आज ही खान पान में शामिल करे इन्हे डायबिटीज के मरीजों के लिए है बहुत फायदेमंद

डायबिटीज के रोगी के भोजन में 60 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 20 प्रतिशत वसा व 20 प्रतिशत प्रोटीन होना चाहिए। दिनभर में 1500-1800 अवश्य लेनी चाहिए। रोजाना दो मौसमी फल व तीन तरह की सब्जियाँ जरुर खानी चाहिए। मांसाहार का सेवन नहीं करना चाहिए विशेषकर रेड मीट का सेवन तो बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले आहार और जीवनशैली में बदलाव लाना जरूरी होता है। नहीं तो शुगर को कंट्रोल में लाना मुश्किल हो जाता है। यह एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर होता है। इसमें हम जो भी खाते है वह ग्लूकोज में बदलकर खून के द्वारा पूरे शरीर में फैल जाता है। इसलिए व्यक्ति का खानपान उसके रक्तशर्करा के स्तर, दिनचर्या, व्यायाम की आदतें, शरीर संरचना पर निर्भर करता है।

डायबिटीज क्या है

डायबिटीज को मधुमेह अथवा शुगर भी कहा जाता है। आजकल के इस भागदौड़ जीवनशैली के चलते जो बीमारी सर्वाधिक लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही है वह है मधुमेह। मधुमेह को धीमी मौत भी कहा जाता है। यह ऐसी बीमारी है जो एक बार किसी के शरीर को पकड़ ले तो उसे फिर जीवन भर छोड़ती नहीं।

इस बीमारी का जो सबसे बुरा पक्ष है वह यह है कि यह शरीर में अन्य कई बीमारियों को भी निमंत्रण देती है। मधुमेह रोगियों को आंखों में दिक्कत, किडनी और लीवर की बीमारी और पैरों में दिक्कत होना आम है। पहले यह बीमारी चालीस की उम्र के बाद ही होती थी लेकिन आजकल बच्चों में भी इसका मिलना चिंता का एक बड़ा कारण हो गया है।

डायबिटीज के लक्षण

-चक्कर आना
-चिड़चिड़ापन
-ज्यादा प्यास लगना
-बार-बार पेशाब का आना
-आँखों की रौशनी कम होना
-कोई भी चोट या जख्म देरी से भरना
-बार-बर फोड़े-फुंसियां निकलना
-हाथों, पैरों और गुप्तांगों पर खुजली वाले जख्म

डायबिटीज के मरीजों में सबसे ज्यादा मौत हार्ट अटैक या स्ट्रोक से होती है। जो व्यक्ति डायबिटीज से ग्रस्त होते हैं उनमें हार्ट अटैक का खतरा आम व्यक्ति से पचास गुना ज्यादा बढ़ जाता है। शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने से हार्मोनल बदलाव होता है और कोशिशएं क्षतिग्रस्त होती हैं जिससे खून की नलिकाएं और नसें दोनों प्रभावित होती हैं। इससे धमनी में रुकावट आ सकती है या हार्ट अटैक हो सकता है। स्ट्रोक का खतरा भी मधुमेह रोगी को बढ़ जाता है।

डायबिटीज का लंबे समय तक इलाज न करने पर यह आंखों की रेटिना को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे व्यक्ति हमेशा के लिए अंधा भी हो सकता है। इसलिए हमे डायबिटीज के दौरान अपने खानपान पर सर्वाधिक ध्यान देना चाहिए। डायबिटीज में भोजन को लेकर कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे कि क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए? इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि शुगर की बीमारी में कौन-कौन से खाद्य पदार्थ अपने भोजन में शामिल करने चाहिए और कौन-कौन से आहार नहीं खाने चाहिए।

डायबिटीज कंट्रोल रखने के लिए खाएं ये फूड्स-
शकरकंद

शकरकंद भी डायबिटीज के लिए जरूरी कार्ब्स में से एक है। एक मध्यम आकार के शकरकंद में 4 ग्राम फाइबर और विटामिन C होता है। इसके अलावा शकरकंद में भरपूर मात्रा में विटामिन A भी पाया जाता है।

कद्दू के बीज
वसायुक्त और शुगर वाले फूड्स खाने की लालसा से लड़ने के लिए मुट्ठी भर कद्दू के बीज अपने पास रखें। वे आयरन और असंतृप्त वसा से भरपूर होते हैं और आपकी भूख को दबाने में मदद करते हैं। जब स्नैकिंग की बात आती है, तो हमेशा याद रखें कि कुंजी भाग नियंत्रण है।

नट्स
डायबिटीज के मरीजों को बिना नमक वाले स्नैक्स खाने चाहिए। इनसे फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट होता है जो बल्ड शुगर को कंट्रोल में रखता है। इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला मैग्नीशियम इंसुलिन प्रतिरोध से लड़ने में मदद करता है। कैलोरी को नियंत्रण में रखने के लिए इसे संतुलित मात्रा में ही खाएं।

