कृषि कानून वापस लेने के मूड में नहीं सरकार, किसानों से प्रस्ताव पर विचार करने को कहा

किसान आंदोलन लगातार जारी है. तीन कृषि कानून को लेकर आंदोलनकारी किसानों और सरकार के बीच बातचीत कई दफा हुई पर कोई हल नहीं निकल पाया है. शुक्रवार को नई दिल्ली में किसानों और सरकार के बीच 12वें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही. पांच घंटे तक चली मीटिंग में फिर एक बार कृषि कानून को लेकर सरकार और किसानों के बीच कोई सहमति नहीं देखने को मिली. मिली जानकारी के मुताबिक वैसे तो बैठक पांच घंटे तक चली पर मंत्रियों और किसानों में आमने-सामने बात 30 मिनट भी नहीं हो पाई. किसान संगठनों प्रतिनिधियों ने बताया कि सरकार ने हमें अपने प्रस्तावों पर विचार करने के लिए कहा है और वो अब बातचीत का सिलसिला बंद कर रही है. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी यही बात कही है और उनके बयान से ऐसा लगा कि शायद अब सरकार किसानों से बातचीत का सिलसिला बंद करने जा रही है. बैठक के दौरान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि नए कृषि कानूनों में कोई समस्या नहीं है और सरकार ने किसानों के सम्मान के लिए इन कानूनों को स्थगित रखे जाने की पेशकश की है. सात ही केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि कानूनों को 18 महीने तक टालने के अलावा इससे बेहतर हम और कुछ नहीं कर सकते हैं. तोमर यहीं नहीं रूके उन्होंने कहा कि हमने अपनी तरफ से बेहतर प्रस्ताव दिया था, अगर किसानों के पास इससे अच्छा कोई प्रस्ताव है तो उसे लेकर आएं. वहीं किसानों और सरकार के बीच पांच घंटे तक चली मीटिंग के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ‘हमने 12 राउंड की बैठकें कीं पर कृषि कानून पर कोई हल नहीं निकल पाया. तोमर ने आगे कहा कि जब यूनियन कानून वापसी पर अड़ी रही तो हमने उन्हें कई विकल्प दिए और आज भी हमने उन्हें कहा है कि सभी विकल्पों पर चर्चा करके आप अपना फैसला हमें बताइए. साथ ही तोमर ने कहा कि ‘इतने दौर की बातचीत के बाद भी नतीजा नहीं निकला, इसका हमें खेद है. साथ ही वे बोले कि –  फैसला न होने का मतलब है कि कोई न कोई ताकत है, जो इस आंदोलन को बनाए रखना चाहती है और अपने हित के लिए किसानों का इस्तेमाल करना चाहती है.

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