अगर भारत कश्‍मीर का समाधान निकाल देता तो हमें परमाणु हथियारों की आवश्‍यकता ही नहीं होती: इमरान खान

कंगाल हो चुका पाकिस्तान अभी तक बाज नहीं आया है। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने न्यूयॉर्क टाइम्‍स को दिए अपने साक्षात्‍कार में कहा, “अगर भारत में मोदी सरकार नहीं होती तो दोनों देशों के मसले आसानी से हल हो जाते। दरअसल, मोदी की आरएसएस की विचारधारा एक बाधा है। इसके चलते दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर नहीं हो सके।”

उन्‍होंने जोर देकर कहा कि भारत में मोदी के अलावा किसी और की हुकूमत होती तो वार्ता के जरिए सभी मसले हल कर लेते। बता दें की उक्‍त बातें इमरान खान ने अमेरिका के एक प्रमुख अखबार में दिए अपने एक साक्षात्‍कार में कही है। इसके साथ ही पाकिस्‍तान के सभी प्रमुख अखबारों ने उनके इस साक्षात्‍कार को प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

आइए जानते है इमरान खान और न्यूयॉर्क टाइम्‍स के बीच बातचीत के कुछ अंश-

सवाल (न्यूयॉर्क टाइम्‍स) – भारत में नरेंद्र मोदी के अलावा यदि किसी और की सरकार होती तो क्या पाकिस्तान और भारत के संबंध बेहतर होते??

जवाब (इमरान खान) – मैं भारत को किसी अन्य पाकिस्तानियों से ज्यादा जानता हूं। क्योंकि दोनों देश साथ क्रिकेट खेलते हैं और इसी वजह से मुझे भारत के प्रति सम्मान और प्यार है। मैं किसी अन्य की तुलना में भारत को ज्यादा प्यार और सम्मान देता हूं क्योंकि क्रिकेट एक बड़ा खेल है। यह दोनों ही देशों में लगभग एक धर्म के समान है। इसलिए जब मैंने पाकिस्तान में प्रधानमंत्री कार्यालय को ज्वायन किया तब मैंने सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि मेरे सत्ता में आने की सबसे पहली और अहम वजह यह है कि मैं पाकिस्तान में गरीबी कम करना चाहता हूं।

इसके लिए सबसे अच्छा रास्ता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार सही ढंग से चले। इससे दोनों देशों को फायदा होगा। लेकिन मोदी की आरएसएस की विचारधारा एक बाधा है। इसके चलते दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर नहीं हो सकते। मैं सोचता हूं कि यह आरएसएस की एक अजीब सोच है, जिससे नरेंद्र मोदी ताल्लुक रखते हैं। अगर भारत में नरेंद्र मोदी की जगह दूसरे नेता होते तो उनसे पाकिस्तान का बेहतर रिश्ता हो सकता था और हां, हम अपने सभी अलग-अलग मुद्दों को सुलझा भी लेते। भारत अगर कश्‍मीर समस्‍या का समाधान निकाल देता तो पाक को परमाणु हथियारों की आवश्‍यकता ही नहीं होती।

सवाल (न्यूयॉर्क टाइम्‍स) – अगर तालिबान ताकत के बल पर सत्ता हासिल कर लेता है, तो क्या पाकिस्तान उनको मान्यता देगा??

जवाब (इमरान खान) – पाकिस्तान किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहता। हम शरणार्थियों की बाढ़ फिर नहीं चाहते। तालिबान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने के अलावा हम हर कदम उठाने को तैयार हैं। लेकिन पाकिस्तान सिर्फ उसी को स्वीकार करेगा जो अफगानिस्‍तान की आवाम के जरिए चुनी गई सरकार होगी। 
(बता दें कि 90 के दशक में तालिबान ने पहली बार जब अफगानिस्‍तान पर अपनी सत्ता कायम की थी तो पाकिस्तान उन तीन देशों में से एक था, जिसने तालिबान सरकार को मान्यता दी थी।)

सवाल (न्यूयॉर्क टाइम्‍स) – अमेरिका के साथ कैसा सम्बंध चाहता है पाकिस्तान??

जवाब (इमरान खान) – पाकिस्तान, अमेरिका के साथ नई बुनियादों पर संबंध बनाना चाहता है। हम अमेरिका के साथ वह वैसा ही रिश्ता चाहते हैं, जैसा कि अमेरिका का ब्रिटेन के साथ रिश्ता है या भारत के साथ जैसा रिश्ता है। हालांकि अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में एक दूसरे के बीच विश्वास की बड़ी कमी थी, क्योंकि आम पाकिस्तानी को लगता था कि पाकिस्तान ने इसकी भारी कीमत चुकाई है। अमेरिका को लगता था कि पाकिस्तान ने अमेरिका के लिए उतना नहीं किया जितना उसे करना चाहिए था। 

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