हरीश रावत ने सामूहिक रूप से मांगी माफी, कहा- प्रायश्चित स्वरूप गुरुद्वारे में लगाऊंगा झाड़ू

मंगलवार दोपहर चंडीगढ़ पहुंचे हरीश रावत ने सिद्धू और उनकी टीम के 4 वर्किंग प्रेसिडेंट्स की तुलना सिख धर्म के महान पंच प्यारों से कर दी थी। जिसके बाद इस मामले पर विवाद खड़ा हो गया है। हरीश रावत के इस बयान पर कई नेताओं ने आपत्ति जताते हुए उन पर मुकदमा भी दायर किया है। इस बीच विवाद बढ़ता देख हरीश रावत ने अब वहां सामूहिक रूप से माफी मांग ली है। हरीश रावत ने अपने फेसवुक पोस्ट के जरिए इस शब्द के प्रयोद और सिख भावनाओं को आहत करने के लिए माफी मांगी है।

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, ” कभी कभी आप किसी को सम्मान या आदर व्यक्त करते हुए कुछ ऐसे शब्दों का उपयोग कर देते हैं जो आपत्तिजनक होते हैं। मुझसे भी कल अपने माननीय अध्यक्ष व चार कार्यकारी अध्यक्षों के लिए पंज प्यारे शब्द का उपयोग करने की गलती हुई है। मैं देश के इतिहास का विद्यार्थी हूं और पंज प्यारों के अग्रणी स्थान की किसी और से तुलना नहीं की जा सकती है। मुझसे ये गलती हुई है, मैं लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ।”

उन्होंने कहा कि, ” मैं प्रायश्चित स्वरूप अपने राज्य के किसी गुरुद्वारे में कुछ देर झाड़ू लगाकर सफाई करूंगा। मैं सिख धर्म और उसकी महान परंपराओं के प्रति हमेशा समर्पित भाव और आदर भाव रखता रहा हूँ। मैंने चंपावत जिले में स्थित श्री रीठा साहब के मीठे-रीठे, देश के राष्ट्रपति से लेकर, न जाने कितने लोगों को प्रसाद स्वरूप पहुंचाने का काम किया है। जब मुख्यमंत्री बना तो श्री नानकमत्ता साहब और रीठा साहब, जहां दोनों स्थानों पर श्री गुरु नानक देव जी पधारे थे, सड़क से जोड़ने का काम किया। 

उन्होंने आगे कहा, मेरे कार्यकाल में हुये काम को आज भी देखा जा सकता है। समय कुछ और मिल गया होता तो घंगरिया से हेमकुंड साहब के मार्ग तक रोपवे का निर्माण भी प्रारंभ कर दिया होता। मैं पुनः आदर सूचक शब्द समझकर उपयोग किये गये अपने शब्द के लिये मैं सबसे क्षमा चाहता हूँ। बता दें मंगलवार को हरीश रावत ने नवजोत सिद्धू और उनके चार वर्किंग प्रेसिडेंट्स की तुलना सिख धर्म के महान पंच प्यारों से की थी। जिस पर भारी विवाद हुआ था।

More articles

- Advertisement -
Web Portal Ad300x250 01

ताज़ा ख़बरें

Trending