‘जब मुल्ले काटे जाएंगे, राम-राम चिलाएंगे’ दिल्ली की सड़को पर लगे सांप्रदायिक नारे, नाराज ओवैसी बोले- इन गुंडों की इतनी हिम्मत…

रविवार, 8 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ के मौके पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अंग्रेजी कानूनों खत्म कर नए कानून बनाए जाने की मांग कर रहे आंदोलनकारियों ने लगाए सांप्रदायिक नारे। प्रदर्शनकारियों ने ‘हिन्दुस्तान में रहना होगा, जय श्रीराम कहना होगा’ और ‘जब मुल्ले काटे जाएंगे, राम-राम चिलाएंगे’ जैसे नारे लगाए। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने अब इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि रविवार को दिल्ली में जंतर मंतर के पास अंग्रेजी कानून हटाओ और एक समान कानून बनाओ नामक एक कार्यक्रम में कथित रूप से भड़काऊ नारे लगाने के बाद कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले की जांच चल रही है। बता दें की इस पूरे कार्यक्रम की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के वकील और पीआईएल मैन के नाम से प्रसिद्ध अश्विनी उपाध्याय ने की थी।
वहीं रविवार को लगाए गए सांप्रदायिक नारे के बीच एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए ट्विटर पर लिखा की, “पिछले जुम्मे को द्वारका में हज हाउस के विरोध में एक ‘महापंचायत’ बुलाई गई। हस्ब-ए-रिवायत, इस पंचायत में भी मुसलमानों के खिलाफ पुर-तशद्दुद् नारे लगाए गए। जंतर-मंतर मोदी के महल से महज 20 मिनट की दूरी पर है, कल वहां “जब मुल्ले काटे जाएंगे…” जैसे घटिया नारे लगाए गए।”
उन्होंने आगे लिखा, “पिछले साल मोदी के मंत्री ने “गोली मारो” का नारा लगाया था और उसके तुरंत बाद उत्तर-पूर्व दिल्ली में मुसलमानों का खुले आम नरसंहार हुआ। ऐसी भीड़ और ऐसे नारे देख कर भारत का मुसलमान सुरक्षित कैसे महसूस कर सकता है?आखिर, इन गुंडों की बढ़ती हिम्मत का राज क्या है? इन्हें पता है कि मोदी सरकार इनके साथ खड़ी है। 24 जुलाई को भारत सरकार ने रासुका (NSA) के तहत दिल्ली पुलिस को किसी भी इंसान को हिरासत में लेने का अधिकार दिया था। फिर भी दिल्ली पुलिस चुप चाप तमाशा देख रही है।”
औवेसी आगे लिखते है की, ऐसे हालात बन चुके हैं कि इंसाफ और कानूनी कार्रवाई की मांग करना भी मजाक बन चुका है। लोकसभा में आज इस पर चर्चा होनी चाहिए, वजीर-ए-दाखला की जवाबदेही होनी चाहिए। मैंने इस मुद्दे पर लोकसभा के रूल्स के मुताबिक स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है।
बता दें कि जंतर- मंतर पर शुरू हुए आंदोलन में 1860 में बने इंडियन पीनल कोड, 1861 में बने पुलिस ऐक्ट, 1863 में बने रिलिजियस एंडोमेंट ऐक्ट और 1872 में बने एविडेंस एक्ट सहित सभी 222 अंग्रेजी कानूनों को खत्म करने की मांग की गई। इसके साथ ही भारत में समान शिक्षा, समान चिकित्सा, समान कर संहिता, समान दंड संहिता, समान श्रम संहिता, समान पुलिस संहिता, समान न्यायिक संहिता, समान नागरिक संहिता, समान धर्मस्थल संहिता और समान जनसंख्या संहिता लागू करने की मांग की।

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