गणेश चतुर्थी स्पेशल: ऐसे करें श्री गणेश को प्रसन्न, होगी हर मनोकामना पूर्ण

भगवान गणेश को चतुर्थी तिथि का अधिष्ठाता माना जाता है तथा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का अवतरण हुआ था। इसलिए भगवान गणेश के जन्म दिन के उत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था इसीलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिये ज्यादा उपयुक्त माना जाता है। पूरे भारत में गणेश चतुर्थी से लेकर अगले दस दिनों तक जमकर उत्साह देखा जाता है।

इस साल गणेश चतुर्थी सेलिब्रेशन 10 सितंबर से शुरू हो चुका है। 11 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का समापन 21 सितंबर को होगा। इन सारी तिथियों के दौरान गणपति बप्पा की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती हैं। कहा जाता है कि इनकी पूजा करते समय अधिक ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। गणेश जी अमंगल और विघ्नहर्ता हैं। कहा जाता है कि जिस पर गणेश जी की कृपा हो जाए उसके जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। गणेश जी के विषय में कहा जाता है कि यह जितनी जल्दी मुंह फुलाकर बैठ जाते हैं उतनी ही जल्दी मान भी जाते हैं। शास्त्रों में कुछ आसान उपाय बताए गए हैं जिनसे आप भी गणेश जी जल्दी खुश कर सकते हैं।

आइए जानते है श्री गणेश को प्रसन्न करने के उपाय

दूर्वा

गणेश जी को खुश करने का सबसे सस्ता और आसान उपाय दूर्वा अर्पित करना है। दुर्वा अर्पित करते हुए मंत्र जरूर बोलें ‘इदं दुर्वादलं ऊं गं गणपतये नम:’। दूर्वा गणेश जी को इसलिए प्रिय है क्योंकि दूर्वा में अमृत मौजूद होता है। गणपति अथर्वशीर्ष में कहा गया गया है कि जो व्यक्ति गणेश जी की पूजा दुर्वांकुर से करता है वो कुबेर के समान हो जाता है। गणेश जी को कम से कम 21 दूब, 2 शमी और 2 बेल पत्र चढ़ाया जाता है। तुलसी जी गणेश जी को नहीं चढ़ाई जाती हैं।

ऐसें चढ़ाएं दूर्वा : 

>> प्रात:काल उठकर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठकर व्रत और पूजा का संकल्प लें।  

>> फिर ऊं गं गणपतयै नम: मंत्र बोलते हुए जितनी पूजा सामग्री उपलब्ध हो उनसे भगवान श्रीगणेश की पूजा करें। 

>> गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर लगाएं। फिर उन्हें 21 गुड़ की ढेली के साथ 21 दूर्वा चढ़ाएं। मतलब 21 बार 21 दूर्वा की गाठें अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा गणेशजी को मोदक और मोदीचूर के 21 लड्डू भी अर्पित करें। इसके बाद आरती करें और फिर प्रसाद बांट दें।

>> दूर्वा अर्पित करने का मंत्र : ‘श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि।’ : इस मंत्र के साथ श्रीगणेशजी को दूर्वा चढ़ाने से जीवन की सभी विघ्न समाप्त हो जाते हैं और श्रीगणेशजी प्रसन्न होकर सुख एवं समृद्धि प्रदान करते हैं।

>> क्या होगा दूर्वा अर्पित करने से : इस दिन गणेशजी को दूर्वा चढ़ाकर विशेष पूजा की जाती है। ऐसा करने से परिवार में समृद्धि बढ़ती है और मनोकामना भी पूरी होती है। इस व्रत का जिक्र स्कंद, शिव और गणेश पुराण में किया गया है।

चावल
भगवान श्री गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए पवित्र चावल अर्पित करें। पवित्र चावल उसे कहा जाता है जो टूटा हुआ नहीं हो। सूखा चावल श्री गणेश जी को नहीं चढ़ाएं। चावल का गीला करें फिर, ‘इदं अक्षतम् ऊं गं गणपतये नम:’ मंत्र बोलते हुए तीन बार श्री गणेश जी को चावल चढ़ाएं।

गन्ना
गणेशजी की पूजा में गन्‍ने का भी अपनी स्‍थान है। अगर आप भी अपने घर पर गणपतिजी की स्‍थापना करने जा रहे हैं तो पूजा में अर्पित करने के लिए गन्‍ना जरूर ले आएं। गणेशजी को गन्‍ना चढ़ाने से आपके जीवन में भी मिठास घुल जाती है।

गुड़हल का फूल
लाल रंग गणपतिजी का प्रिय होता है, इसलिए उनकी पूजा में पुष्‍प भी लाल रंग का प्रयोग किया जाता है। आप चाहें तो गणेशजी को चढ़ाने के लिए गुड़हल के फूल का प्रयोग कर सकते हैं। गुड़हल का फूल गणपति पूजा में शामिल करने से आपको शुभ लाभ की प्राप्ति होती है।

सिंदूर
भगवान गणेशजी को सिंदूर का तिलक लगाना सबसे शुभ माना जाता है। सिंदूर को शुभ और मंगल का प्रतीक माना जाता है। मान्‍यता है कि गणेशजी को सिंदूर अर्पित किया जाता है। गणेशजी को सिंदूर अर्पित करने के बाद अपने माथे पर भी सिंदूर लगाएं। गणेश जी को सिंदूर चढ़ाते समय मंत्र जरूर बोलें, ‘सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम। शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम॥ ऊँ गं गणपतये नम:’। ऐसा करने से आपके जीवन में सुख और सौभाग्‍य की प्राप्ति होती है।

