कॉमन एंटीबायोटिक डॉक्सीसायक्लीन टीबी के मरीजों की रिकवरी तेजी से करेगी…

सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के वैज्ञानिकों के एक शोध के अनुसार, कॉमन एंटीबायोटिक डॉक्सीसायक्लीन (common antibiotic doxycycline) टीबी के इलाज में बेहद असरदार साबित हुई है। टीबी के ट्रीटमेंट के बाद यह मरीजों की रिकवरी को भी तेज करने मे मददगार है। यह दावा सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल (National University Hospital) की रिसर्च में किया गया है।

इस रिसर्च के मुताबिक, 30 मरीजों पर हुए ट्रायल में सामने आया है कि एंटीबायोटिक डॉक्सीसायक्लीन (antibiotic doxycycline) को टीबी के ट्रीटमेंट के साथ दिया जाए है तो फेफड़ों को डैमेज होने से बचा सकती है।  शोधकर्ता कैथरीन ऑन्ग (Katherine Ong) का कहना है, टीबी पूरी तरह से खत्म होने के बाद भी फेफड़े डैमेज कर सकते हैं और मरीजों में मौत का खतरा बढ़ता है। डॉक्सीसायक्लीन ऐसी एंटीबायोटिक है जो सस्ती और आसानी से उपलब्ध है। ऐसे मरीजों रिकवरी के बाद यह दवा फेफड़ों के डैमेज होने से रोकती है। मरीजों की हालत में भी सुधार लाती है।

क्या टीवी का जड़ से खात्मा संभव है??

क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन जर्नल (Clinical Investigation Journal) में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, टीबी की वजह मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) बैक्टीरिया का संक्रमण है। इस बैक्टीरिया के संक्रमण के बाद फेफड़े में एक खास जगह पर धीरे-धीरे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ने लगती है। इस जगह को कैविटी कहते हैं। टीबी की यह दवाएं कैविटी पर पूरी तरह से असर नहीं करतीं। इसलिए टीबी का इलाज पूरा होने के बाद भी सांस लेने में दिक्कत, फेफड़ों में अकड़न और ब्रॉन्काइटिस का खतरा बढ़ता है। नतीजा, खांसने के दौरान खून आ सकता है।

जसलोक हॉस्पिटल में रेस्पिरेट्री मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. समीर गार्डे (Dr. Samir Garde, Consultant Respiratory Medicine at Jaslok Hospital) के अनुसार, टीबी के मरीज के छींकने, खांसने, बोलने और गाना गाने से टीबी का बैक्टीरिया सामने वाले इंसान को संक्रमित कर सकता है। संक्रमित इंसान के मुंह से निकली लार की बूंदों में टीबी के बैक्टीरिया होते हैं जो संक्रमण फैलाते हैं। ऐसे मरीज के सम्पर्क में आने से बचें। इसका पूरी तरह से इलाज संभव है। इसलिए लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सम्पर्क करें।

बता दें की दुनियाभर में हर साल करीब टीबी के एक करोड़ मामले सामने आते हैं। टीबी संक्रमण से होने वाली मौतों के बड़े कारणों में से एक है। टीबी का एक मरीज 5 से 15 लोगों को संक्रमित कर सकता है। 2019 में इससे दुनियाभर में 14 लाख लोगों की मौत हुई और 30 फीसदी तक टीबी के नए मामले भी मिले।

More articles

- Advertisement -
Web Portal Ad300x250 01

ताज़ा ख़बरें

Trending