किसान अकरकरा की खेती से हो रहे मालामाल, प्रति एकड़ 4 लाख रुपये तक की आमदानी

मोदी सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसलिए मोदी सरकार किसानों को पारंपरिक फसलों को छोड़ कर औषधीय फसलों को ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसी का नतीजा है की भारत में औषधीय पौधों की खेती तेजी से बढ़ रही है। किसान अब अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए पारंपरिक फसलों पर निर्भर नही है। केन्द्र सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है।
अकरकरा की खेती भारत के इन राज्यों मे की जाती है
कई राज्यों में औषधीय गुणों से भरपूर अकरकरा की खेती की जा रही है। इनमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात तथा महाराष्ट्र के किसान अव्वल है। इसकी खेती में लागत काफी कम है और मुनाफा कई गुना ज्यादा। औषधीय गुणों से भरपूर
अकरकरा का चाहे फूल हो या फिर तना। सब में औषधीय गुण हैं। अकरकरा का उपयोग डेंटिन और दर्द निवारक और तेलों के निर्माण में किया जाता है। इसके जड़ का उपयोग शक्तिवर्धक दवाओं में किया जाता है। सिर दर्द, पेट संबंधी दवाओं के निर्माण में अकरकरा का उपयोग बहुतायत किया जाता है।
30 हजार रुपए क्विंटल
मंडी में इस औषधीय पौधे की जड़ों की कीमत आम दिनों में 25 से 30 हजार रुपए प्रति क्विंटल होती है, लेकिन कोरोना में आयुर्वेदिक दवाओं की मांग बढऩे से इसकी कीमत 35 से 40 हजार रुपए क्विंटल तक पहुंच गई है। जबकि पैदावार बेचकर आप आराम से 4-5 लाख रुपए कमा सकते हैं। दवा बनाने वाली कुछ कंपनियां किसानों से अकरकरा की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग भी कराती हैं। वहीं पौधे में लगने वाले फूल भी दो से तीन हजार रुपए प्रति किलो बिकता है। जिससे किसान को अच्छा खासा मुनाफा मिलता है।
जल निकास वाली जमीन सबसे उपयुक्त
अकरकरा की खेती के लिए कृषि विशेषज्ञो द्वारा जल निकास वाली जमीन को सबसे अच्छा बताया गया है। अगर खेत की मिट्टी भुरभुरी और नरम है तो पैदावार ज्यादा होगी। इसकी बुवाई के लिए अक्टूबर-नवंबर का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। 
अकरकरा की फसल कितने दिनों में तैयार होती है
अकरकरा की खेती कम लागत वाली और अधिक उपज देने वाली होती है। अकरकरा की खेती 6 से 8 महीने की होती है। अकरकरा के पौधों पर भीषण गर्मी या अत्यधिक ठंड का असर नहीं पड़ता है। अकरकरा की खेती के लिए मिट्टी का P.H. मान सामान्य होना चाहिए।
अकरकरा की खेती
अकरकरा की खेती एक खास औषधीय पौधे के रूप में की जाती है।अकरकरा का इस्तेमाल पिछले 400 सालो से आयुर्वेद में किया जा रहा है। अकरकरा कई औषधीय गुणों से भरपूर है। अकरकरा के बीज और डंठल की मांग बनी रहती है। अकरकरा का उपयोग डेंटिन और दर्द निवारक और तेलों के निर्माण में किया जाता है। अंग्रेजी में इसे पेलिटोरी रूट कहते हैं।अकरकरा पौधे की जड़ों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक औषधि बनाने में किया जाता है।
अकरकरा की खेती में लागत- लागत की बात करें तो एक एकड़ में अकरकरा की खेती करने में 40 हजार रुपए से भी कम का खर्च आता है। 
अकरकरा की खेती या नर्सरी का समय-अकरकरा को अक्टूबर-नवंबर के महीने तक रोपाई या बीज के रूप में बोना चाहिए।
अकरकरा की खेती से फायदा- फिलहाल अकरकरा की कीमत 300 से 400 रुपये प्रति किलो है, जिससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आप अकरकरा की खेती से कितनी कमाई कर सकते हैं। 

आलू से बेहतर विकल्प- अकरकरा की खेती अब कई राज्यों में की जा रही है। यूपी के किसान आलू की जगह पर अब अकरकरा की खेती कर रहे हैं। यह भी एक आलू की तरह एक कंदवर्गीय फसल है।

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