किसान आंदोलन : गाजीपुर बार्डर पर क्यों आ रही है किसानों की संख्या में कमी ?

तीन कृषि कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन दिल्ली के तमाम बार्डरों पर जारी है. इस आंदोलन को अब तीन महीना होने को आया है पर सरकार और किसानों के बीच बात बन नहीं पाई है. लेकिन दिल्ली के गाजीपुर बार्डर पर आंदोलनकारी किसानों की संख्या भी इस समय चर्चा का विषय है.

दरअसल, गाजीपुर बार्डर पर पिछले कई दिनों से किसानों की संख्या लगातार घट रही है. बताया जा रहा है कि यहां पहले के मुकाबले किसानों की संख्या में काफी अंतर देखा जा रहा है जो आंदोलन के लिए शुभ संकेत नहीं है. गाजीपुर बार्डर पर मंच के सामने आजकल उतनी संख्या में किसान नजर नहीं आ रहे है जितने पहले नजर आते थे.

मीडिया रिपोर्टस की माने तो 26 जनवरी को राजधानी दिल्ली में ट्रेक्टर रैली के नाम पर हुए उपद्रव के बाद से ही गाजीपुर बार्डर पर लगातार किसानों की संख्या में कमी देखी जा रही है. इसके अलावा इसका एक और भी कारण है. वो ये कि मार्च और अप्रेल में खेतों में गेहू की कटाई होनी है जिसको लेकर भी किसान चिंतित है.

किसान गेंह की फसल की कटाई के लिए भी गांव लौटने लगे है. वहीं रिपोर्टस की माने तो आगे किसानों की संख्या में यहां और कमी देखने को मिल सकती है क्योकि मार्च – अप्रेल में गेंहू की फसल कटाई  के मद्देनजर किसान गांव लौट सकते है.

वहीं गाजीपुर बार्डर पर किसानों की संख्या घटने के बीच भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत लगातार इस बात को दोहरा रहे है कि जब तक केंद्र की मोदी सरकार तीन कृषि कानून को वापस नहीं ले लेती किसान अपने घर को नहीं लोटेगा. पर सवाल ये कि क्या गाजीपुर बार्डर पर किसानो की घटती संख्या कुछ इशारा कर रही है या फिर आंदोलन जिस गति से आगे बढ़ रहा है उसी गति से आगे बढ़ता रहेगा ? 

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