कांग्रेस ने उठाए वित्त मंत्री पर सवाल कहा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अर्थव्यवस्था की समझ नहीं

कांग्रेस ने वित्त मंत्री की ओर से 1.1 लाख करोड़ रुपये की लोन गारंटी योजना के ऐलान पर उन पर निशाना साधते हुए कहा की, वित्त मंत्री को अर्थव्यवस्था की समझ नहीं है क्योंकि उन्होंने मांग बढ़ाने एवं लोगों की सीधी मदद करने की बजाय फिर से ‘कर्ज की खुराक’ दी है। पार्टी ने दावा किया की कर्ज की खुराक के मॉडल का परिणाम सबको पता चल गया है। लोगों को कर्ज की खुराक की नहीं बल्कि मदद की जरूरत है। लोग उम्मीद कर रहे थे कि आप लोगों की आर्थिक मदद करेंगी। आप लोगों की जेब में पैसा डालने की बात करेंगी।

दरअसल, सोमवार दोपहर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोविड महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को गति देने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे में सुधार के लिये 1.1 लाख करोड़ रुपये की ऋण गारंटी योजना समेत विभिन्न उपायों की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए आपातकाल ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के तहत सीमा 50 प्रतिशत बढ़ाकर 4.5 लाख करोड़ रुपये किए जाने का ऐलान किया।

वित्त मंत्री के इन्ही ऐलानो पर कांग्रेस प्रवक्ता वल्लभ ने आरोप लगाया, साल 2020 में घोषित कर्ज की खुराक वाले 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की तरह आज फिर से गलती की गई। लगता है कि वित्त मंत्री जी को अर्थव्यवस्था की समझ नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि ये कौन लोग हैं जो वित्त मंत्री को ‘कर्ज की खुराक’ की सलाह दे रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘जीडीपी क्यों गिर रही है? महंगाई दर क्यों बढ़ रही है और इसे कम कैसे किया जाएगा? मांग में लगातार कमी आ रही है, मांग बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? बेरोजगार लोगों की मदद के लिए क्या किया जा रहा है? वित्त मंत्री ने इस बारे में क्यों बात नहीं की।’ 

कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा-
वित्त मंत्री जी के संवाददाता सम्मेलन को मैंने गौर से सुना। आज अर्थव्यवस्था की बुनियादी समस्या- कम जीडीपी, अधिक महंगाई, कम मांग और बढ़ती बेरोजगारी है। लेकिन यही बात वित्त मंत्री जी को समझ नहीं आ रही है। आज फिर उन्होंने इस बारे में कोई बात नहीं की। कर्ज की खुराक के मॉडल का परिणाम सबको पता चल गया है। लोगों को कर्ज की खुराक की नहीं बल्कि मदद की जरूरत है।

लोग उम्मीद कर रहे थे कि आप लोगों की आर्थिक मदद करेंगी। आप लोगों की जेब में पैसा डालने की बात करेंगी। साल 2020 में घोषित कर्ज की खुराक वाले 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की तरह आज फिर से गलती की गई। लगता है कि वित्त मंत्री जी को अर्थव्यवस्था की समझ नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि ये कौन लोग हैं जो वित्त मंत्री को ‘कर्ज की खुराक’ की सलाह दे रहे हैं। ‘जीडीपी क्यों गिर रही है?

महंगाई दर क्यों बढ़ रही है और इसे कम कैसे किया जाएगा? मांग में लगातार कमी आ रही है, मांग बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? बेरोजगार लोगों की मदद के लिए क्या किया जा रहा है? वित्त मंत्री ने इस बारे में क्यों बात नहीं की। मोदी सरकार को समझना होगा कि इन बिंदुओं पर ध्यान दिए बिना अर्थव्यवस्था को पटरी पर नहीं लाया जा सकता। पिछले सात महीनों में हमारे अन्नदाता दिल्ली के निकट बैठे हुए हैं। सरकार के पास समय नहीं है कि वह उनकी बात सुन ले। हमारी मांग है कि सरकार को अहंकार छोड़कर किसानों की बात सुननी चाहिए।

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