श्री गणेश को जरूर लगाएं इनका भोग:-

मोदक: श्रीगणेश को प्रसन्न करने का पहला तरीका है मोदक का भोग। जो व्यक्ति गणेश जी को मोदक का भोग लगाता है गणपति उनका मंगल करते हैं। मोदक का भोग लगाने वाले की मनोकामना पूरी होती है। मोदक की तुलना ब्रह्म से की गयी है। मोदक भी अमृत मिश्रित माना गया है।

घी : पंचामृत में एक अमृत घी होता है। घी को पुष्टिवर्धक और रोगनाशक कहा जाता है। भगवान गणेश को घी काफी पसंद है। घी से गणेश की पूजा का बड़ा महात्म्य होता है। जो व्यक्ति गणेश जी की पूजा घी से करता है उसकी बुद्धि तेज होती है। घी से गणेश की पूजा करने से योग्यता और ज्ञान सब कुछ हासिल होता है।

मोतीचूर लड्डू : भगवान गणेश को मोतीचूर के लड्डू भी बहुत प्रिय हैं। इस लिए गणेश चतुर्थी के पर्व पर उनके बाल रुप का भी पूजन करते हुए मोतीचूर के लड्डू का भी भोग लगाएं।

बेसन लड्डू : भगवान श्री गणेश का बेसन का लड्डू भी अति प्रिय है। इस लिए इन 10 दिनों में एक दिन बेसन के लड्डू का प्रसाद चढ़ाएं।

खीर : एक कथा के अनुसार, माता पार्वती, महादेव के लिए जब खीर बनाती हैं तो पुत्र गणेश खीर पी जाते हैं। इसलिए भगवान गणेश को खीर अवश्य चढ़ाना चाहिए।

केला : सनातन धर्म में केले के भोग को उत्तम माना गया है और यह भगवान गणेश को भी पसंद है। इस लिए केले का भोग अवश्य लगाएं।

नारियल : धार्मिक कार्यों के लिए नारियल काफी शुभ होता है। इन दस दिनों में कसी दिन भगवान गणेश को नारियल का भोग जरूर लगाएं।

मखाने की खीर : मखाने की खीर बनाकर भगवान गणेश को भोग लगाएं।

पीले रंग की मिठाई : पीला रंग गणेश जी को बहुत प्रिय है। इसलिए पीली मिठाई का भोग जरूर लगाएं।

भूलकर भी ना अर्पित करें ये चीजे….

सफेद चंदन : गणेजी को सफेद चंदन के बजाए पीला चंदर अर्पित करें या पीला चंदन लगाएं।

तुलसी : भगवान गणेशजी को भूलकर भी तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए। तुलसी विष्णुप्रिया है।

सूखे फूल : गणेश जी को कभी भी सूखे फूल अर्पित नहीं करने चाहिए, कहा जाता है ऐसा करने से व्यक्ति को अशवभ प्रभाव प्राप्त होते हैं तथा जीवन में दरिद्रत आती है।

टूटे और सूखे अक्षत : गणेशजी को टूटे या सूख अक्षत अर्थात चावल अर्पित नहीं करना चाहिए। अटूट चावल को थोड़ा गीला करके अर्पित करें। गणेशजी का एक दांत टूटा हुआ हैं इससे गीला चावल होने पर उन्हें स्वीकार करना गणेश के लिए सहज होता है।

सफेद जनेऊ और सफेद वस्त्र : गणेश जी को कभी भी सफेद जनेऊ अर्पित नहीं करना चाहिए। हालांकि जनेऊ को हल्दी में पीला करके अर्पित कर सकते हैं। इसी तरह उन्हें सफेद वस्त्र भी नहीं पहनाए जाते हैं। न ही इन्हें गणेश जी को सफेद चंदन अर्पित करना चाहिए, बल्कि चंदन अर्पित करना चाहिए। 

केतकी और सफेद फूल : गणेशजी को केतकी के फूल भी अर्पित नहीं किए जाते हैं। सफेद फूल भी गणेशजी को पसंद नहीं है। सफेद पुष्प का संबंध चंद्रमा से होने के कारण उन्हें नहीं चढ़ता। चंद्रमा ने एक समय पर गणेशजी का उपहास किया था। इसके चलते गणेशजी ने उन्हें शाप दे दिया था और उनसे संबंधित सफेद चीजों को अपनी पूजा में वर्जित कर दिया था।  

श्रीगणेश की पूजा विधि-
स्नान के बाद सर्वप्रथम साफ वस्त्र धारण करें। ताम्र पत्र का श्री गणेश यन्त्र लें। यंत्र को साफ मिट्टी, नमक, निम्बू से अच्छे से साफ करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर के आसान पर बैठें। सामने श्री गणेश यन्त्र की स्थापना करें। सभी पूजन सामग्री को इकट्ठा कर लें। फूल, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि गणेश जी को चढ़ाएं। इसके बाद श्रीगणेश की आरती करें। अंत में भगवान गणेश जी का स्मरण करें।

‘ऊँ गं गणपतये नम:’ मंत्र का 108 बार जाप करें

इस उपाय से श्रीगणेशकी पूजा करने वाले भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं लंबोदर लेकिन बुधवार के दिन एक खास उपाय से आपकी मनोकामना शीघ्र हो सकती है पूरी… ‘गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।’
इस मंत्र में भगवान गणेश के बारह नामों का स्मरण किया गया है। इन नामों का जप अगर मंदिर में बैठकर किया जाए तो ये उत्तम फल देते हैं… तो आप इन उपायों को अपनाएं… श्रीगणेश को मनाएं और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद पाएं।

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