अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के बीच हुए सैन्य समझौते पर भड़का फ्रांस, कहा – हमारी पीठ में छुरा घोंपा

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के बीच हुए नए सैन्य समझौते पर फ्रांस ने अमेरिका को जमकर खरी खोटी सुनाई है। फ्रांस ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन पर पीठ में छुरा भोंकने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपने पूर्ववर्ती डॉनल्ड ट्रंप की तरह व्यवहार कर रहे हैं। शुक्रवार को फ्रांस के विदेश मंत्री ला ड्रियाँ ने एक रेडियो स्टेशन से कहा, “यह क्रूर है, एकतरफा है और अप्रत्याशित है। यह फैसला मुझे उसी सब की याद दिलाता है जो ट्रंप किया करते थे।”

बता दें की गुरुवार को तीनों देशों अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के राष्ट्राध्यक्षों ने इस समझौते का ऐलान किया था जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया में एक परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी बनाने का भी प्रस्ताव है। हालांकि समझौते के ऐलान के वक्त तीनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ऑस्ट्रेलिया परमाणु हथियार तैनात नहीं करेगा बल्कि परमाणु प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल करेगा। 

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा की हम सभी हिंद प्रशांत क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बने रहने की अहमियत समझते हैं। ऑस्ट्रेलिया में ज्यादा अमेरिकी सैनिक नए समझौते के बाद और अधिक संख्या में अमेरिकी सैनिक और सैन्य विमान ऑस्ट्रेलिया में तैनात होंगे। गौरतलब हो की तीनो देशों के बीच हुए इस सैन्य समझौते को फ्रांस से ही नही चीन समेत पश्चिमी देशों से भी आलोचना झेलनी पड़ रही है।

समझौते के बीच चीन ने भी अपना बयान जारी कर साफ कहा है की ऐसी साझीदारियां किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं होनी चाहिए। चीन ने आगे कहा की, ऐसे समझौते इलाके में हथियारों की होड़ को बढ़ावा दे सकते हैं। चीन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जाओ लीजियांग ने कहा कि, “ये तीनों देश क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं, हथियारों की होड़ बढ़ा रहे हैं और परमाणु हथियार अप्रसार की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।”

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जाओ लीजियांग ने आगे कहा, “चीन का हमेशा यह मानना है कि किसी भी क्षेत्रीय रचनातंत्र को शांति और विकास की स्थिति को आगे बढ़ाने वाला होना चाहिए। उसे ऐसा होना चाहिए आपसी सहयोग और भरोसा बढ़ाए। इसे किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाना चाहिए और उसके हितों के लिए नुकसानदायक नहीं होना चाहिए।”

वहीं ब्रिटेन ने चीन की चिंताओं को बेवजह बताते हुए कहा है कि यह समझौता किसी के खिलाफ नहीं है और ब्रिटेन की अगली पीढ़ी की परमाणु पनडुब्बियों के निर्माण की कीमत कम करेगा। बता दें समझौते के तहत अमेरिका और ब्रिटेन अपनी परमाणु शक्तिसंपन्न पनडुब्बियों की तकनीक ऑस्ट्रेलिया के साथ साझा करेंगे। इस कदम को क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता के बरअक्स देखा जा रहा है। 

फ्रांस का हुआ नुकसान, जानिए कैसे

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के बीच हुए सैन्य समझौते के तहत आकुस (AUKUS) बनाकर तैयार किया गया है। जो आधुनिक रक्षा प्रणालियां जैसे साइबर, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, क्वॉन्टम कंप्यूटिंग और समुद्र के भीतर की क्षमताओं का विकास करने के काम में तेजी लाएगा। नए समझौते के तहत अमेरिका परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी बनाने की तकनीक ऑस्ट्रेलिया को देगा जिसके आधार पर ऐडिलेड में नई पनडुब्बियों का निर्माण होगा जिसका सीधे नुकसान फ्रांस को होगा। 

दरअसल, नए समझौते के चलते फ्रांस की जहाज बनाने वाली कंपनी नेवल ग्रुप का ऑस्ट्रेलिया के साथ हुआ समझौता खत्म हो गया है। नेवल ग्रुप ने 2016 में ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौता किया था जिसके तहत 40 अरब डॉलर की कीमत की पनडुब्बियों का निर्माण होना था, जो ऑस्ट्रेलिया की दो दशक पुरानी कॉलिन्स पनडुब्बियों की जगह लेतीं। इस समझौते के कारण फ्रांस का ऑस्ट्रेलिया के साथ संभावित पनडुब्बी खरीद समझौता भी खतरे में पड़ गया है। जिसके कारण फ्रांस ने इस समझौते को क्रूर और अप्रत्याशित बताया।

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