DU : फोरम ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर का 67वां परिनिर्वाण दिवस मनाया, उनके योगदाक को किया गया याद

फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फ़ॉर सोशल जस्टिस के तत्वावधान में दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने मंगलवार को भारत के संविधान निर्माता, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, सामाजिक क्रांति के अग्रदूत बोधिसत्व बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी के 67 वें परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर  डीयू के उत्तरी परिसर में एक सादे समारोह में बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में फोरम के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन , डॉ. के पी सिंह , डॉ. अशोक कुमार , श्री नीतीश कुमार , श्री अविनाश , श्री मुनीश कुमार , डॉ. मुकेश कुमार आदि थे । सभी ने डॉ.अम्बेडकर को सामाजिक न्याय का पुरोधा बताया ।

पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद अपने संबोधन में फोरम के चेयरमैन व विद्वत परिषद के पूर्व सदस्य डॉ. हंसराज सुमन ने कहा कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी ने सदैव वंचित, शोषितों और पिछड़े वर्गों के हकों की लड़ाई लड़ी थी, आज उनके योगदान को लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है इसके लिए जरूरी है कि देशभर के सभी केंद्रीय एवं राज्यों के विश्वविद्यालयों में डॉ.  अम्बेडकर चेयर स्थापित हो और अम्बेडकर स्टरडीज सेंटर खोले जाए जिसमें विशेष रूप से अम्बेडकर पर रिसर्च हो।

उन्होंने डॉ.अम्बेडकर स्टरडीज सेंटर व अम्बेडकर चेयर के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त अनुदान राशि उपलब्ध कराने की मांग रखी । उन्होंने आगे कहा  कि डॉ अम्बेडकर एक अर्थशास्त्री ,विधिवेत्ता के साथ-साथ खोजी पत्रकारिता के क्षेत्र में एक स्थापित पत्रकार थे जिन्होंने अपने जीवन में 35 वर्षो तक बिना किसी वित्तिय सहायता के अखबार निकाले। डॉ.सुमन ने आगे अपने संबोधन में कहा कि  बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी ने सदैव वंचित , शोषित , उत्पीड़ित व पिछड़े वर्गों के हकों की लड़ाई लड़ी थी ।

आज हमें ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से उनके योगदान को आम लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है , इसके लिए जरूरी है कि सभी विद्यालय / विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में उन्हें पढ़ाया जाए क्योंकि कुछ लोग उन्हें दलितों तक ही सीमित कर देते हैं जबकि डॉ.अम्बेडकर के विचारों को केवल किसी विशेष समुदाय से जोड़कर नहीं बल्कि समग्रता में समझने की जरूरत है ।

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