महंगाई की मार

जब महंगाई आसमान छूने लगे और आमदनी में लगातार गिरावट आने लगे तो जाहिर सी बात है ऐसे में घर का भी बजट पूरी तरह बिगड़ ही जाएगा. एक साधारण सा साधारण आदमी भी केवल यही सोचता है की कम से कम उसकी दैनिक रोजमर्रा की जरूरतमंद चीजें पूरी हो सके. लेकिन पिछले 1 साल से कोरोना ने अपना इतना कहर बरपाया है की भारत की अर्थव्यवस्था भी लड़खड़ा गई है. देश की अर्थव्यवस्था काफी संवेदनशील स्थिति में पहुंच चुकी है जिसका असर सीधे लोगो की खाद्य सामग्री पर पड़ा है. जिसके कारण आम लोगो के सामने रोजी रोटी का सवाल एक बड़ी चुनौती बन चुका है. महंगाई की मार सीधे आम लोगो की जेब पर पड़ी है.
पिछले दिनो सोमवार 12 अप्रैल को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार मार्च महीने में देश में खुदरा महंगाई की दर बढ़ कर 5.52 हो गई. जब फरवरी माह में खुदरा महंगाई 5.3 की रफ्तार से बड़ी थी तब भी देश की आम जनता की स्थिति चिंताजनक थी. 
ज्ञात हो कि फरवरी माह में ही पूरे देश में खाने पीने के दाम 3.84 फीसदी बढ़े थे. वहीं फिर मार्च में ये दाम बढ़कर 4.94 हो गए. जिससे कि देश के लोगो को अपनी अनिवार्य चीजों को खरीदने की भी चिंता सताने लगी.बीते सोमवार आए ताजा आंकड़ों के अनुसार आधा फीसदी खुदरा महंगाई दर और लगभग एक फीसदी खाने पीने की सामग्रियों के दाम में बढ़ोतरी हुई है जिससे आप आम जनमानस की स्थिति का अंदाजा लगा सकते है.
बता दें कि रोजमर्रा की खाद्य सामग्रियों जैसे दालों के दाम में लगभग तेरह फीसदी, तेल की कीमतों में करीब 25 फीसदी वहीं फल, सब्जी , और अंडो के दामों में भी खासा बढ़ोतरी हुई है.
सवाल यह है की जहां एक ओर पूरे देश में आर्थिक मंदी के हालात पैदा हो रहें है देश के कुछ तबके( अमीर लोग) के लोगो को छोड़कर देखा जाए तो गरीबी में जी रहे लोगों के सामने रोजी रोटी कमाकर खाना भी बहुत बड़ा चुनौतीपूर्ण काम हो गया है ऐसे में सरकार का ध्यान इस ओर क्यों नहीं है?? आखिर क्यों गरीबों की सुध नहीं ली जा रही??? सरकार केवल चुनावों में ही क्यों गरीबों, झुग्गी बस्ती वालो के घरों में प्रवेश करती है क्या उन्हें सिर्फ कुर्सी से प्यार है जनता से नहीं???? आखिर सरकार की प्राथमिकता महंगाई पर काबू पाना क्यों नही है???

साल भर पहले जब पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था तो मजदूर लोग जो दिहाड़ी पर काम करते है उनके लिए अपना जीवन बसर करना बेहद मुश्किल हो गया था उनके सामने जिंदा रहना ही एक बहुत बड़ी चुनौती थी. महंगाई की मार सबसे ज्यादा गरीब और मध्यमवर्ग के लोगो को ही परेशान करती है. पूंजीपतियों को ना इनकी चिंता है ना ही सरकार का इस ओर ध्यान है.
पिछले साल लगे सख्त लॉकडाउन के बाद अर्थव्यवस्था धीरे धीरे पटरी पर आने लगी थी दिसंबर माह तक राहत का माहौल था. मगर जो अभी वर्तमान स्थिति है जिस तरह कोरोना अपना प्रकोप दिखा रहा है उसके मद्देनजर फिर से लॉकडाउन लगने के आसार नजर आ रहे हैं. कुछ राज्यों में नाइट कर्फ्यू तो कुछ में विकेंड कर्फ्यू का ऐलान कर दिया गया है. ऐसे में अगर पूरे देश में एक साथ लॉकडाउन लगता है तो इसका सीधा असर बाजारों और दैनिक जरूरतों की वस्तुओं पर ही पड़ेगा जिससे आमजनमानस को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

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