देश में पहली बार आयोजित हुआ किसान-वैज्ञानिक कनेक्ट मीट कार्यक्रम, जुड़े 75,000 से अधिक किसान

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय): केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी व अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किसान-वैज्ञानिक कनेक्ट मीट के एक कार्यक्रम में 75 आकांक्षी जिलों के 75,000 किसानों को संबोधित किया। यह देश में पहला ऐसा कार्यक्रम था जहां किसानों ने कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र से जुड़े अग्रणी वैज्ञानिकों के साथ खुलकर बातचीत की ताकि सर्वोत्तम कृषि पद्धतियों को अपनाया जा सके और कृषि उत्पादन बढ़ाया जा सके।

इसका आयोजन आईसीएआर-आईएआरआई, पूसा, नई दिल्ली में डीबीटी और बायोटेक-किसान हब ने संयुक्‍त रूप से किया था। कार्यक्रम के दौरान मंत्री जितेन्द्र सिंह ने किसानों को आश्वासन दिया कि विज्ञान आधारित कृषि नवाचारों को खोजने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की अनूठी पहल न केवल किसानों की आय को दोगुना करेगी बल्कि 25 साल की अमृतकाल यात्रा के बाद 100 वर्ष होने पर यह भारत को विश्व में अग्रणी कृषि और वैज्ञानिक शक्ति भी बनाएगी।

डा. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि, ” बायोटेक-किसान एक वैज्ञानिक-किसान साझेदारी योजना है जिसे 2017 में कृषि नवाचार के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने शुरू किया था, जिसका उद्देश्य विज्ञान प्रयोगशालाओं को किसानों के साथ जोड़ना है ताकि उन्‍नत समाधान और प्रौद्योगिकियों को खेत के स्‍तर पर लागू किया जा सके।” उन्होंने कहा, विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बायोटेक-किसान हब की स्थापना कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को राष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं और संस्थानों से जोड़कर नवीनतम और नवीन तकनीकों के साथ मजबूत और सशक्त बनाएगी।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि अब तक कुल 36 बायोटेक-किसान हब स्थापित किए गए हैं, जिसमें देश के सभी 15 कृषि-जलवायु क्षेत्रों को शामिल किया गया है और 112 आकांक्षी जिलों सहित कुल 169 जिलों में उनके क्रियाकलाप को लागू किया गया है। उन्होंने कहा, इस योजना से किसानों के कृषि उत्पादन और आय में वृद्धि करके अब तक तीन लाख से अधिक किसान लाभान्वित हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 200 से अधिक उद्यमिताएं भी विकसित की गई हैं।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा, डीबीटी ने अपने विशेष कार्यक्रमों के अंतर्गत पूर्वोत्तर क्षेत्र के साथ-साथ अन्य हिमालयी राज्यों जैसे जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बायोटेक-किसान हब का एक नेटवर्क स्थापित करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में 15 बायोटेक-किसान हब विकसित किए जा चुके हैं और उन्‍हें स्थापित करने के प्रस्तावों को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसी तरह, अन्य हिमालयी राज्यों में भी कम से कम इतनी ही संख्या में बायोटेक-किसान हब स्थापित करने की योजना है।

यह कार्यक्रम वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों की प्रयोगशालाओं में किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने और कृषि फार्मों में वैज्ञानिकों की तन्‍मयता के लिए सहायता प्रदान करता है ताकि जमीनी स्तर पर किसानों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझा जा सके और उनका समाधान खोजा जा सके।

More articles

- Advertisement -
Web Portal Ad300x250 01

ताज़ा ख़बरें

Trending