अगर आप भी रहते है अक्सर परेशान तो हो जाएं सावधान, हो सकता है पूर्व जन्म के श्राप का फल

अक्सर हमें अपनी जिंदगी में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ परेशानियां सिर्फ कुछ दिनों के लिए रहती है तो वहीं कुछ ताउम्र रहती है। जो हमे हमारे पिछले जन्म में किए गए बुरे कर्मो का संकेत देती है। जैसे- संतान अवरोध के रूप में प्रकट होता है, कुलक्षणों से युक्त एवं कलहप्रिय पति या पत्नी का मिलना है, परिश्रम का फल न मिलना तथा धन के लिए तरसना है, हीनता एवं मानसिक दुर्बलता के कारण निराशा की भावना जाग्रत होना है। यह सभी पिछले जन्म के बुरे कर्मो का ही फल होता है।

सनातन धर्म के अनुसार मनुष्य को वर्तमान जीवन अपने कर्मों के अनुसार ही जीना पड़ता है। इसका प्रमुख कारण मनुष्य द्वारा पूर्वजन्म में किए गए कुकर्मों (पापों) का पल विभिन्न श्रापों के रूप में होता है। शास्त्र में चौदह प्रकार के श्रापों का उल्लेख मिलता है। पितृ श्राप, प्रेत श्राप, ब्राह्मण श्राप, मातृ श्राप, पत्नी श्राप, सहोदर श्राप, सर्व श्राप इत्यादि श्रापों को भृगु सूत्र में महर्षि भृगु ने भी अनुमोदित किया है। इन श्रापों के कारण व्यक्ति की उन्नति नहीं होती, उसे पुरुषार्थ का फल नहीं प्राप्त होता है, उसकी संतान जीवित नहीं रहती इत्यादि बुरे प्रभाव का मुख्य कारण श्रापित कुंडलियां ही हैं। 

उपाय
सरस्वती उपासना करें। सरसों एवं नीलम का दान करें। सुबह के समय सफाई कर्मचारी को मसूर की दाल एवं पैसा दें। नीले कपड़े, स्टील के बर्तन, विद्युत उपकरण दान में न लें बल्कि उसका मूल्य चुकता करके लें। गोमेद मध्यम उंगली में धारण करें। संयुक्त परिवार में रहें। सिर पर चोटी रखें। ससुराल से संबंध न बिगाड़ें। जौ को बड़े स्थान पर बोझ के नीचे दबाएं। जौ को दूध से धोकर बहते हुए पानी में बहाएं। मूली दान करें। कोयला बहते हुए जल में बहाएं। विवाह के समय कन्यादान करें। 

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