डिप्रेशन की दवा से कोविड को गंभीर होने से रोका जा सकता है: रिसर्च

अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने अपनी हालिया रिसर्च में पाया कि डिप्रेशन की दवा से कोविड को गंभीर होने से रोका जा सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है, डिप्रेशन में दी जाने वाली दवा ‘फ्लूवोक्सामाइन’ कोरोना के मरीजों में साइटोकाइन स्टॉर्म के असर को कम करती है। आसान भाषा में कहें तो साइटोकाइन स्टॉर्म वो स्थिति है जब शरीर को रोगों से बचाने वाला इम्यून सिस्टम ही नुकसान पहुंचाने लगता है।

अमेरिका, कनाडा और ब्राजील के वैज्ञानिकों ने मिलकर कोरोना के 1,472 मरीजों पर स्टडी की। इन मरीजों को डिप्रेशन की दवा ‘फ्लूवोक्सामाइन’ दी गई। दवा लेने वाले संक्रमित मरीजों में इम्यून सिस्टम के बेकाबू होने के मामलों में 30 फीसदी की कमी आई। शोधकर्ताओं का कहना है, 50 से अधिक उम्र वालों में कोरोना के गंभीर होने का खतरा ज्यादा रहता है। फ्लूवोक्सामाइन लेने वाले वाले मरीजों को इमरजेंसी में 6 घंटे से भी कम समय तक रहना पड़ा और ऐसे मरीजों के हॉस्पिटल में भर्ती होने का खतरा भी कम पाया गया।

रिसर्च के नतीजे बताते हैं, कोविड होने पर फ्लूवोक्सामाइन दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह दवा दुनिया के हर हिस्से में सस्ते दामों पर उपलब्ध है। ट्रायल में शामिल वैज्ञानिकों का मानना है, इन बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली एंटी-इंफ्लेमेट्री दवाएं संक्रमण के बाद बेकाबू होने वाले इम्यून सिस्टम को कंट्रोल कर सकती हैं। इन दवाओं के जरिए कोविड का सस्ता और असरदार इलाज ढूंढने की कोशिश जारी है।

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