सीएसआईआर ने नई COVID-19 परीक्षण तकनीक के लिए की जानकारी हस्तांतरित

नई दिल्ली, 14 सितंबर (इंडिया साइंस वायर): कोविड-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक उल्लेखनीय कदम उठाते हुए, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के तहत नागपुर स्थित राष्ट्रीय पर्यावरणगत इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) ने स्वदेशी रूप से विकसित सेलाइन गार्गल (नमक घोल के गरारे) की जानकारी हस्तांतरित कर दी है।

आरटी-पीसीआर तकनीक पर आधारित यह मानक नया परीक्षण सरल, तेज, लागत प्रभावी, रोगी के अनुकूल और आरामदायक है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह केवल तीन घंटे के भीतर परीक्षा परिणाम प्रदान करेगा और यह ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है क्योंकि इसके लिए न्यूनतम बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। यह जानकारी गैर-अनन्य आधार पर केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) को हस्तांतरित कर दी गई है।

यह नवाचार को निजी और सरकारी क्षेत्रों में सभी सक्षम पार्टियों के लिए व्यावसायीकरण और लाइसेंस प्राप्त करने में भी सक्षम है। यह तकनीक गैर-आक्रामक है और बहुत सरल है। रोगी को केवल वैज्ञानिकों द्वारा विकसित घोल से गरारे करने होते हैं और उसे खारे घोल से भरी एक ट्यूब के अंदर कुल्ला करना होता है। संग्रह ट्यूब में यह नमूना कमरे के तापमान पर एक विशेष बफर समाधान में रखा जाएगा। इस घोल को गर्म करने पर एक आरएनए टेम्प्लेट तैयार किया जाएगा और इसे आरटी-पीसीआर परीक्षण के लिए आगे संसाधित किया जाएगा।

डॉ कृष्णा खैरनार (प्रौद्योगिकी के प्रमुख आविष्कारक) के अनुसार, “नमूना एकत्र करने और संसाधित करने की नई विधि आरएनए निष्कर्षण की अन्यथा महंगी ढांचागत आवश्यकता पर बचत को सक्षम बनाती है। लोग अपना परीक्षण भी कर सकते हैं। यह विधि स्व-नमूनाकरण की अनुमति देती है।” इस तकनीक को ‘सलाइन गार्गल आरटी-पीसीआर तकनीक’ का नाम दिया गया है। लाइसेंसधारी व्यावसायिक उत्पादन के लिए आसानी से प्रयोग होने योग्य कॉम्पैक्ट किट के रूप में विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करेंगे।

CSIR-NEERI ने मौजूदा महामारी की स्थिति और COVID-19 की संभावित तीसरी लहर के आलोक में नॉलेज ट्रांसफर प्रक्रिया को तेजी से ट्रैक किया था। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में शनिवार को मानक संचालन प्रक्रिया और सेलाइन गार्गल आरटी-पीसीआर तकनीक का औपचारिक हस्तांतरण किया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए, श्री गडकरी ने कहा, “सलाइन गार्गल आरटी-पीसीआर पद्धति को पूरे देश में लागू करने की आवश्यकता है, खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों जैसे संसाधन-गरीब क्षेत्रों में। इसका परिणाम तेज और अधिक नागरिक-अनुकूल परीक्षण होगा और महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई को मजबूत करेगा।” इस अवसर पर निदेशक, सीएसआईआर-नीरी, डॉ. श्रीवरी चंद्रशेखर, अध्यक्ष, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, सीएसआईआर-नीरी, डॉ. अतुल वैद्य और डॉ. कृष्णा खैरनार भी उपस्थित थे।

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