01:16 ए एम, मई 27 तक।
अमृत सिद्धि योग- 04:59 ए एम से 01:16 ए एम, मई 27 तक।
बुद्ध पूर्णिमा पर यह करना होगा शुभ
सूर्योदय से पूर्व उठकर घर की साफ-सफाई करें।

  1. अब सादे पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  2. घर के मंदिर में भगवान विष्णु का दीपक जलाएं।
  3. घर के मुख्य द्वार पर रोली, हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं और गंगाजल का छिड़काव करें।
  4. बोधि वृक्ष के सामने दीपक जलाएं और उसकी जड़ों में दूध अर्पित करें।
  5. गरीबों को भोजन व वस्त्र आदि दान करें।
  6. शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें।
    महात्मा बुद्ध का अंतिम उपदेश
    महात्मा बुद्ध के संपूर्ण जीवन की कड़ी जन्म, शिक्षा, विवाह, वैराग्य भाव, गृह त्याग, तपस्या, निर्वाण, बोधिवृक्ष,
    मैत्रेय बुद्ध, धर्म चक्र प्रवर्तन से हमें कई तरह की सीख मिलती है। 483 ईसा पूर्व वैशाख पूर्णिमा के दिन ही

भगवान बुद्ध पंचतत्व में विलीन हुए थे। देह छोड़ने के पूर्व उनके अंतिम वचन थे ‘अप्प दिपो भव:…सम्मासती।
अपने दिये खुद बनो…स्मरण करो कि तुम भी एक बुद्ध हो।

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