विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहली महिला सचिव

नवनीत कुमार गुप्ता

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव डॉ. रेणु स्वरूप को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव पद का अतिरिक्त पदभार दिया गया है। वह पहली महिला हैं जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव के रूप में कार्य करेंगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग इस वर्ष अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे कर चुका है। वह इस विभाग की 13वीं सचिव हैं। डॉ. रेणु स्वरूप से पहले प्रोफेसर आशुतोष शर्मा छह साल से अधिक समय तक इस विभाग के सचिव रहे।

डॉ. रेणु स्वरूप, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव के साथ—साथ एवं जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (भारत सरकार का उपक्रम) की अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने लगभग 29 वर्षों तक जैव प्रौद्योगिकी विभाग में अपनी सेवाएं दी हैं और 10 अप्रैल, 2018 को भारत सरकार में सचिव नियुक्त होने तक वरिष्ठ सलाहकार / वैज्ञानिक एच के पद पर कार्यरत थीं।

वह जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बाइरैक) की अध्यक्ष भी हैं। जो भारत सरकार द्वारा निगमित एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है और उसकी स्थापना स्टार्ट-अप और एसएमई पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ बायोटेक एंटरप्राइज में नवाचार अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए की गयी है।

जेनेटिक्स और प्लांट ब्रीडिंग में पीएचडी उपाधि प्राप्त डॉ. रेणु स्वरूप ने कॉमनवेल्थ स्कॉलरशिप के तहत द जॉन इनेस सेंटर, नॉर्विच यूके में अपना पोस्ट डॉक्टरल पूरा करने के पश्चात वर्ष 1989 में भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी विभाग में साइंस मैनेजर का कार्यभार संभालने के लिए भारत वापिस आ गयीं।

एक साइंस मैनेजर के रूप में नीति नियोजन और कार्यान्वयन से संबंधित मुद्दे उनके कार्य का हिस्सा रहे हैं। वर्ष 2001 में बायोटेक्नोलॉजी विज़न एवं वर्ष 2007 में नेशनल बायोटेक्नोलॉजी डेवलपमेंट स्ट्रेटजी के निर्माण में वे सक्रिय रूप से शामिल थीं, वर्ष 2015 से वर्ष 2020 तक वे विशेषज्ञ समिति के सदस्य सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं।

डॉ. रेणु स्वरुप, महिलाओं और विज्ञान से संबंधित कार्यक्रमों और गतिविधियों में भी शामिल रही हैं। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी कैरियर एडवांसमेंट फॉर विमेन साइंटिस्ट्स – बायो केयर पर डीबीटी योजना लागू करने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। वे प्रधानमंत्री के लिए वैज्ञानिक सलाहकार समिति द्वारा ‘वीमेन इन साइंस’ पर गठित टास्क फोर्स की सदस्य रही हैं।

डॉ. रेणु स्वरूप बाइरैक के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने से पहले भारत सरकार द्वारा निगमित एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बाइरैक) जो स्टार्ट-अप और एसएमई पर विशेष ध्यान देने के साथ बायोटेक एंटरप्राइज में नवाचार अनुसंधान को बढ़ावा देती है, के प्रबंध निदेशक का भी प्रभार संभाल चुकी हैं।

उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी ट्रांसलेशनल रिसर्च एंड इंडस्ट्री-एकेडमिया पार्टनरशिप के माध्यम से 1000 से अधिक स्टार्टअप और एंटरप्रेन्योर को सहयोग किया है एवं नवाचार अनुसंधान और उत्पाद विकास के लिए लगभग 500 छोटी कंपनियों को सहयोग किया है।

डॉ. रेणु स्वरूप नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (एनएएसआई) इंडिया की सदस्य हैं एवं वे कई राष्ट्रीय संस्थानों और विश्वविद्यालयों के गवर्निंग बॉडी की सदस्य भी हैं। उन्हें 2012 में ‘बायोस्पेक्ट्रम पर्सन ऑफ द ईयर अवार्ड” से सम्मानित किया गया था। उन्हें ‘राष्ट्रीय उद्यमिता पुरस्कार 2017’ से भी सम्मानित किया जा चूका है।

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