एक अध्ययन में दावा; हिमालयी क्षेत्र दुनिया भर के लिये संभावनाओं से भरपूर खगोलीय स्थल के रूप में विकसित हो रहा

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय): भारतीय खगोलीय वेधशाला (आईएओ) लद्दाख में लेह के निकट हान्ले में स्थित है और दुनिया भर में संभावनाओं से भरपूर वेधशाला स्थल बन रही है। हाल के एक अध्ययन में यह कहा गया है। ऐसा इसलिये है कि यहां की रातें बहुत साफ होती हैं, प्रकाश से उत्पन्न होने वाला प्रदूषण नाममात्र को है, हवा में तरल बूंदें मौजूद हैं, अत्यंत शुष्क परिस्थितियां हैं और मानसून से किसी प्रकार की बाधा नहीं है। इस इलाके की यही खूबियां हैं।

भारत के अनुसंधानकर्ताओं और उनके सहयोगियों ने आठ ऊंचे स्थान पर स्थित वेधशालाओं के ऊपर रात के समय बादलों के जमघट का विस्तार से अध्ययन किया। इन वेधशालाओं में तीन भारत की वेधशालायें भी थीं। अनुसंधानकर्ताओं ने पुनर्विश्लेषित आंकड़ों का इस्तेमाल किया और 41 वर्षों के दौरान किये जाने वाले मुआयनों से उनका मिलान किया। इसमें उपग्रह से जुटाये गये 21 वर्ष के आंकड़ों को भी शामिल किया गया था। 

यह अध्ययन रोज किया गया। हान्ले और मेराक (लद्दाख) स्थित भारतीय खगोलीय वेधशाला, देवस्थल (नैनीताल) की वेधशाला, चीन के तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र की अली वेधशाला, दक्षिण अफ्रीका की लार्ज टेलिस्कोप, टोक्यो यूनिवर्सटी, अटाकामा ऑबजर्वेटरी, चिली, पैरानल और मेक्सिको की नेशनल एस्ट्रॉनोमिकल ऑबजर्वेटरी में इन आंकड़ों का मूल्यांकन किया गया।

दल ने निष्कर्ष निकाला कि हान्ले स्थल, जो चिली के अटाकामा रेगिस्तान जितना ही शुष्क है और देवस्थल से कहीं जाता सूखा है तथा वहां वर्ष में 270 रातें बहुत साफ होती है, वही स्थान इंफ्रारेड और सब-एमएम ऑप्टिकल एस्ट्रोनॉमी के लिये सर्वथा उचित है। इसका कारण यह है कि यहां वाष्प में इलेक्ट्रोमैगनेटिक संकेत जल्दी घुल जाते हैं और उनकी शक्ति भी कम हो जाती है।

भारतीय तारा भौतिकी संस्थान (आईआईए) बेंगलुरू के डॉ. शांति कुमार सिंह निंगोमबाम और आर्यभट्ट वेधशाला विज्ञान अनुसंधान संस्थान, नैनीताल के वैज्ञानिकों ने यह अनुसंधान किया। उल्लेखनीय है कि ये दोनों संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत स्वायत्तशासी संस्थान हैं। 

अध्ययन में सेंट जोसेफेस कॉलेज, बेंगलुरु और दक्षिण कोरिया के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मीटियोरोलोजिकल साइंसेस, यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो और कैमिकल साइंसेस लेब्रोटरी, एनओएए, अमेरिका ने इसमें सहयोग दिया। इस अध्ययन को मंथली नोटिस ऑफ रॉयल एस्ट्रोनोमिकल सोसायटी में प्रकाशित किया गया।

वैज्ञानिकों ने देखा कि पैरानल चिली के ऊंचाई पर स्थित रेगिस्तान में स्थित है और वह साफ आसमान तथा वर्ष भर में 87 प्रतिशत साफ रातों के मामले में बेहतरीन स्थल है। आईएओ-हान्ले और अली ऑबजर्वेटरी एक-दूसरे से 80 किमी के फासले पर स्थित हैं और साफ रातों के मामले में एक-दूसरे के समान हैं। 

वैज्ञानिकों ने यह भी देखा कि अन्य स्थानों की तुलना में देवस्थल में साफ रातें ज्यादा होती हैं, लेकिन वहां साल में तीन महीने बारिश होती है। बहरहाल, आइएओ-हान्ले में रातों को 2 मीटर के हिमालय चंद्र दूरबीन (एचसीटी) से अवलोकन बिना मानसून की बाधा के साल भर किया जा सकता है। रातें ज्यादा साफ हैं, प्रकाश का न्यूनतम प्रदूषण है, पानी की बूंदे मौजूद हैं और अत्यंत शुष्क वातावरण है।

साथ ही मानसून की कोई अड़चन भी नहीं है। इसलिये यह क्षेत्र खगोलीय अध्ययन के लिये अगली पीढ़ी के हवाले से पूरी दुनिया के लिये संभावनाओं से भरपूर क्षेत्र बन रहा है। अध्ययन का नेतृत्व करने वाले डॉ. शांति कुमार सिंह निंगोमबाम ने कहा, “भावी वेधशालाओं की योजना के मद्देनजर, पिछले कई वर्षों के दौरान जुटाये गये विभिन्न स्थानों से ऐसे विस्तृत विश्लेषण और समय-समय पर वातावरण में आने वाले बदलावों को पहले ही समझ लेना बहुत अहमियत रखता है।”

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