अगर आप भी करना चाहते है प्लाज्मा डोनेट, तो पहले जान लें ये जरूरी बातें

कोविड-19 की दूसरी लहर बहुत खतरनाक साबित हुई है इससे लगभग 68 फीसदी मरीज घर में ही ठीक भी हो रहे हैं। लेकिन 75 फीसदी मरीज ऐसे है जिन्हे ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। इनमें से भी 25 फीसदी गंभीर मरीज प्लाज्मा थेरेपी सहित , इंजेक्शन और स्टेरॉयड से ठीक हो रहे हैं।ऐसे में अगर आप भी प्लाज्मा डोनेट कर के किसी की जान बचाना चाहते है हो पहले जान ले प्लाज्मा कैसे दोने किया जाता है आखिर इससे कैसे बचाई जा सकती है किसी मरीज की जान।
 केवल ये लोग डोनेट कर सकते है प्लाज्मा
कोरोना पॉजिटिव हुए हों, अब निगेटिव हो गए हों और ठीक हुए 14 दिन हो गए हों। उनकी उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच हो और स्वस्थ महसूस कर रहे हों।

प्लाज्मा थेरेपी के लिए सबसे पहले दान करने वाले का टेस्ट होगा। टेस्ट के जरिए ये देखा जाएगा कि उनके खून में किसी प्रकार का संक्रमण तो नहीं है। मसलन शुगर, एचआईवी या हेपेटाइटिस तो नहीं है। अगर ब्लड ठीक पाया गया तो उसका प्लाज्मा निकालकर आईसीयू के पेशेंट को दिया जाए तो वो ठीक हो सकता है।

ये लोग भूलकर भी ना दे प्लाज्मा

– जिनका वजन 50 किलोग्राम से कम है और ऐसी महिला जो कभी भी प्रेग्नेंट रही हो या अभी हो।
– डायबिटीज के मरीज जो इंसुलिन ले रहे हों
– ब्लड प्रेशर 140 से ज्यादा हो
– ऐसे मरीज जिनको बेकाबू डायबिटीज हो या हाइपरटेंशन हो
– कैंसर से ठीक हुए व्यक्ति
– जिन लोगों को गुर्दे/हृदय/फेफड़े या लिवर की पुरानी बीमारी हो।

कैसे काम करता है प्लाज्मा?
कोरोना पॉजिटिव मरीजो में इलाज के बाद ब्लड में एंटीबॉडीज आ जाती हैं। जिसे कोरोना पेशेंट को दिया जाए तो वो उसे ठीक होने में हेल्प करेगा। इस तरह ठीक हो गए पेशेंट से बीमार को देकर उसे ठीक कर सकते हैं। ये एंटी बॉडीज मरीज के ब्लड में मिलकर कोरोना से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है।

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