अगर आप भी इस दिन काटते है नाखून तो अभी से हो जाएं सावधान…हो सकता है भारी नुकसान

सनातन धर्म में बहुत सी ऐसी मान्यताएं और कुछ रीति रिवाज होते है जिन्हे ना मानने पर आगे चलकर दुष्ट परिणाम देखने को मिल सकते है। ऐसी ही एक प्राचीन परम्परा के अनुसार कहा जाता है की हफ्ते में सातों दिन नाखून और बाल काटने चाहिए जिसे आज भी बहुत से हिन्दू लोग श्रद्धा पूर्वक मानते है। ऐसा माना जाता है की गुरुवार और शनिवार को नाखून और बाल काटना अपशगुन माना जाता है ऐसा करने से परिवार को हानि पहुंच सकती है। यूं तो हिंदू धर्म में प्रत्येक दिन खास और महवपूर्ण होता है जिनका हमारी दैनिक दिनचर्या में भी काफी गहरा असर पड़ता है।आपने भी अपने घर में कई बार सुना होगा कि इस दिन बाल नहीं काटने चाहिए, इस दिन नाखून नहीं काटने चाहिए। हमारे माता-पिता या बड़े बुजुर्ग यूं ही बाल और नाखून काटने से मना नहीं करते हैं। इसके पीछे एक बहुत ही बड़ी वजह है, जिसे न मानने के कारण हमारे जीवन पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं और कोई भी माता-पिता ये नहीं चाहते कि उनके बच्चों को किसी भी तरह की समस्या का सामना करना पड़े। लिहाजा, वे बचपन से ही हमें कई जरूरी बातें बताते रहते हैं।

सिर्फ बृहस्पतिवार को ही नही बल्कि मंगलवार और शनिवार को भी नाखून काटने की मनाही होती है। इसके पीछे कई धार्मिक कारण हैं। आइए फिर जानते हैं कि गुरुवार को नाखून न काटने के क्या धार्मिक कारण हैं-

>> बाल और नाखुन काटने वाले व्यक्ति की आयु कम होने लगती है।
>> इसके अलावा भाइयों में अनबन की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं।
>> परिवार को आर्थिक संकटों का भी सामना करना पड़ सकता है। 
>> कहा जाता है कि मंगलवार को बाल या नाखून काटने से खून से संबंधित रोग हो सकते हैं। 
>> मंगलवार को नाखून या बाल काटने की वजह से व्यक्ति का आत्मविश्वास भी कमजोर पड़ने लगता है।
>> हिंदू धर्म में बृहस्पतिवार को गुरू देव का दिन माना गया है। इस दिन नाखून या बाल काटने से न सिर्फ बृहस्पति नाराज होते हैं बल्कि गुरू ग्रह भी कमजोर होता है। 
>> बृहस्पतिवार के दिन नहीं काटने वाले व्यक्ति के घर में सुख-शांति और धन की कमी होने लगती है।
>> इतना ही नहीं, गुरुवार को नाखून काटने से व्यक्ति को कई तरह की अनचाही समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
>> कई जानकार बताते हैं कि बृहस्पति का सीधा संबंध हमारी बुद्धि से होता है और इस दिन नाखून या बाल काटने से इंसान की बुद्धि भी कमजोर होने लगती है।

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