विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग: गौरवमयी 50 वर्ष

नवनीत कुमार गुप्ता
आधुनिक युग में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का हर व्यक्ति पर प्रभाव पड़ रहा है। तकनीक के बिना जीवन के कल्पना अब संभव नहीं हो पाती। ऐसे में उन संस्थाओं के योगदान का चित्रण करना आवश्यक है जो देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास में अहम योगदान दे रहे हैं। देश में विज्ञान, शोध, नवाचार और अनुसंधान को प्रमुख रूप से विकसित और प्रसारित करने में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग यानी डीएसटी का अहम योगदान है।

भारत सरकार द्वारा साल 1971 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की स्थापना की गयी । इस वर्ष यह विभाग अपनी स्थापना की स्वर्ण जयंती मना रहा है। पचास साल के इस सफ़र में इस विभाग ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नए क्षेत्रों को बढ़ावा दिया दिया है। चाहे क्वांटम विज्ञान, नैनोप्रौद्योगिकी की बात हो या सायबर फिजिकल सिस्टम की, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने हर क्षेत्र में अभिनव पहल की है।

असल में, डीएसटी ने विज्ञान के हर क्षेत्र में अनुसंधान और विकास का इकोसिस्टम विकसित किया है। देश में विज्ञान और तकनीक के हर विषय से संबंधित डीएसटी के स्वायत्तशासी संस्थान मौजूद हैं। ऐसे संस्थानों के प्रयासों का ही
परिणाम है कि आज अनेक क्षेत्रों में हम विकसित देशों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं । विभाग द्वारा अंतःविषय साइबर-भौतिक प्रणालियों पर एक 3660 करोड़ का राष्ट्रीय मिशन लॉन्च किया है जिसके द्वारा रोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध होने की संभावनाएं हैं।

डीएसटी द्वारा आधुनिक विज्ञान के साथ ही परंपरागत तकनीकों और पद्धतियों पर शोध कार्य को बढ़ावा दिया जा रहा है। डीएसटी ने पहली बार योग और ध्यान पर आधारित कार्यक्रम सत्यम की भी शुरुआत की है। विभाग अन्य मंत्रालयों और विभागों के साथ भी देश के विकास के लिए कार्यरत है। अंतर-मंत्रालयी सहयोग के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ इम्पैक्ट रिसर्च इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी यानी इन​प्रिंट की शुरूआत की गयी है।

रेलवे के साथ अत्याधुनिक कोच फैक्ट्री के लिए साइबर फिज़िकल इंडस्ट्री 4.0 का क्रियान्यवन किया जा रहा है। विभाग के प्रयासों से मिशन इनोवेशन के तहत ऊर्जा, जल, जलवायु परिवर्तन अनुसंधान कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है। देश में शोध के वातावरण को पोषित करने के लिए ब्रेन ड्रेन रोकने के लिए ओवरसीज़- डॉक्टरेट फेलोशिप के अवसरों में दोगुनी बढ़ोत्तरी की गई है। देश में सर्वश्रेष्ठ वैश्विक विज्ञान और वैज्ञानिकों को लाने के लिए विजिटिंग एडवांसेड् ज्यांट रिसर्च फैकल्टी योजना यानी वज्र आरंभ की गयी है।

इस योजना द्वारा अनेक विख्यात वैज्ञानिक एवं अकादमिक भारतीय शोध संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में कार्य करने लगे जिसका लाभ संस्थान और वहां कार्यरत शोधार्थियों को भी मिला। महिलाएं जनबल काएक महत्वपूर्ण भाग है, विशेष रूप से विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में। हालांकि, बड़ी संख्या में महिलाएं विभिन्न परिस्थितियों के कारण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी गतिविधियों को छोड़ देती हैं। ऐसा अधिकतर ‘‘ब्रेक इन करियर” मातृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण आता है।

ऐसे मुद्दों को हल करने के लिए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने ‘‘महिला वैज्ञानिक योजना” आरंभ की है। आधी आबादी को विज्ञान के क्षेत्र से जोड़ने के लिए नॉलेज इंवॉल्वमेंट इन रिसर्च एडवांसमेंट थ्रो नर्चरिंग यानी किरण योजना आरंभ की गयी। मूल रूप से इस पहल का उद्देश्य 27-57 वर्ष आयु वर्ग के बीच की महिला वैज्ञानिकों एवं प्रौद्योगिकीविदों को अवसर प्रदान करना है जिन्होंने अपने करियर से ब्रेक ले लिया था लेकिन वे मुख्यधारा में
लौटना चाहती हैं।

