DU : फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फ़ॉर सोशल जस्टिस के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने की ये मांग, जाति प्रमाण का है मामला

फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फ़ॉर सोशल जस्टिस के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन  ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विकास गुप्ता व डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर  से दिल्ली यूनिवर्सिटी व उससे संबद्ध कॉलेजों और विभागों में शैक्षिक सत्र–2020–21 , 2021 – 22 व 2022–23 में  अंडरग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स, डिप्लोमा कोर्स, सर्टिफ़िकेट कोर्स के अलावा एमफिल और पीएचडी जैसे कोर्सिज में एडमिशन लिए छात्रों के जाति प्रमाण पत्रों की जांच  कराने की मांग की है ।
इस वर्ष अंडरग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सिज में एडमिशन 31 दिसम्बर 2022 तक हुए है । उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि वह जाति प्रमाण पत्रों की जांच करने संबंधी कॉलेज  प्रिंसिपलों को सर्कुलर जारी करे और एक महीने के अंदर इनकी जांच हो । उन्होंने बताया है कि  जिन छात्रों ने गत वर्ष कॉलेजों में ऑन लाइन एडमिशन लिया था बहुत से कॉलेजों ने अभी तक उनकी फोरेंसिक लैब में जांच व संबंधित अधिकारियों को एससी, एसटी और ओबीसी कोटे के जाति प्रमाण पत्रों की जांच नहीं कराई है।
उन्होंने आगामी शैक्षिक सत्र –2023–24 के आरंभ होने से पूर्व जाति प्रमाण पत्रों की जांच की मांग दोहराई।  डॉ. सुमन ने बताया है कि जाति प्रमाण पत्रों की जांच की मांग  इसलिए की जा रही है कि देखने में आया है कि पिछले कई वर्षों से फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर छात्र एडमिशन पा जाते हैं और जो वास्तविक रूप से एडमिशन पाने के हकदार छात्र उससे वंचित रह जाते हैं। डॉ.  सुमन ने यह भी बताया है कि गत वर्ष  जिन कोर्सो में छात्रों ने ऑन लाइन आवेदन किया था । ऑन लाइन अप्लाई करने के बाद एडमिशन लिस्ट में छात्रों के मार्क्स के आधार पर , उसने ऑन लाइन ही कॉलेज में एडमिशन ले लिया ।
जबकि ऑन लाइन अप्लाई करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी /संबंधित कॉलेज एडमिशन प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात जाति प्रमाण पत्रों की जांच कराने के लिए फोरेंसिक लैब और संबंधित अधिकारियों के पास जांच कराने के लिए भेजा जाता है लेकिन कोरोना महामारी के चलते जाति प्रमाण पत्रों की जांच नहीं हो पाई है । उन्होंने बताया है कि 2012 से पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी का स्पेशल सेल एससी, एसटी और ओबीसी कोटे के जाति प्रमाण पत्रों की जांच कराता था लेकिन अब डीयू से केंद्रीयकृत प्रवेश प्रणाली समाप्त होने पर कॉलेजों की जिम्मेदारी है । डॉ. सुमन ने बताया है कि पिछले कई सालों से देखने में आया है कि कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी कोटे के फर्जी जाति प्रमाण पत्र पाएं गए।
वह भी तभी संभव हो पाया कि जब संदेह हुआ कि इन कॉलेजों के जाति प्रमाण पत्रों की जांच हो,और फर्जी जाति प्रमाण पत्र पाएं गए बाद में उनका एडमिशन रदद् कर दिया गया और कुछ दंड नहीं दिया गया। उनका कहना है कि वर्ष –2020–21 में छात्र फिजिकली कॉलेज आया ही नहीं जिससे उसके जाति प्रमाण पत्रों की जांच की जा सके ,उसने ऑन लाइन एडमिशन लेते समय जाति प्रमाण पत्र की अपनी फोटो कॉपी कॉलेज/विश्वविद्यालय को भेजी । उन्होंने ऑनलाइन एडमिशन पाए छात्रों के जाति प्रमाण पत्रों की जांच कराने की मांग दोहराई है ।

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