क्या आप जानते है राष्ट्रगान से जुड़े कुछ रोचक तथ्य?? अगर नही तो पढ़िए पूरी खबर

आजादी का अमृत महोत्सव भारत की आजादी की 75वां वर्ष मनाने के उपलक्ष्य में पूरे देश में मनाया जा रहा है। इस महोत्सव के तहत जन भागीदारी बढ़ाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संस्कृति मंत्रालय द्वारा इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए राष्ट्रगान से जुड़ी ऐसी ही एक अनूठी पहल शुरू की गई है ताकि सभी भारतीयों में गर्व और एकता की भावना भरी जाए।

इसमें लोगों को राष्ट्रगान गाने और वेबसाइट www.Rashtragan.in पर वीडियो अपलोड करने के लिए आमंत्रित किया गया है। बता दें राष्ट्रगान का संकलन 15 अगस्त, 2021 को लाइव दिखाया जाएगा। ऐसे मे आज हम आपको बताएंगे राष्ट्रगान से जुड़े कुछ रोचक तथ्य जिसके बारे में शायद ही आप मे से किसी को पता होगा। दरअसल यह राष्ट्रप्रेम का प्रतीक माना जाता है। राष्ट्रगान गाने और बजाने को लेकर कुछ खास नियम बनाए गए हैं।

राष्ट्रगान को अगर गाना या बजाना है तो उसके गौरव का ध्यान रखना सर्वोपरि है। इसको लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं जिनका अनुपालन करना जरूरी होता है। अगर कोई व्यक्ति इन नियमों की अवहेलना करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। जिसमे से एक नियम यह भी है कि फिल्म के किसी हिस्से में अगर राष्ट्रगान बजता है तो खड़ा होना या गाना जरूरी होता है। आइए अब इन सब से पहले जानते है राष्ट्रगान के बोल क्या है…

राष्ट्रगान के बोल कुछ इस प्रकार है:-भारत का राष्‍ट्रगानजन-

गण-मन अधिनायक जय हे भारत भाग्‍य विधाता पंजाब-सिंधु-गुजरात-मराठा द्राविड़-उत्‍कल-बंग विंध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्‍छल जलधि तरंग तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मांगे गाहे तव जय-गाथा जन-गण-मंगलदायक जय हे भारत भाग्‍य विधाता जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे

राष्ट्रगान के कुछ रोचक तथ्य
स्वर्गीय कवि रविंद्रनाथ टैगोर ने ‘जन गण मन’ के नाम से जिस संगीत की रचना की थी, वह रचना ही भारत का राष्ट्रगान है। दरअसल, रविंद्रनाथ टैगोर ने 1911 में एक कविता लिखी जो 5 पदों में थी। इस कविता के पहले पद को ही राष्ट्रगान के रूप में लिया गया। टैगोर ने इस कविता को बंगाली में लिखा था जिसमें संस्कृत शब्दों का भी प्रयोग किया गया। राष्ट्रगान को पहली बार 27 दिसंबर, 1911 को कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था।

24 जनवरी 1950 को रविंद्र नाथ के लिखे इस संगीत को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रगान के तौर पर अपना लिया गया। राष्ट्रगान के बोल और धुन को रविंद्रनाथ टैगोर ने आंध्र प्रदेश के मदनापल्ली में तैयार की थी। पूरा राष्ट्रगान गाने में 52 सेकेंड का समय लगता है। वही पहली और अंतिम पंक्ति गाने में 20 सेकेंड का समय लगता है। देश आजाद होने के बाद 14 अगस्त 1947 की रात पहली बार संविधान सभा की बैठक हुई और अंत में इस सभा का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

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