विभाग ने इस उद्यम के जरिए,महिलाओं को वैज्ञानिक प्रोफेशन में एक मजबूत आधार देने, मुख्यधारा में पुनःप्रवेश करने में उनकी सहायता करने के संयुक्त प्रयास किए गए। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लैंगिक समानता लाने के लिए किरण योजना काफी सराहनीय रही। युवा महिलाओं वैज्ञानिकों के लिए विज्ञान ज्योति परियोजना आरंभ की गयी है। यह एक नई पहल है जो लड़कियों को विज्ञान में रुचि लेने और इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। इस कार्यक्रम को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा दिसंबर 2019 में लॉन्च किया गया था।

यह उन मेधावी लड़कियों के लिए शुरू किया गया था जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित यानी स्टेम में पढ़ाई करना चाहती हैं। यह कार्यक्रम वर्तमान में 50 जवाहर नवोदय विद्यालय में सफलतापूर्वक चल रहा है। वर्ष 2021-22 में इसका विस्तार 50 और जवाहर नवोदय विद्यालय तक किया गया है। नवाचार और स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय प्रोत्साहन कार्यक्रम नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हारनेसिंग इनोवेशंस यानी निधि की शुरूआत की।

इस कार्यक्रम के तहत अन्वेषकों एवं उद्यमियों के लिये इन्क्यूबेटर्स, सीड फंड, एक्सेलेरेटर्स और ’प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट’ अनुदान की स्थापना के कार्यक्रम शुरू किये गए हैं। निधि में 8 घटक होते हैं जो अपने विचार से बाज़ार चरण तक किसी स्टार्टअप को उसके प्रत्येक चरण में समर्थन करते हैं। निधि द्वारा 28,000 स्थानीय नवाचारों को समर्थन और 2000 स्टार्टअप को तैयार किया गया है। स्कूली छात्रों में रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए मानक- इंस्पायर कार्यक्रम की शुरूआत की गई।

जिसके माध्यम से देश भर के लाखों छात्रों को ​वैज्ञानिक विधि से परिचित कराया जा रहा है। विज्ञान के प्रचार—प्रसार के लिए अनेक कार्यक्रम आरंभ किए गए। इनमें 2019 में ओटीटी चैनल इंडिया साइंस और दूरदर्शन पर एक घंटे का कार्यक्रम लॉन्च किया गया। इंडिया साइंस देश का पहला विज्ञान चैनल है जो ओटीटी पर उपलब्ध है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा शुरू की गई ‘अवसर’ (ऑग्मेंटिंग राइटिंग स्किल्स फॉर आर्टिकुलेटिंग रिसर्च) कार्यक्रम के द्वारा समाज को वैज्ञानिक शोध कार्यों के महत्व से परिचित कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

अखिल भारतीय प्रतियोगिता ‘अवसर’ के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े विभिन्न विषयों में डॉक्टोरल या पोस्ट डॉक्टोरल शोधार्थियों से उनके शोध विषय पर आधारित आलेख आमंत्रित किए जाते हैं और चयनित किए गए सर्वश्रेष्ठ आलेखों को पुरस्कृत किया जाता है। अवसर योजना का प्रमुख लक्ष्य विज्ञान शोधार्थियों को विज्ञान संचारक बनने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे वैज्ञानिक शोध की पेचीदगियों को सरल भाषा में जनसामान्य तक पहुँचा सकें।

वैज्ञानिक शोध के महत्व का आकलन उसकी सामाजिक उपयोगिता के द्वारा समझा जा सकता है। वैज्ञानिक कार्य को आम जनता तक पहुंचाना भी आवश्यक है। वैज्ञानिकों द्वारा उपयोग की जाने वाली तकनीकी भाषा में, आम जन के लिए ऐसे शोध कार्यों के महत्व को समझ पाना आसान नहीं होता है। कोविड महामारी के दौरान कोरोना के खिलाफ़ जंग में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने कई सफ़लताएं हासिल की हैं भारत के वैज्ञानिक संस्थानों और वैज्ञानिकों ने इस लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई है।

सेंटर फ़ॉर ऑगमेंटिंग वॉर विद् कोविड-19 हेल्थ क्राइसिस यानी कवच की शुरूआत की गई है। उन्नत फ़ेस मास्क से लेकर स्वदेशी चिकित्सा उपकरण और नैदानिक परीक्षण तकनीक विकसित की गयी है। इन लागत प्रभावी समाधानों
के बल पर ही देश कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ खड़ा हो सका है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस महामारी के दौरान महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग मेक इन इंडिया को बढ़ावा देकर राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतन प्रयासरत है। विभाग के विभिन्न परियोजनाएं देश को सशक्त बनाने के आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अग्रसर हैं।

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