हरिद्वार महाकुंभ : क्या हैं कुंभ का इतिहास और 12 वर्षों पर ही क्यों लगता हैं कुंभ का मेला ?

महाकुंभ – 2021 के लिए हरिद्वार तैयार हैं. आयोजन की तैयारियां जोरों पर है और हरिद्वार में कुंभ मेले को लेकर उत्साह का माहौल हैं. कुंभ मेले के मद्देजनजर अब शाही स्नान की तारीखों का भी ऐलान हो गया है. बात अगर कुंभ मेले को लेकर करे तो कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा मेला होता है. कुंभ का मेला 12 वर्ष के अंतराल पर चारों में से एक पवित्र नदी के तट पर लगता है जिसमें देश- दुनिया से श्रद्धालु आते हैं. ये चार घाट हैं हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा, नासिक में गोदावरी और इलाहाबाद में त्रिवेणी संगम जहां गंगा, यमुना और सरस्वती मिलती हैं.

कैसें हुई कुंभ मेले की शुरुआत –

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, जब बृहस्पति कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तो कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है. कुंभ मेले की पौराणिक मान्यता अमृत मंथन से जुड़ी है. पौराणिक कथाओं अनुसार देवता और राक्षसों के सहयोग से समुद्र मंथन के पश्चात् अमृत कलश की प्राप्ति हुई जिस पर अधिकार जमाने को लेकर देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हुआ. असुरों से अमृत को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने वह पात्र अपने वाहन गरुड़ को दे दिया. असुरों ने जब गरुड़ से वह पात्र छीनने का प्रयास किया तो अमृत कलश से अमृत की कुछ बूंदे निकलकर पृथ्वी के चार स्थानों पर गिरी. इन देव दैत्यों का युद्ध सुधा कुंभ को लेकर 12 दिन तक 12 स्थानों में चला. आपको बता दे कि 12 वर्ष के मान का देवताओं का बारह दिन होता है. इसीलिए 12वें वर्ष ही सामान्यतया प्रत्येक स्थान में कुंभ पर्व की स्थिति बनती है. इस तरह प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल पर इन स्थानों पर कुंभ का आयोजन किया जाता है जहां इस बार कुंभ मेले का आयोजन हरिद्वार में हो रहा है.

इस बार कितनें दिनों का होगा कुंभ मेला

धार्मिक नगरी हरिद्वार में लगने वाले कुंभ मेले का इंतजार सभी को है. यू तो हर बार कुंभ मेला तीन महीने से अधिक का होता हैं पर इस बार सिर्फ ये 48 दिनों का होगा . इसका कारण हें कोरोना महामारी.

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