दिल्ली: प्रधानमंत्री जन धन योजना के नाम पर फर्जीवाड़ा, गरीब परिवार के नाम पर 100 करोड़ से ज्यादा के ट्रांजेक्शन्स

नरेला। जालसाजों ने अपनी काली करतूत को अंजाम देने के लिये देश के प्रधानमंत्री मोदी के नाम तक को भी नहीं छोड़ा। ऐसा ही एक जालसाजी का मामला दिल्ली के नरेला से सामने आया है जहां गरीब लोगों को प्रधान मंत्री की जन धन योजना में खता खुलवाने और पांच हज़ार रुपये का लालच देकर उनकी आईडी से उनके ही नाम पर फ़र्ज़ी कंपनियां खोलकर करोड़ों रुपयों की ट्रांजेक्शन हो रही है। मामले का खुलासा तब हुआ जब एक गरीब परिवार के तीन सदस्यों का खाते खोलकर करोड़ों के ट्रांजेक्शन हो गए। परिवार के मोबाइल पर मैसेज आया तो वे हैरान हो गए। वे बैंक गए तो पता लगा की उनके खाते में सालभर में करोड़ों का लेनदेन हो रहा था। नरेला की पंजाबी कॉलोनी में रहने वाली मंजू देवी और दो बेटे छोटा मोटा रोजगार कर अपना भरण पोषण करते है। कुछ दिन पहले अचानक उनके खाते में साढ़े छह लाख रूपए का मैसेज आया। उनके किसी साथी ने यह पढ़ा तो वह हैरान हो गया और उसे बताया की उसके खाते में पैसे आएं है। वह गरीब जब बैंक पहुंचा और पता किया तो हैरान हो गया उसके नाम पर चालू खाता खुला है और उसके करोड़ों रुपये की ट्रांजेक्शन हो रही थी। उसके समझ नहीं आया कि यह पैसे कौन डाल रहा है और कौन निकाल रहा है।

परिवार को नरेला अनाज मंडी में आढ़त का काम करने वाले पवन सिंघल नाम के शख्स पर शक हुआ। इस शख्स ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की जन धन योजना के नाम पर खाता खुलवाने के लिए आधार कार्ड,पैन कार्ड आदि पेपर लिए थे। साथ ही यह भी बताया की प्रधान मंत्री के नयी स्किम में हर गरीब को 5000 रुपये में मिलेंगे। लालच में आकर इस पूरे परिवार ने खाता खुलवाने के लिए पेपर दिए और बैंक जाकर आवेदन पर सिग्नेचर भी किये थे। लेकिन अब पता लग रहा है कि इस जालसाजी गैंग ने इस परिवार के मंजू, गगन,और मनोज के नाम पर कई फ़र्ज़ी कंपनियों के बैंक अकाउंट खोल रखे है और पिछले एक साल में ही करीब 100 करोड़ रुपयों से ज्यादा की ट्रांजेक्शन हो चुकी है। इस घटना के सामने आने के बाद नरेला में वे तमाम लोग डरे हुए है जो इनके झांसे में आकर अपनी आईडी पैन नंबर दे चुकें है। सूत्रों के अनुसार ऐसे करीब 50 लोग हो सकतें है जिनके नाम पर इस तरह की धोखाधड़ी कर सैल कंपनियां चल रही है जिन्हें उनकी जानकारी तक नहीं है।

मामला नरेला थाना पुलिस में है लेकिन पुलिस यह कहकर पल्ला झाड़ रही है कि इसकी जांच आयकर विभाग बड़े स्तर पर कर रहा है। खबर है की इस मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। नरेला के कुछ स्थानीय पत्रकारों को धमकाया जा रहा है तो कुछ को मैनेज किया जा रहा है। हैरत की बात है की नरेला थाना पुलिस मंजू देवी के परिवार के साथ हुए इस फर्ज़ीवाड़े को धोखाधड़ी का मामला नहीं मान रही है। पुलिस का कहना है की उसने मामले की जानकारी आयकर विभाग को दे दी है। इस मामले में नरेला की सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। इतना बड़ा फर्जीवाड़ा बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। 

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