उत्तर प्रदेश में फार्मा क्लस्टर के विकास में सहयोग हेतु प्रतिबद्ध सीएसआईआर-सीडीआरआई

नवनीत कुमार गुप्ता : भारत को दवा निर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए देश के वैज्ञानिक संस्थान प्रयासरत है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में फार्मा क्लस्टर के विकास में सहयोग हेतु वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कायरत केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान, लखनऊ (सीएसआइआर-सीडीआरआई) ने एक नई दवा विकसित करने के लिए उत्तर प्रदेश की कंपनी के साथ करार किया ​है। इस करार के तहत सीएसआईआर सीडीआरआई, लखनऊ एवं मार्क लेबोरेटरीज लिमिटेड, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के लिए एक नई सुरक्षित दवा विकसित करने हेतु एक साथ कार्य करेंगे।

उत्तर प्रदेश में फार्मा क्लस्टर के विकास में सहयोग हेतु प्रतिबद्ध सीडीआरआई, लखनऊ ने उत्तर प्रदेश आधारित एक युवा एवं प्रगतिशील कंपनी, मार्क लेबोरेटरीज प्रा. लिमिटेड, जिसका देश के 13 अन्य राज्यों में भी कारोबार है, को सिंथेटिक यौगिक, S-007-867 आधारित एक महत्वपूर्ण दवा के विकास हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह दवा विशेष रूप से ब्लड कौग्लूशन कैस्केड (रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया) के मोडूलेटर के रूप में एवं कोलेजन प्रेरित प्लेटलेट एकत्रीकरण के अवरोधक के रूप में कोरोनरी और सेरेब्रल धमनी रोगों (हार्ट अटैक एवं स्ट्रोक) के इलाज में मददगार साबित होगी।
संस्थान को दवा के लिए फ़ेज-I नैदानिक (क्लीनिकल) परीक्षण करने की अनुमति प्राप्त हुई है। आर्टेरीयल थ्रोम्बोसिस (धमनी घनास्त्रता), एक गेंभीर जटिलता है जो एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों के कठोर एवं संकीर्ण हो जाने) की वजह से बने घावों पर विकसित होती है जिसके कारण हार्ट अटैक (हृदयघात) और स्ट्रोक (मस्तिष्कघात) होता है। इसलिए, इंट्रावास्कुलर थ्रोम्बोसिस के इलाज हेतु “प्लेटलेट-कोलेजन इंटरैक्शन का निषेध” को एक आशाजनक चिकित्सीय रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

Signing of MoU

सीडीआरआई द्वारा तैयार यौगिक S-007-867, कोलेजन मध्यस्थ प्लेटलेट सक्रियण को रोकता है और उसके बाद COX1 एन्जाइम के सक्रियण के माध्यम से सघन कणिकाओं और थ्रोम्बोक्सेन A2 से एटीपी की रिहाई को कम करता है। इस प्रकार यह प्रभावी रूप से रक्त प्रवाह के वेग को बनाए रखता है और वेस्कुलर ओक्लुजन (आमतौर पर थक्के की वजह से होने वाली रक्त वाहिका की अवरुद्धता) में देरी करता है और हेमोस्टेसिस से समझौता किए बिना थ्रोम्बोजेनेसिस (रक्त के थक्के का गठन) को रोकता है।

कोरोनरी और सेरेब्रल धमनी रोगों के लिए वर्तमान में मौजूदा उपचारों की तुलना में इस दवा में रक्तस्राव का जोखिम कम है। प्रयोगशाला जंतुओं पर हुए प्रयोगों में, इस यौगिक ने न्यूनतम रक्तस्राव की प्रवृत्ति के साथ मौजूदा मानकों की तुलना में बेहतर एंटीथ्रॉम्बोटिक सुरक्षा का प्रदर्शन किया है। संस्थान को दवा के लिए फ़ेज-I नैदानिक (क्लीनिकल) परीक्षण करने की अनुमति प्राप्त हो चुकी है।

कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुई जटिलताओं में रोग निरोध (इलाज) हेतु भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है। इसके अलावा, कोविड-19 बीमारी में, खास तौर पर एआरडीएस वाले गंभीर रोगियों में उच्च डी-डाइमर होता है तथा प्रोथ्रोम्बिन टाइम (पीटी) कम होता है, जो प्रो-थ्रोम्बोटिक अवस्था को दर्शाता है। इसके अलावा इन रोगियों में परिसंचारी न्यूट्रोफिल, इंफ़्लेमेट्रि मध्यस्थ/साइटोकाइन, सीआरपी एवं लिम्फोसाइटोपेनिया की संख्या अधिक होती है।

इसलिए, इस अवस्था में प्लेटलेट प्रतिक्रियाशीलता और न्यूट्रोफिल सक्रियण को कम करने वाली दवाएं फायदेमंद हो सकती हैं। इन्हीं सब मानदंडों/तथ्यों (उच्च सुरक्षा और रक्तस्राव अवधि पर निम्न प्रभाव) के आधार पर इस दवा का कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुई जटिलताओं में रोग निरोध (इलाज) हेतु भी एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा सकता है।
इस अवसर पर, प्रो. तपस के. कुंडू, निदेशक (सीडीआरआई) ने कहा, “सीएसआईआर-सीडीआरआई, जो कि देश का प्रमुख औषधि विकास एवं अनुसंधान संस्थान है, के लिए यह एक गौरवशाली क्षण है कि हम “सभी के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवा (एफोर्डेबल हेल्थकेयर फॉर ऑल)” की हमारी प्रतिबद्धता का निर्वाहन करते हुए अपने ही संस्थान में निर्मित एक नई औषधि को आगे विकसित करने के लिए फ़ार्मा कंपनी को लाइसेंस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें आशा है कि मानवता को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने के लिए यह दवा शीघ्र ही बाजार में उपलब्ध हो जाएगी।”
उन्होंने आगे उल्लेख किया कि, “जैसा कि माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्ष वर्धन, सीएसआईआर महानिदेशक, डॉ शेखर सी. मांडे और उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ के व्यापक दृष्टिकोण के अनुसार, फ़ार्मा उद्योगों एवं शोध संस्थानों की साझेदारी उत्तर प्रदेश में फार्मा क्लस्टर के विकास के लिए निश्चित रूप से बहुत फायदेमंद होगी और इनके सामूहिक प्रयासों से इस दिशा में अनेक नए रास्ते खुलेंगे। उनके इसी विजन के अनुरूप यह एक छोटा सा प्रयास है।”
इसी तरह, मार्क लेबोरेटरीज के चेयरमैन श्री प्रेम किशोर ने कहा, “सीएसआईआर-सीडीआरआई के साथ मार्क का जुड़ाव दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगा और वे इस यौगिक को आगे ले जाने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे ताकि यह जल्द ही सभी के लिए उपलब्ध हो सके।

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