हरियाणा: आज भी किसानों का प्रदर्शन जारी, इंटरनेट सेवाएं रात 12 बजे तक बंद, राज्य में भारी पुलिस बल तैनात

हरियाणा के करनाल में किसान नेताओं और पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियीं के बीच बुधवार को सवा तीन घंटे चली वार्ता नाकाम रही लिहाजा गुरुवार को भी ये धरना जारी है। बुधवार शाम करीब तीन घंटे तक चली बातचीत के दौरान प्रशासन द्वारा मांग इन्‍कार करने में बाद किसान नेताओं ने भी प्रेसवार्ता की। प्रेसवार्ता के दौरान किसान नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि सरकार की मंशा पहले से ही स्‍पष्‍ट थी। वहीं राकेश टिकैत ने कहा, अब यहां पर दूसरे प्रदेशों से भी किसान आएंगे। 

राकेश टिकैत ने आगे कहा कि करनाल में अब अनिश्चितकालीन पड़ाव डाला जाएगा। पत्रकारों से बातचीत करते हुए राकेश टिकैत ने कहा, यहां का प्रशासन अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई को तैयार नहीं हैं। चंडीगढ़ से बार बार आदेश आ रहे हैं। जब तक कार्रवाई नहीं होती तब तक यहां से नहीं हिलेंगे। एक पक्का मोर्चा यही लगाएंगे। यूपी पंजाब से आते रहेंगे लोग।

वहीं मिनी सचिवालय पर जारी किसानों के धरने को देखते हुए आज भी करनाल जिले में मोबाइल इंटरनेट और एसएमएस सेवाएं बंद रखने के आदेश हरियाणा सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से जारी किए गए हैं। बता दें कि कल दो दौर की वार्ता हुई जिसमें प्रशासन की ओर से डीसी-एसपी ने और रेंज कमिश्नर ने बातचीत की थी।
किसानों की तादाद देखते हुए हरियाणा गृह मंत्रालय ने फिलहाल सुरक्षा की दृष्टि से मोबाइल इंटरनेट और बल्क एसएमएस सेवा को आज भी बंद रखने का निर्णय लिया है।

उधर किसान नेता भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने प्रशासन ने दो दौर की वार्ता के बाद बुधवार को कहा कि हमारी मांग थी कि आईएएस आयुष सिन्हा को निलंबित कर मामला पंजीबद्ध किया जाए। प्रशासनिक टीम मामला दर्ज करना तो दूर निलंबित करने के लिए भी तैयार नहीं है। टिकैत ने जोर देकर कहा कि उनका एक मोर्चा दिल्ली बॉर्डर पर है और अब दूसरा करनाल सचिवालय पर जारी रहेगा। वहीं डीसी निशांत कुमार यादव ने किसान नेताओं की मांग पर कहा कि किसान नेता बिना जांच के कार्रवाई चाहते हैं।

ऐसा कैसे हो सकता है। चाहे अधिकारी, कर्मचारी या आम आदमी हो, बिना जांच के कार्रवाई नहीं कर सकते हैं। 
बता दें की बुधवार रात को भी किसान करनाल मिनी सचिवालय के सामने डटे रहे और गुरुद्वारों के माध्यम से लंगर की व्यवस्था की गई। किसान नेताओं ने भी कहा कि जिला सचिवालय पर वे डटे रहेंगे और अधिकारियों को मुख्य द्वार से नहीं जाने देंगे, वे चाहे किसी रास्ते या फिर दीवार कूद कर सचिवालय के भीतर जाएं। हालांकि आम आदमी को परेशानी न हो इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।

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