बेरीज
बेरीज में प्राकृतिक मिठास होती है और ये खाने में बहुत स्वादिष्ट होते हैं। इनमें पाया जाने वाला फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट ब्लड शुगर को बढ़ने से रोकता है और दिल की बीमारी को भी दूर रखता है। इन्हें आप कई दिनों तक फ्रिज में स्टोर करके भी रख सकते हैं।

फलियां
अपने किचन में कुछ दास, फलियां और छोले हमेशा रखें। इन्हें बनाना बहुत आसान होता है और ये फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होते हैं। साथ ही ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद करता है।

एवोकाडो
ये फल हेल्दी फैट का अच्छा स्त्रोत होता है। ये फाइबर से भरपूर होते हैं जो बल्ड शुगर को नियंत्रित करके इंसुलिन स्पाइक्स को कम करने में मदद करते हैं। हालांकि, इसमें कैलोरीज ज्यादा होती हैं इसलिए इसके खाने की मात्रा पर ध्यान देना चाहिए। एक मध्यम आकार के एवोकाडो के आधे भाग में 180 कैलोरी होती है।

टमाटर
लाइकोपीन से भरपूर टमाटर आपके दिल के लिए बहुत अच्छा होता है। वे रक्तचाप और मधुमेह से जुड़ी हृदय संबंधी जटिलताओं के जोखिम को भी कम करते हैं। टमाटर विटामिन सी, विटामिन ए और पोटेशियम से भरपूर होते हैं। वे कम कार्ब और कैलोरी में भी कम होते हैं जो उन्हें डायबिटीज रोगियों के लिए एक सुपरफूड बनाते हैं।

दही
दही में भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है और कार्बोहाइड्रेट कम होता है। दही खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है और ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहता है। कोशिश करें कि बिना चीनी वाली दही खाएं। आप चाहें तो इसमें थोड़े से जामुन या अनार डालकर भी खा सकते हैं।

शकरकंद
शकरकंद भी डायबिटीज के लिए जरूरी कार्ब्स में से एक है। एक मध्यम आकार के शकरकंद में 4 ग्राम फाइबर और विटामिन C होता है। इसके अलावा शकरकंद में भरपूर मात्रा में विटामिन A भी पाया जाता है।

पालक
पालक में कार्ब्स और कैलोरी बहुत कम और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। पालक बल्ड शुगर को कंट्रोल में रखता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक हरी पत्तेदार सब्जियों में पॉलीफेनोल और विटामिन C होता है। इसे नियमित रूप से खाने से डायबिटीज होने की संभावना कम हो जाती है। इसमें भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम होता है जो इंसुलिन प्रतिरोध से लड़ने में मदद करता है।

अंडे
अंडे को प्रोटीन का पॉवरहाउस कहा जाता है। ये ब्लड शुगर लेवल को स्टेबल रखता है और भूख लगने वाले हॉर्मोन को दबाकर वजन घटाने में मदद करता है। शुगर के मरीज अगर अपना वजन नियंत्रित रखें तो इससे उनका सेहत काफी हद तक सही रहता है।

डायबिटीज में इन खाद्य पदार्थों को बिल्कुल न खाएं –
चीनी, ग्लूकोज, गुड़, शहद और मिठाई। इसके अलावा क्रीम बिस्किट, आइस क्रीम, केक, चॉकलेट, पेस्ट्री, जैम, जेली आदि खाद्य पदार्थों को भी न खाएं।

तेल वाले अचार, तला हुआ पापड़, साबूदाना आदि।

तले हुए खाद्य पदार्थ – नमकीन, वड़ा, कचौरी आदि।

इसके अलावा बटर, दूध की क्रीम, पनीर, मेयोनेज़, नारियल, मूंगफली, सूखे मेवे, अंडे की जर्दी, फ्राइड चिकन एवं मछली आदि खाद्य पदार्थों को बिल्कुल ना खाएं।

इसके साथ ही साथ इस बात का भी ध्यान रखें की मांसहारी भोजन डायबिटीज के रोगियों के लिए बेहद नुकसानदायक होता है।

कोल्ड ड्रिंक, हार्ड ड्रिंक, शरबत आदि भी न पिएं। फल जैसे केला, आम, चीकू, शरीफा, फ्रूट जूस, फ्रूट मिल्क शेक और नारियल का पानी आदि।

कुछ सब्जी जैसे – आलू, शकरकंद, रतालू और कच्चे केले आदि।

नोट: यह लेख सिर्फ आपकी सामान्य जानकारी प्रदान करती है। ये किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए ध्यान रहे इन पर अमल करने से पहले किसी विशेषज्ञ या अपने डॉक्टर की सलाह एक बार अवश्य लें।

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