देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों के उत्सव ‘विज्ञान सर्वत्र पूज्यते’ का शुभारंभ

नई दिल्ली, 23 फरवरी (इंडिया साइंस वायर): केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी; राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान; राज्य मंत्री पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष, डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा है कि वैज्ञानिक उपकरणों के बेहतर उपयोग के लिए सांस्कृतिक भाव आवश्यक है। डॉ जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री जी. किशन रेड्डी के साथ संयुक्त रूप से ‘विज्ञान सर्वत्र पूज्यते’ के उद्घाटन के अवसर पर यह बात कही है।

स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ को चिह्नित करने, और देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों के उत्सव के रूप में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। एक सप्ताह तक देश के 75 शहरों में एक साथ चलने वाले ‘विज्ञान सर्वत्र पूज्यते’ का आयोजन संस्कृति मंत्रालय, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय और विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग की स्वायत्त संस्था विज्ञान प्रसार द्वारा अन्य मंत्रालयों तथा विभागों के सहयोग से किया जा रहा है।

डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ में हमारी सांस्कृतिक भावना से प्रेरित भारत के विज्ञान और वैज्ञानिक उपलब्धियों को शामिल करने का बड़ा उद्देश्य निहित है। इसका लक्ष्य सामान्य व्यक्ति में भी विज्ञान और वैज्ञानिक चेतना विकसित करना है, जिससे वह वैज्ञानिक सूचना और नवाचारों से जुड़कर उसका लाभ उठा सकता है।

पिछले 75 वर्षों में वैज्ञानिक उपलब्धियों की विरासत का का जिक्र करते हुए डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका को रेखांकित किया है, और वैज्ञानिक स्वभाव को पोषित करने, और मातृभाषा में विज्ञान को लोगों तक ले जाने के लिए प्रेरित किया है।

डॉ जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत की वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं के साथ-साथ वैज्ञानिक जनशक्ति अब दुनिया में सर्वश्रेष्ठ के साथ प्रतिस्पर्धा करती है। उन्होंने कहा, दुनिया के सबसे अच्छे कॉरपोरेशन्स और अल्फाबेट (गूगल की मूल कंपनी), माइक्रोसॉफ्ट, ट्विटर, एडोब, आईबीएम इत्यादि जैसी कंपनियों का नेतृत्व भारतीयों या भारतीय मूल लोगों द्वारा किया जा रहा है, जिन्होंने अपने स्वयं के वैज्ञानिक संस्थानों में मूल वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, हमने मजबूत सांस्कृतिक विरासत के साथ दुनिया को सबसे उत्कृष्ट मस्तिष्क का उपहार दिया है।

डॉ जितेंद्र सिंह ने आह्वान किया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक चेतना विकसित करने की आवश्यकता है, और वैज्ञानिक जानकारी एवं ज्ञान तक पहुँच सुनिश्चित करना जरूरी है। इस संबंध में, उन्होंने उल्लेख किया कि आम लोगों के बीच विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए देश भर के 75 अलग-अलग शहरों में, कश्मीर से कन्याकुमारी; और कच्छ से कामरूप तक राष्ट्रीय विज्ञान सप्ताह (22-28 फरवरी 2022) को चिह्नित करने के लिए “विज्ञान सर्वत्र पूज्यते” का आयोजन किया जा रहा है।

डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार न केवल 100% साक्षरता दर प्राप्त करने की दिशा में काम करने के लिए कटिबद्ध है, बल्कि 100% वैज्ञानिक साक्षरता दर प्राप्त करने की ओर भी ध्यान दिया जा रहा है। इस दिशा में, विभिन्न भारतीय भाषाओं में विज्ञान संचार को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान प्रसार द्वारा एक महत्वाकांक्षी परियोजना ‘विज्ञान भाषा’ शुरू की गई है। संस्कृत समेत, उर्दू, कश्मीरी, पंजाबी, मराठी, कन्नड़, तमिल, तेलुगू, बंगाली, नेपाली और असमिया में उन्होंने काम शुरू कर दिया है।

‘विज्ञान सर्वत्र पूज्यते’ का समापन नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी.वी. रामन की वर्ष 1930 में की गई रामन प्रभाव की खोज की याद में, वर्ष 1987 से हर साल 28 फरवरी को मनाये जाने वाले राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के दिन होगा। इस अवसर पर वर्ष 2022 के राष्ट्रीय विज्ञान संचार पुरस्कार विजेताओं के साथ-साथ ‘विज्ञान सर्वत्र पूज्यते’ महोत्सव के हिस्से के रूप में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। विज्ञान सर्वत्र पूज्यते की विस्तृत जानकारी www.vigyanpujyate.in पर उपलब्ध है।

डॉ के. विजय राघवन, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, भारत सरकार, डॉ एस. चंद्रशेखर, सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, डॉ परविंदर मैनी, वैज्ञानिक सचिव, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय और डॉ नकुल पाराशर, निदेशक, विज्ञान प्रसार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उद्घाटन समारोह में शामिल हुए।

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