सेहत के लिए किसी वरदान से कम नही लौंग, जानिए इसके चमत्कारिक फायदे

लौंग का इस्तेमाल अधिकतर गरम मसालों में किया जाता है, लेकिन इसमें कई ऐसे औषधीय गुण मौजूद हैं, जिससे शरीर की तमाम समस्याएं ठीक हो सकती हैं। लौंग की तासीर गर्म होती है। सर्दी-जुकाम की समस्या होने पर लौंग बहुत कारगर होता है। कई लोग इसका इस्तेमाल ज्यादातर चाय में डालकर करते हैं, जिससे चाय का स्वाद तो बढ़ता ही है, साथ ही सर्दी जुकाम की समस्या भी ठीक हो जाती है। लौंग एवं उसका तेल एंटी-ऑक्सीडेंट, कवकरोधी, जीवाणुरोधी, एंटी-वायरल, एंटी-सेप्टिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक जैसे उत्तम गुणों से भरपूर होता है।

लौंग में कम से कम 36 विभिन्न विभिन्न तत्व शामिल होते हैं, जिसमें से सबसे महत्वपूर्ण है-यूगेनॉल है। इसके अलावा पोटेशियम, सोडियम, फास्फोरस, लोहा, मैंगनीज, आहार फाइबर, आयोडीन, विटामिन के और सी, ओमेगा -3 फैटी एसिड, कैल्शियम और मैग्नीशियम आदि का भी लौंग एक प्रचुर स्रोत है। ऐसे में आइए जानते हैं इस जादुई मसाले के स्वास्थ्य संबंधी चमत्कारिक फायदे….

• लौंग आम सर्दी, भरी हुई नाक, गले में खराश, वायरल संक्रमण, अस्थमा, तपेदिक, ब्रोंकाइटिस और विभिन्न साइनस की स्थिति के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

• खांसी और बदबूदार सांसों के इलाज के लिए लौंग बहुत कारगर है। लौंग का नियमित इस्तेमाल इन समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। आप लौंग को अपने खाने में या फिर ऐसे ही सौंफ के साथ खा सकते हैं।

• लौंग के खुशबूदार और शान्ति प्रदायक गुण, उबकन एवं उलटी को दूर कर सकते हैं। यह गर्भावस्था से संबंधित उबकन और सुबह होने वाली उलटी एवं जी-मचलाई के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

• लौंग दांतो की सूजन को कम करने और दांतो के दर्द को दूर करने में अत्यंत सहायक होता है। साथ ही में, इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक गुण दांतो के प्रभावित क्षेत्र में संक्रमण से लड़ने और उसे फैलने से रोकने में भी मदद करता है।

• लौंग मुँह से आने वाली दुर्गन्ध साँस के बैक्टीरिया को मार सकता है। इसके अलावा वे जीभ, तालू और गले के ऊपरी भाग से बैक्टीरिया की सफाई में मदद करते हैं और इसकी सुगन्धित महक तो है ही जो बदबूदार सांस का खात्मा करने के लिए बहुत है।

• लौंग जठरांत्र मार्ग की चिकनी अस्तर को शिथिल कर उल्टी, दस्त, पेट में गैस, गैस्ट्रिक परेशानी और पेट दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं। इसके अलावा, लौंग का तेल सूजन को कम करने और पेट में बैक्टीरिया को मार, पेट को संक्रमण-मुक्त रखने में बेहद प्रभावी हैं।

• अपनी शान्ति एवं सुखदायक सुगंध के कारण, लौंग मन एवं शरीर को तनाव-मुक्त बनाने में मदद कर सकता है। तनाव अक्सर शरीर की मांसपेशियों में भी तनाव पैदा कर देता है। यूगेनोल, लौंग में मौजूद एक घटक है जो मांसपेशियों को रिलैक्स करने में बहुत प्रभावशाली है।

• लौंग मुँहासों के साथ-साथ ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स, सकाररिंग और त्वचा से संबंधित अन्य समस्याओं का इलाज करने में भी उपयोग किया जा सकता है। यह मुंहासों को तो कम करता ही है परंतु साथ ही में यह मुँहासों के बाद त्वचा पर रह जाने वाली ब्लेमिशेस या निशान को रोकने में बहुत प्रभावी है।

• अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक गुण के कारण, लौंग का तेल सूजन को कम करने और जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों में दर्द और गठिया के दर्द को कम करने में अत्यंत प्रभावी हैं। इसमें कैल्शियम, ओमेगा -3 फैटी एसिड और लौह जैसे हड्डियों के लिए महत्वपूर्ण खनिज निहित हैं जो आपके जोड़ों और हड्डियों की ताकत व स्वास्थय में सुधार लाने में सक्षम है।

लौंग से होने वाला नुकसान

लोग अक्सर लौंग को भोजन में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इसका अधिक सेवन सेहत के लिए बड़ी समस्या का कारण बन सकता है। जानते हैं लौंग के ज्यादा सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में…

>> लौंग की तासीर गर्म होती है जिसकी वजह से इसका ज्यादा सेवन आंखों में जलन की परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए इसके अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए।

>> जिन लोगों को ब्लीडिंग डिसऑर्डर जैसे हीमोफीलिया की बीमारी है, उन लोगों को लौंग का सेवन नहीं करना चाहिए। लौंग में खून को पतला करने के गुण होते हैं जिससे कटने या छिलने पर ब्लीडिंग ज्यादा हो सकती है।

>> अगर कोई व्यक्ति लौंग का अधिक सेवन करता है तो इससे किडनी और लिवर को भी नुकसान हो सकता है। क्योंकि इसकी तासीर बहुत गर्म होती है जिसके चलते लिवर, किडनी और पेट की परेशानी होने का खतरा रहता है।

>> अगर कोई महिला मां बनने वाले है तो उसे अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। गर्भावस्था के समय लौंग का सेवन ज्यादा करने से शुरूआती दिनों में ब्लीडिंग होने की संभावना होती है। इसलिए लौंग के सेवन से जितना हो सके बचना चाहिए।

>> अगर कोई लौंग का अधिक मात्रा में सेवन करता है तो इससे शरीर में ग्लूकोज़ का लेवल कम हो सकता है। इसलिए उन लोगों को लौंग का सेवन कम ही करना चाहिए जिनके शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा कम रहती हो। सेहत को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

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