दिल्ली हाईकोर्ट: व्हाट्सएप को लगा तगड़ा झटका, कोर्ट ने CCI के नोटिस पर रोक लगाने से किया इंकार

नई निजता नीति की जांच के सिलसिले में फेसबुक और मैसेजिंग ऐप से कुछ जानकारी मांगने वाले भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) के नोटिस पर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने बुधवार को रोक लगाने से साफ इंकार कर दिया। न्यायमूर्ति अनूप जे. भंभानी और जसमीत सिंह की अवकाशकालीन पीठ ने कहा, “हम इस स्तर पर 4 जून, 2021 के आक्षेपित नोटिस के संचालन पर रोक लगाना उचित नहीं समझते हैं।” 

गौरतलब हो की फेसबुक और व्हाट्सएप ने अप्रैल में एकल न्यायाधीश द्वारा जांच के खिलाफ उनकी याचिका खारिज करने के आदेश को चुनौती दी थी। सोमवार को अपने नए आवेदनों में, कंपनियों ने उच्च न्यायालय से सीसीआई के 4 जून के नोटिस पर रोक लगाने का आग्रह किया था, जिसमें उसने इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप की नई गोपनीयता नीति में जांच के दौरान कुछ जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा था।

व्हाट्सएप और फेसबुक का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी ने नोटिस पर इस आधार पर रोक लगाने की मांग की थी कि जवाब देने की आखिरी तारीख सोमवार को ही थी। साल्वे ने प्रस्तुत किया था कि गोपनीयता नीति पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती के अधीन है और दिल्ली उच्च न्यायालय और एंटी-ट्रस्ट नियामक को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने बुधवार को अपने फैसले के दौरान न्यायमूर्ति अनूप जे. भंभानी और जसमीत सिंह की अवकाशकालीन पीठ ने लेखी से पूछा कि क्या वह यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि अब से 9 जुलाई तक कानूनी चुनौतियों के लंबित रहने के दौरान सीसीआई (CCI) कोई त्वरित कार्रवाई नहीं करेगा। इस पर लेखी ने पीठ से कहा कि जब तक 9 जुलाई तक रिपोर्ट जमा नहीं हो जाती तब तक के लिए व्हाट्सएप को आवश्यक जानकारी जमा करने का निर्देश दें।

इसके बाद जनरल अमन लेखी ने दलील दी कि अधिनियम के अनुसार, आदेश के एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी की जानी है और व्हाट्सएप और फेसबुक के पास डिवीजन बेंच के समक्ष जांच पर रोक लगाने के लिए अपील करने के चार अवसर थे, लेकिन अपील नहीं की गई।

बता दें यह मामला एकल पीठ के आदेश के खिलाफ फेसबुक और व्हाट्सएप की अपीलों से संबंधित है। एकल पीठ ने व्हाट्सएप की नई निजता नीति की जांच का सीसीआई द्वारा आदेश देने के खिलाफ उनकी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय ने इससे पहले अपीलों पर नोटिस जारी किया था और केंद्र से जवाब देने को कहा था। 

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