Doorstep Delivery Delhi : घर-घर राशन योजना पर आमने-सामने मोदी सरकार और केजरीवाल सरकार

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार की घर-घर तक राशन (Doorstep Delivery Delhi) पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना पर केंद्र सरकार ने लगाई रोक। बता दें कि यह योजना एक हफ्ते बाद लागू होनी थी। दिल्ली सरकार अगले हफ्ते से इस योजना के तहत 72 लाख लोगों के घर तक राशन पहुंचाने की तैयारियों में जुटी थी। घर घर राशन (Doorstep Delivery Delhi) पर केंद्र सरकार द्वारा रोक लगाए जाने की खबरों के बीच केन्द्र सरकार की ओर से अपने पक्ष में कहा गया है कि उसने दिल्ली सरकार को राशन वितरित करने से रोका नहीं है। इसके साथ ही केंद्र ने दिल्ली सरकार पर अखिल भारतीय योजना को बाधित करने को लेकर सवाल भी खड़ा किया।
गौरतलब है कि इससे पहले राशन योजना के नाम को लेकर भी केंद्र ने आपत्ति जताते हुए था कि यह योजना केंद्र की नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत आती है। इसमें कोई भी बदलाव केवल संसद कर सकती है, न कि राज्य। इसलिए दिल्ली सरकार इस योजना का न तो नाम बदल सकती है और न ही इसको किसी और के साथ जोड़ सकती है। इसके बाद दिल्ली सरकार ने योजना का नाम ‘मुख्यमंत्री घर-घर राशन’ योजना से बदलकर ‘घर-घर राशन’ योजना रख दिया था। जिसके बाद दिल्ली सरकार ने शनिवार को दावा किया कि केंद्र ने राष्ट्रीय राजधानी में 72 लाख राशन कार्ड धारकों को लाभान्वित करने वाली उसकी महत्वाकांक्षी राशन योजना को ‘रोक दिया’ और उसने इस कदम को ‘राजनीति से प्रेरित’’ बताया। इससे पहले यह योजना 25 मार्च से दिल्ली में शुरू होने वाली थी।

दिल्ली के खाद्य मंत्री इमरान हुसैन ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार द्वारा 2018 से केंद्र को छह से अधिक पत्र भेजे गए थे जिसमें उन्हें योजना के बारे में सूचित किया गया था। एक अदालती मामले का हवाला देते हुए, इस तरह की क्रांतिकारी योजना को रोका जाना यह स्पष्ट करता है कि यह फैसला राजनीति से प्रेरित है। हालांकि कानून के मुताबिक इस तरह की योजना शुरू करने के लिए किसी मंजूरी की जरूरत नहीं है। 
राज्यपाल ने पुनर्विचार के लिए लौटाया

मिली जानकारी के मुताबिक, निजी विक्रेताओं के माध्यम से लागू की जाने वाली योजना की अधिसूचना से संबंधित फाइल को उपराज्यपाल ने पुनर्विचार के लिए मुख्यमंत्री को लौटा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उपराज्यपाल ने प्रस्ताव को खारिज नहीं किया है। उन्होने जिस तरह 20 मार्च, 2018 को सलाह दी गई थी उसी तरह फिर से उन्होंने यही सलाह दी है….चूंकि प्रस्ताव वितरण के तरीके को बदलने का प्रयास करता है, इसलिए इसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 की धारा 12 (2) (एच) के अनुसार अनिवार्य रूप से केंद्र की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता होगी।

सीएमओ ने बयान में कहा कि दिल्ली सरकार एक से दो दिनों के भीतर राशन योजना शुरू करने के लिए तैयार थी, जिससे 72 लाख गरीब लाभार्थियों को लाभ होगा। उन्होंने दावा की केंद्र के सभी सुझावों को स्वीकार करने के बाद, दिल्ली सरकार ने 24 मई को उपराज्यपाल को अंतिम मंजूरी और योजना को तत्काल लागू करने के लिए फाइल भेजी थी, जिसे उन्होंने योजना को ‘खारिज’ करते हुए वापस कर दिया। सीएमओ ने एक बयान में दावा किया कि उपराज्यपाल ने 2 जून को यह कहते हुए फाइल वापस कर दी कि योजना को लागू नहीं किया जा सकता है। केजरीवाल ने बताया उपराज्यपाल ने दो कारणों का हवाला देते हुए राशन को घर-घर तक पहुंचाने संबंधी योजना के कार्यान्वयन के लिए फाइल को खारिज कर दिया है – एक तो केंद्र ने अभी तक योजना को मंजूरी नहीं दी है और दूसरा अदालत में मामला चल रहा है।

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