किसान संसद: कृषि मंत्री को देना पड़ा इस्तीफा, सोनिया गांधी के खिलाफ पास हुआ निंदा प्रस्ताव

संसद में जारी मॉनसून सत्र के साथ-साथ जंतर-मंतर पर आयोजित ‘किसान संसद’ शुक्रवार को दूसरे दिन भी चली। सिंघु बॉर्डर से जंतर-मंतर पहुंचे किसानों की करीब 11.20 बजे संसद लगी। किसी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए अर्द्धसैनिक बल और पुलिसकर्मी प्रवेश द्वार पर भारी-भरकम अवरोधकों के साथ प्रदर्शन स्थल पर तैनात किए गए हैं। किसानों का विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।

किसानों ने ‘किसान संसद’ का आयोजन सदन अध्यक्ष हरदेव अर्शी, उपाध्यक्ष जगतार सिंह बाजवा और ‘कृषि मंत्री’ के साथ किया। सत्र की शुरुआत में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के साथ कृषि कानूनों पर पक्ष रखने के लिए अपने बीच से कृषि मंत्री का भी चुनाव किया गया। किसान संसद में एक घंटे का प्रश्नकाल भी रखा गया था। जहां सरकार के पैरोकार के तौर पर बतौर कृषि मंत्री चुने गए किसान नेता रवनीत सिंह बराड़ विपक्ष के सवालों से घिरे रहे।

किसानों ने जैसे ही दोगुनी आय, न्यूनतम समर्थन मूल्य और मंडी कानूनों पर सवाल उठाए, कृषि मंत्री को इसका जवाब नहीं देते बन रहा था। पूरे सत्र में वह किसानों के सवालों से घिरे रहे। इससे नाराजगी जाहिर करते हुए किसानों ने नारेबाजी की। पहला सत्र इसी माहौल में चलता रहा। लंच ब्रेक के बाद करीब 2:30 बजे शुरू हुए दूसरे सत्र में भी हालात नहीं बदले। 

किसान प्रतिनिधि अपने सवालों का माकूल जवाब न मिलने की बात करते हुए हंगामा करते दिखे। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बार-बार समझाने के बाद भी शोरगुुल नहीं थमा। जवाब देने में नाकाम रहने पर आखिर में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वह किसानों के सामने निरुत्तर हैं। इसी के साथ साथ किसान संसद में तीन कृषि कानूनों पर भी तीखी चर्चा जारी रही।

जहां किसानो ने केंद्र सरकार के लाए गए तीन नए कृषि कानूनों को सिरे से खारिज कर दिया। वहीं कांग्रेस के कई सांसदों के किसान संसद में जारी प्रदर्शन छोड़कर चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की ताजपोशी में शामिल होने पर प्रदर्शनकारियों ने नाराजगी जताई। इन सांसदों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया।
इस दौरान किसान संसद में केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी के बयानों की भी जमकर आलोचना हुई।

आखिर में शाम को किसान संसद का सत्र सोमवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया। बता दें की सोमवार की किसान संसद में सिर्फ महिलाएं हिस्सा बनेंगी। 200 महिला किसान प्रतिनिधियों पर सत्र के संचालन से लेकर हर गतिविधि तक की जिम्मेेदारी होगी।

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